शैलबाला की दुखद हत्या

शैलबाला की दुखद हत्या

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

हिमाचल प्रदेश के कसौली नामक पर्यटन-केंद्र में एक सरकारी अफसर की जिस तरह हत्या की गई, उससे अधिक दुखद और शर्मनाक घटना क्या हो सकती है। यह सरकारी अफसर थीं, शैलबाला शर्मा ! शैलबाला सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले को लागू करने के लिए सड़क पर उतरी थीं, जिसके अनुसार कसौली के 13 होटलों के अवैध निर्माण-कार्यों को गिराना था। अदालत ने होटल मालिकों को 15 दिन का समय दिया था लेकिन उन्होंने वे अवैध निर्माण-कार्य हटाए नहीं। जब शैलबाला ‘नारायणी गेस्ट हाउस’ पर जाकर तालाबंदी करने लगीं तो उसके मालिक विजय ठाकुर ने गोलियां चलाकर शैलबाला के प्राण ले लिये। उस समय घटना-स्थल पर कई पुलिसवाले, कई छोटे-मोटे अधिकारी और कई लोग खड़े हुए थे लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया और हत्यारा गोलियां दाग कर फरार हो गया। यह हत्यारा हिमाचल प्रदेश के बिजली बोर्ड में नौकरी भी करता है।एक सरकारी नौकर किसी अफसर को गोलियों से भून दे, यह अपने आप में अजीब घटना है। इस तरह की घटनाओं से सरकार और न्यायालय दोनों की बेइज्जती होती है। दोनों का रोबदाब जनता पर से फीका पड़ता है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस घटना पर गहरा अफसोस जाहिर करते हुए यह कहा है कि उसके फैसलों का यही अंजाम होना है तो क्या वह इस तरह के फैसले करना ही बंद कर दे ? असलियत तो यह है कि हिल स्टेशनों पर बनीं होटलें नोटों की खदानें हैं। इनके मालिक किसी कानून-कायदे की परवाह नहीं करते। वे सरकारी जमीनों, नदियों, पर्वतों और सड़कों तक पर कब्जा कर लेते हैं। ऐसे मकान बना लेते हैं, जो कभी भी धराशयी हो सकते हैं। उनके खिलाफ राज्य सरकार उंगली भी नहीं उठाती, क्योंकि घूसखोरी के जरिए अफसरों और नेताओं के मुंह बंद कर दिए जाते हैं। शैलबाला ने हिम्मत दिखाई तो उसका नतीजा भुगत लिया। यदि सरकार ने इस मामले में तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं की तो ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अफसरों का अकाल पड़ जाएगा।

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