दादा प्रणब के दावे में दम नहीं

दादा प्रणब के दावे में दम नहीं

पचीस साल बाद जब एक बार फिर बजट पेश करने प्रणब मुखर्जी संसद जा रहे होंगे तो उनके दिमाग में आने वाले अप्रैल में मतदाताओं की लंबी कतारें जरूर रही होंगी।