समाज परंपराओं से दूरी और टूटता सामंजस्य April 27, 2026 / April 27, 2026 by राजेश खण्डेलवाल | Leave a Comment हमने अपनी परम्पराओं को केवल बाहरी आडंबर और दिखावे तक सीमित कर दिया है। जब घर के बड़े रीति-रिवाजों के पीछे छिपे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक अर्थ युवा पीढ़ी को नहीं समझा पाते, तो वे इसे 'बोझ' समझने लगते हैं। हम खुद तो अपनी जड़ों से कटे, लेकिन उम्मीद की कि बच्चे उन्हें थामे रखें। युवा पीढ़ी को दोष देने से पहले हमें यह सोचना होगा कि क्या हमने उन्हें परम्पराओं का 'सौंदर्य' दिखाया है या केवल 'डर'? Read more » परंपराओं से दूरी और टूटता सामंजस्य