लेख विधि-कानून मनुस्मृति और भारतीय संविधान, भाग – 13 ख May 14, 2026 / May 14, 2026 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वर्तमान न्याय प्रणाली के दोषों पर विचार व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने लंबित मामलों और उनमें हो रही देरी की समस्या पर कहा था कि भारत की जिला अदालतों में लगभग 26.8 करोड़ वाद लंबित हैं। यह तभी संभव हुआ है जब न्यायालय में पड़े मामलों में देरी से सुनवाई की जाती है। प्रक्रिया को लंबा खींचा जाता है। Read more » मनुस्मृति और भारत का सर्वोच्च न्यायालय मनुस्मृति और भारतीय संविधान
लेख विधि-कानून मनुस्मृति और भारतीय संविधान, भाग – 13 क May 12, 2026 / May 12, 2026 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अंग्रेजों ने हमारे देश में जब अपने न्यायालय स्थापित किये तो उन्होंने संवेदनाशून्य न्याय प्रणाली की स्थापना की। जिनका भारतीय लोगों के प्रति तनिक सा भी लगाव नहीं था। वे सारे के सारे न्यायाधीश उपनिवेशवादी व्यवस्था की उपज थे। जिन्हें उपनिवेशवादी अधिकारियों , कर्मचारियों और स्वदेश के लोगों का बचाव करना था। Read more » Manusmriti and the Indian Constitution मनुस्मृति और भारत का सर्वोच्च न्यायालय मनुस्मृति और भारतीय संविधान