राकेश कुमार आर्य

उगता भारत’ साप्ताहिक / दैनिक समाचारपत्र के संपादक; बी.ए. ,एलएल.बी. तक की शिक्षा, पेशे से अधिवक्ता। राकेश आर्य जी कई वर्षों से देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। अब तक चालीस से अधिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वर्तमान में ' 'राष्ट्रीय प्रेस महासंघ ' के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं । उत्कृष्ट लेखन के लिए राजस्थान के राज्यपाल श्री कल्याण सिंह जी सहित कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं । सामाजिक रूप से सक्रिय राकेश जी अखिल भारत हिन्दू महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति के राष्ट्रीय सलाहकार भी हैं। ग्रेटर नोएडा , जनपद गौतमबुध नगर दादरी, उ.प्र. के निवासी हैं।

अफगानिस्तान में अमेरिका के हारने की आखिर वजह क्या रही?

अफगानिस्तान को लंबे समय से सोवियत संघ/रूस, ब्रिटेन, अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब, भारत और निश्चित रूप से पाकिस्तान से लगातार...

भारतीय स्वाधीनता का अमर नायक राजा दाहिर सेन अध्याय – 2, भाग – 2, राजा पोरस का अवतार

राजा पोरस का अवतार हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि सिकन्दर के समय राजा पोरस ने अपने पौरुष के...

भारतीय स्वाधीनता का अमर नायक राजा दाहिर सेन, अध्याय -3 , भाग – 2, अदम्य साहस और शौर्य का प्रतीक राजा दाहिर सेन

अदम्य साहस और शौर्य का प्रतीक राजा दाहिर सेन सब लोगों को मारता हुआ भी नहीं मारता, यह बात आज...

भारतीय स्वाधीनता का अमर नायक राजा दाहिर सेन, अध्याय – 3, भाग – 1 क्यों है हमारी स्वाधीनता कर रक्षक राजा दाहिर सेन ?

क्यों है हमारी स्वाधीनता का रक्षक राजा दाहिर सेन? दाहिर सेन को स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय संस्कृति का रक्षक क्यों...

केरल के एक चर्च ने 5 से अधिक बच्चा पैदा करने पर की पुरस्कार देने की घोषणा

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य भारतवर्ष में देश और समाज को आगे बढ़ाने के लिए भी कोई सरकार दिल से काम...

प्रधानमंत्री जी ! गुपकार गठबंधन को मिलना चाहिए कड़ा संदेश

यह एक अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों की बैठक आहूत कर राजनीतिक...

भारतीय मुसलमानों को संविधान अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं देता तो फिर उन्हें किसने बना दिया अल्पसंख्यक

भारत के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मुसलमानों को अल्पसंख्यक घोषित करता हो, लेकिन राजनीति में ‘सेकुलर...

मजहब ही तो सिखाता आपस में बैर रखना : देश का विभाजन और आजादी के बाद की राजनीति

देश का विभाजन और आजादी के बाद की राजनीति अलिखित रूप से अंग्रेजों और मुसलमानों के बीच बनी उपरोक्त सहमति...

मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना : अंग्रेजों की मुस्लिमपरस्ती को कांग्रेस का समर्थन और देश विभाजन

अंग्रेजों ने मुस्लिमों को समझा दिया था…… भारत में मुस्लिम सांप्रदायिकता शासन द्वारा प्रायोजित होती रही थी । अंग्रेजों ने...

मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना, अध्याय : भारत में सांप्रदायिकता, अंग्रेज और कॉन्ग्रेस

भारत में साम्प्रदायिकता ,अंग्रेज और कॉंग्रेस भारत में प्राचीन काल में शासन की नीति का आधार पंथनिरपेक्ष विचारधारा होती थी...

‘मल्लपुरम’ के बाद अब ‘मलेरकोटला’ : कहीं नए ‘जूनागढ़’ और ‘हैदराबाद’ का निर्माण तो नहीं ?

1905 में जब सांप्रदायिक आधार पर अंग्रेजों ने बंगाल प्रांत का विभाजन किया तो ‘बंग भंग’ के नाम से विख्यात...

19 queries in 0.365