लेखक परिचय

राकेश कुमार आर्य

राकेश कुमार आर्य

'उगता भारत' साप्ताहिक अखबार के संपादक; बी.ए.एल.एल.बी. तक की शिक्षा, पेशे से अधिवक्ता राकेश जी कई वर्षों से देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। अब तक बीस से अधिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वर्तमान में 'मानवाधिकार दर्पण' पत्रिका के कार्यकारी संपादक व 'अखिल हिन्दू सभा वार्ता' के सह संपादक हैं। सामाजिक रूप से सक्रिय राकेश जी अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति के राष्ट्रीय सलाहकार भी हैं। दादरी, ऊ.प्र. के निवासी हैं।

भारत की खाप पंचायतों के तालिबानी फरमान

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राकेश कुमार आर्य  भारत में प्रचलित खाप पंचायतों के विरुद्ध शिक्षित वर्ग और देश के न्यायालयों की कड़ी आपत्ति समय-समय पर आती रही है। इसके उपरांत भी खाप पंचायतों के अन्यायपूर्ण और निर्दयता से भरे निर्णय को हम बार-बार सुनते रहते हैं। ऐसे में खाप पंचायतों की स्थिति के बारे में हमें गंभीरता से… Read more »

किस माटी के बने हैं भारत के प्रधानमंत्री श्री मोदी

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राकेश कुमार आर्य मोदी को लेकर विदेशों में भी संपादकों, लेखकों और स्तंभकारों की लेखनी निरंतर चलती रहती है। कई लोगों के मन-मस्तिष्क में श्री मोदी को लेकर जहां सम्मान का भाव है तो कईयों के मन-मस्तिष्क में उनके प्रति दुर्भाव भी है। वे नहीं चाहते कि भारत की लगाम किसी सशक्त नेतृत्व के हाथों… Read more »



राजनीतिक दलों की मतभिन्नता देश के लिए एक अभिशाप

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राकेश कुमार आर्य लोकतंत्र मतभिन्नता की अनुमति इसलिए देता है कि अंत में सब पक्षों में मतैक्यता हो जाये। किसी भी विषय में गुणावगुण पर सब पक्ष खुलकर बहस करें और फिर किसी एक सर्वमान्य निष्कर्ष पर पहुंच कर एक मत हो जाएं। भारतवर्ष के संविधान ने लोगों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इसलिए… Read more »

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग मुलाकात के क्या हैं मायने

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राकेश कुमार आर्या 6 अगस्त 1945 की वह घटना है जब जापानी समय के अनुसार प्रात: के 8:15 हुए थे, तभी हिरोशिमा शहर के केंद्र से 580 मीटर की दूरी पर परमाणु बम का विस्फोट हुआ। शहर का 80 प्रतिशत भाग इस विस्फोट की चपेट में तुरंत आ गया था और लोगों का जीवन वैसे… Read more »

गीता का कर्मयोग और आज

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गीता का कर्मयोग और आज राकेश कुमार आर्य  गीता का अठारहवां अध्याय अधर्म को धर्म समझ लेना घोर अज्ञानता का प्रतीक है। मध्यकाल में बड़े-बड़े राजा महाराजाओं ने और सुल्तानों ने अधर्म को धर्म समझकर महान नरसंहारों को अंजाम दिया। ये ऐसे नरसंहार थे -जिनसे मानवता सिहर उठी थी। वास्तव में ये कार्य तामसी… Read more »

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-91

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राकेश कुमार आर्य   गीता का अठारहवां अध्याय योगीराज श्रीकृष्णजी अर्जुन को बताते हैं कि किसी भी देहधारी के लिए कर्मों का पूर्ण त्याग सम्भव नहीं है। ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई व्यक्ति कर्मों का पूर्ण त्याग कर दे। कर्म तो लगा रहता है, चलता रहता है। गीता की एक ही शर्त… Read more »

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-92

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राकेश कुमार आर्य गीता का अठारहवां अध्याय अंग्रेजों के कानून ने किसी ‘डायर’ को फांसी न देकर और हर किसी ‘भगतसिंह’ को फांसी देकर मानवता के विरुद्ध  अपराध किया। यह न्याय नहीं अन्याय था। यद्यपि अंग्रेज अपने आपको न्यायप्रिय जाति सिद्घ करने का एड़ी चोटी का प्रयास आज भी करते हैं। इसके विपरीत गीता दुष्ट… Read more »

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-90

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राकेश कुमार आर्य    गीता का अठारहवां अध्याय अठारहवें अध्याय में गीता समाप्त हो जाती है। इसे एक प्रकार से ‘गीता’ का उपसंहार कहा जा सकता है। जिन-जिन गूढ़ बातों पर या ज्ञान की गहरी बातों पर पूर्व अध्याय में प्रकाश डाला गया है, उन सबका निचोड़ इस अध्याय में दिया गया है।… Read more »

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-89

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राकेश कुमार आर्य   गीता का सत्रहवां अध्याय अपनी चर्चा को निरंतर आगे बढ़ाते हुए श्रीकृष्णजी कहने लगे कि जो दान, ‘देना उचित है’-ऐसा समझकर अपने ऊपर प्रत्युपकार न करने वाले को, देश, काल तथा पात्र का विचार करके दिया जाता है उस दान को सात्विक दान माना गया है। इस प्रकार का दान… Read more »

उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास समिति 2018 के परिप्रेक्ष्य में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव:

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देवेंद्र सिंह आर्य प्रधानमंत्री मोदी जी की सेवा में महोदय, उत्तर प्रदेश के विकास की बातें आपके व मुख्यमंत्री योगी जी द्वारा सकारात्मक पहल करते हुए की जा रही हैं। इसके लिए जेवर में जिस तरह से विश्व के चौथे नंबर पर आने वाले विशाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण कराए जाने का आपकी सरकार… Read more »