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विश्ववार्ता

मॉरीशस की स्वतन्त्रता-प्राप्ति में आर्यसमाज का योगदान

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महर्षि दयानन्द ने राजनैतिक सुधार की ओर देशवासियों का ध्यान आकृष्ट किया । उनका कथन है कि जात-पाँत, भेद-भाव और उच्च-नीच की भावना के कारण देश में फुट की बेल फैलती जाती है तथा विदेशी शासक इससे पूरा लाभ उठाते हैं। महर्षि ने हिन्दुओं में प्रचलित छूत-छात का खण्डन करते हुए लिखा "इसी मूढ़ता से इन लोगों ने चौका लगाते-लगाते, विरोध करते-कराते सब स्वातन्त्र्य, आनन्द, धन, राज्य, पिद्या और पुरुषार्थ पर चौका लगाकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।"

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