गाँधी जी और आज की यांत्रिक सभ्यता – भाग-3

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गाँधी जी ने सभ्यता के  जो रूप बताए है, वे  विचारणीय है। संवेदनशील पाठक आत्म-मंथन के लिए विवश होगा और सोचेगा, कि क्या सभ्यता के ये ही नए कँटीले शिखर हैं? गाँधी जी के विचारों का एक लम्बा अंश यहाँ प्रस्तुत करने का मोह संवरण नहीं कर पा रहा हूँ. उन्होंने कहा कि सौ साल… Read more »

गाँधी जी और आज की तथाकथित यांत्रिक सभ्यता – भाग-2

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गाँधी जी ने इग्लैंड की पार्लियामेंट को ‘बाँझ और वेश्या’ कहा था। बाद सें उन्होंने वेश्या शब्द को विलोपित कर दिया था। लेकिन उनका आरोप सही था। आज भारतीय परिप्रेक्ष्य में भी ये दोनों शब्द अप्रासंगिक नही हैं। हमारी संसद जनहित में अनेक निर्णय तो करती है लेकिन वे कार्यरूप में परिणत नही हो पाते।… Read more »

गाँधी जी और आज की तथाकथित यांत्रिक सभ्यता – भाग-1

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‘प्रवक्ता’ के माध्यम से ‘हिंद स्वराज्य’ पर गंभीर-विमर्श की एक सार्थक शुरुआत  हुई. पूरी टीम को बधाई. अनेक विचार पढने के बाद  मेरे  मन भी हलचल हुई. सोचा, कि कुछ तो लिखा जाये. ‘हिंद स्वराज्य’ में गाँधी जी ने यंत्रो को लेकर भी गंभीर चर्चा की है. मै गाँधी जी के दर्शन के सन्दर्भ में… Read more »