म.प्र. विधानसभा का अनुकरणीय व शालीन अध्याय

Posted On by & filed under राजनीति

प्रवीण गुगनानी यदि भारतीय राजनीति में लोकतंत्र को एक राजनैतिक धर्म माने तो संसदीय सदनों और विधानसभाओं को इस धर्म का मंदिर मानने में कोई गुरेज नहीं होनी चाहिए, और संयोग वश भारतीय राजनैतिक परिवेश में ऐसी मान्यताएं स्थापित व सर्वमान्य भी है. संसदीय सदनों, विधानसभाओं को भले मंदिर माने किन्तु प्रक्रियाओं में और पक्ष… Read more »