लेखक परिचय

प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी, दैनिक समाचार पत्र दैनिक मत के प्रधान संपादक, कविता के क्षेत्र में प्रयोगधर्मी लेखन व नियमित स्तंभ लेखन.

आतंकियों के सहयोगी रोहिंग्याइयों के हमदर्द शाही इमाम

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बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला पूर्व से ही देश के समक्ष एक चुनौती बन कर खड़ा हुआ है. आसाम और अन्य कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक तानेबाने व स्थानीय शांति व्यवस्था के लिए घातक ख़तरा बन चुके ये घुसपैठिये तमाम प्रकार की आपराधिक व आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न रहते हैं. मालदा जो कि मुस्लिम बहुल जिला… Read more »

हामिद अंसारी: अभिव्यक्ति या षड्यंत्र 

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इस देश में, चर्चा का एक जीवंत विषय रही है. किंतु पिछले तीन वर्षों से इस विषय का वितान व विस्तार कुछ विचित्र और कुछ अजब सा हुआ है. आज के समय में मीडिया के सीमित दृष्टिकोण (फोकस्ड) ने कुछ भी कहने, सुनने, लिखने को पार्टी विशेष के प्रति निष्ठा कहना प्रारंभ… Read more »



शाहबानो से शायरा बानो तक

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यह बड़ा ही शर्मनाक तथ्य है कि जो तीन तलाक पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी इस्लामिक देश में 1961 में प्रतिबंधित हो गया  और पच्चीसों अन्य अरब-इस्लामिक देशों में दशकों से प्रतिबंधित है वही तीन तलाक भारत में आज भी शाहबानों से लेकर शायरा बानों तक कछुआ चाल से ही पहुँच पाया है. शायरा बानो वह मुस्लिम… Read more »

बिहार प्रहसन अर्थात 2019 की पटकथा 

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इतिहास साक्षी रहा है कि बहुत से अवसरों पर गंगा किनारे बसे नगर प्राचीनतम नगर पाटलिपुत्र ने भारत के इतिहास की दशा और दिशा परिवर्तित की है। पाटलिपुत्र का एतिहासिक व तात्कालिक महत्व सदा जीवित ही नही अपितु चैतन्य व जागृत रहा है। मौर्यों के समय, गुप्तवंश के समय, मुगलों के समय, गुरु गोविंदसिंग के… Read more »

एक स्वयंसेवक का राष्ट्रपति बनना

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यूं तो भारत में राष्ट्रपति भवन का अपना एक सुसंस्कृत, विद्वतापूर्ण, व गरिमामय इतिहास रहा है( कांग्रेस के तीन चयन – फखरुद्दीन अली अहमद, ज्ञानी जैलसिंह व प्रतिभा पाटिल के अपवाद छोड़ देवें). भारत के राष्ट्रपतियों व उपराष्ट्रपतियों की इस गौरवशाली परंपरा में अब एक स्वयंसेवक के राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति बनने की नई अनूठी कड़ी… Read more »

  प्रखर राष्ट्रवाद का प्रतीक इजराइल और मोदी  

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आज भारत को अमेरिका के पश्चात सबसे अधिक हथियार प्रदाय करनें वाला देश इजराइल है. कृषि क्षेत्र में भी इजराइल बहुत अग्रणी तकनीक वाला राष्ट्र है. इजराइल की कृषि तकनीक गजब की जल बचत की तकनीक है जिसकी आवश्यकता भविष्य में समूचे विश्व को पड़ने वाली है. कृषि क्षेत्र में भारत द्वारा बनाए जा रहे 26 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में से 15इजराइल के सहयोग से विकसित किये जा रहे हैं.

ट्रंप-नमो का सामंजस्य और ड्रेगन की भड़ास

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“आतंकवाद का समाप्ति हमारी शीर्ष प्राथमिकता है” यह कहकर ट्रंप ने मुंबई व पठानकोट के दोषियों को शीघ्र कटघरे में लानें व सजा देनें की बात भी कही. “आतंकवाद हेतु पाकिस्तान की धरती का उपयोग पाकिस्तान को परेशानी व संकट में डालेगा” इस संदेश को दृढतापूर्वक प्रकट करनें में दोनों नेताओं ने स्पष्ट शब्दों व भावभंगिमा का प्रयोग किया.

भाजपाई सोशल इंजीनियरिंग के शिल्प: कोविंद

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भारत में राष्ट्रपति चुनावों में प्रत्याशियों के चयन का बेहद उजला व प्रतिष्ठाजनक इतिहास रहा है तो वहीँ दूसरी ओर ग्यानी जैलसिंह व प्रतिभा पाटिल जैसे नाम भी रहें हैं जिन्होनें राष्ट्रपति भवन की गरिमा को दीर्घकालीन चोटिल किया है. ज्ञानी जैलसिंह सिंह ने तो सार्वजनिक रूप से कह दिया था कि मैं सार्वजनिक रूप से इंदिरा गांधी की चप्पलें भी उठा सकता हूँ. ठीक इसी भातिं प्रतिभा ताई पाटिल की सबसे बड़ी योग्यता “गांधी परिवार की वफादारी” मात्र ही थी.

नरेंद्र मोदी के तीन वर्ष

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जर्मनी के एकीकरण के वास्तुकार बिस्मार्क ने अपनी राष्ट्र नीति को स्पष्ट करते हुए कहा था – “जर्मनी का ध्यान प्रशा के उदारवाद पर नहीं अपितु उसकी शक्ति पर लगा हुआ है. जर्मनी की  समस्याओं का समाधान बौद्धिक भाषणों से नहीं, आदर्शवाद से नहीं, बहुमत के निर्णय से नहीं वरन प्रशा के नेतृत्व में तलवार… Read more »

व्यग्र न हों – मोदी पर विश्वास रखें

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जैसा कि इस आलेख के प्रथम पक्ष में ही मैंने चाणक्य का उद्धरण देकर बताया कि हमें स्वयं को साधकर सटीक समय पर अपना सर्वोत्तम करना होगा. आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यही है. और आज के समय की सबसे दुखद परिस्थिति यही है कि हमारी पीढ़ी कुछ अधिक व्यग्र है, वह कुछ अधिक ही हावी होनें के प्रयास में भी रहती है किंतु इस क्रम में आगे बढ़ते हुए वह स्वनियंत्रण को ही खो बैठती है जो इस समय की मूल ही नहीं अपितु परम आवश्यक आवश्यता रहती है. हम देख रहें हैं कि पाकिस्तान द्वारा हमारें सैनिकों के साथ पाशविक आचरण के बाद मीडिया पर और विशेषतः सोशल मीडिया द्वारा नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जिस तरह का बदला लेनें का मानसिक दबाव बना दिया गया है. लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित किसी भी सरकार के लिए ऐसा जनदबाव खतरनाक साबित हो सकता है, वो तो अच्छा है कि मोदी सरकार और उसके विभिन्न भाग व अंग इस जनदबाव के समक्ष भी अपनें विवेक व दायित्वबोध को यथा स्थान, यथा समय व यथा संतुलन समायोजित किये हुए है.