कविता व्यर्थ नहीं बहती कविता February 19, 2026 / February 19, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment “कविताएँअब भी फूटती हैं भीतर से—जैसे चट्टानों के बीचअदृश्य जलस्रोत। पर जीवन,ओह जीवन!तुम क्यों सूखी नदी की तरहमेरे सामने पसरे पड़े हो? शब्दों में हरियाली है,दिनों में बंजरपन।स्वप्नों में उजाला है,जागती आँखों में धूल। मैंने चाहा थाएक साधारण प्रसन्नता—रोटी की गर्म भाप,कंधे पर रखा भरोसे का हाथ,और सांझ में लौटती थकान की शांति। पर मिला—अधूरे […] Read more » व्यर्थ नहीं बहती कविता