हाथ दुश्मन का थाम लूं कैसे…..

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इक़बाल हिंदुस्तानी ऐसा मसलों का हल बताये कोई, के ग़रीबों को ना सताये कोई।   मुंसिफ़ों तक पहुंच है मुजरिम की, जुर्म से कैसे बाज़ आये कोई।   ज़ालिमों को सज़ा भी दो ऐसी, दिल किसी का ना फिर दुखाये कोई।   हाथ दुश्मन का थाम लूं कैसे , वो नई चाल चल ना जाये… Read more »