व्यंग्य आईने, चेहरे और चरित्र April 7, 2017 by अशोक गौतम | Leave a Comment आखिर मन मसोस कर सरकार ने जनहित में चेतावनी जारी की,’ देश के तमाम तबके के चेहरों को सूचित किया जाता है कि वे आईने के सामने आने से बचें। आईनों ने देश के तमाम चेहरों के विरूद्ध उनका चेहरा सजाने के बदले उनके चरित्र को दिखाने की जो मुहिम छेड़ी है ,वह राष्टर विरोधी है। सरकार अखिल समाज आईना संघ के इस निर्णय की हद से अधिक निंदा करती है। Read more » आईने चरित्र चेहरे
कविता विविधा कनिष्क कश्यप : अक्श बिखरा पड़ा है आईने में June 10, 2009 / December 27, 2011 by कनिष्क कश्यप | 3 Comments on कनिष्क कश्यप : अक्श बिखरा पड़ा है आईने में अक्श बिखरा पड़ा है आईने में मैं जुड़ने कि आस लिए फिरता हूँ कदम तलाशते कुछ जमीं हाथों पर आकाश लिए फिरता हूँ कठोर हकीक़त है है मेरा आज कल खोया विस्वास लिए फिरता हूँ कदम उठते पर पूछते कुछ सवाल क़दमों का उपहास लिए फिरता हूँ कामयाबियां खुशी नहीं दे पाती ऐसी कमी का […] Read more » Mirror आईने