कविता
सच में ये मिट्टी का तन
/ by विनय कुमार'विनायक'
—विनय कुमार विनायकसच में ये मिट्टी का तन,जिसमें समाहित है समीर,क्षिति,जल,पावक व गगन! सचमुच ये माटी का तन,धरातल का है ये सम्बन्ध,धरा का आकर्षण-विकर्षण! मिट्टी का ये अद्भुत तन,जिसमें जल अग्नि मिश्रण,वायु व आकाश का संगम! रात्रि में जब सूर्यातप कम,क्षैतिज हो सो जाता वदन,अग्नि लौ से उदग्र जीवन! सच में ये मिट्टी का तन,चाहे […]
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