शांत चित्त ही दे सकता है सुकून

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डॉ. दीपक आचार्य शोरगुल में रमना पागलपन से कम नहीं, आज का सफर कई जोखिमों से भरा हो चला है। जोखिम बाहर के भी हैं और भीतर के भी। कई जोखिम दुर्भाग्यजनित हैं तो कई मानवजनित। अनायास आ टपकने वाले जोखिमों के बारे में कोई कुछ नहीं कर सकता मगर मानवजनित हरकतें खतरनाक से कम… Read more »