कविता
मै मिलूँगा वहीं!
/ by बीनू भटनागर
मन्दिर को तोड़कर, मस्जिद बनाली तो क्या हुआ! तुम मस्जिद को तोड़कर अब, मन्दिर बनालो! ऊपर बैठा हुआ वो हंस रहा होगा…. मेरे ही घर को तोड़ तोड कर, कब तक बनाओगे, मैने तो वहाँ रहना, कबका छोड़ दिया है। मै तो रहता हूँ, बादलों की ओट मे कभी, पर्वतो की ऊँचाई मे, ढूढलो […]
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