डा.वेदप्रकाश
जन जन को आत्मविश्वास से भरने का मंत्र है – वी विल डू इट। विगत दिनों विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के मुखिया के तौर पर वर्ष 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर अब तक की यात्रा पर महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। इसी वक्तव्य में उन्होंने विगत वर्षों से निरंतर हो रहे बड़े बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि- यह तभी होता है जब नियत साफ होती है और नीति स्पष्ट होती है।
सरकार के मुखिया के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्ष की यह यात्रा निश्चित ही सभी के लिए प्रेरक और मार्गदर्शी है क्योंकि अपने राजनीतिक जीवन में और उससे पूर्व भी नरेंद्र मोदी निरंतर समाज और राष्ट्र कल्याण हेतु प्रतिबद्ध रहे हैं। विदित हो की 15 अगस्त 2014 को लालकिले की प्राचीर से अपने पहले ही संबोधन में उन्होंने कहा था- मैं आपके बीच प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, प्रधानसेवक के रूप में उपस्थित हूं…आजादी के इस पावन पर्व पर मां भारती के कल्याण के लिए, हमारे देश के गरीब, पीड़ित, दलित, शोषित, समाज के पिछड़े हुए सभी लोगों के कल्याण का, उनके लिए कुछ न कुछ कर गुजरने के संकल्प का यह पर्व है। इसके बाद उन्होंने कार्य संस्कृति में लगातार बदलाव करते हुए ढांचागत आवश्यकताओं में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए व्यापक योजनाएं क्रियान्वित की और नए भारत व समर्थ भारत का संकल्प प्रस्तुत किया। उन्होंने सुशासन, सबका साथ- सबका विकास और पारदर्शिता जैसे मंत्रों के सहारे जन भागीदारी का एक व्यापक वातावरण निर्माण किया। इसके साथ ही साफ नीयत से जनकल्याण हेतु प्रधानमंत्री जन धन योजना, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, गरीबी मुक्त भारत, नारी सशक्तिकरण, समृद्ध किसान, खेलता भारत तथा पढ़ता भारत आदि अनेक योजनाओं को तेजी से लागू किया। बुनियादी ढांचे में बदलाव और कामकाज की सुगमता होने से अर्थव्यवस्था को निरंतर गति मिली तो विज्ञान के क्षेत्र में वे नए भारत को गगनयान की ऐतिहासिक संकल्पना से सिद्धि की ओर भी ले चले।

विकास की पंचधारा से सामान्य व्यक्ति के जीवन में अनेक बदलाव आए। आज पंक्ति में खड़ा अंतिम व्यक्ति भी स्वयं को विकास का भागीदार समझते हुए नए आत्मविश्वास से भरकर आगे बढ़ रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में विश्व के अनेक देशों में अनिश्चितता का वातावरण बन गया था। कई देशों की आर्थिक व्यवस्था बिगड़ गई थी। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का संकल्प प्रस्तुत करते हुए अपने नागरिकों को तो एक नया भरोसा दिया ही, कई देशों को भिन्न-भिन्न रूप में सहायता पहुंचाकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को भी साकार किया।
राजनेता के रूप में राष्ट्रीय और वैश्विक पटल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता सर्वाधिक है। उनके द्वारा प्रत्येक महीने मन की बात जहां जन-जन की बात बनती जा रही है तो वहीं वैश्विक मंचों पर वे आतंकवाद, विस्तारवाद, युद्ध, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और मानवता के विरुद्ध होने वाले किसी भी कृत्य की न केवल आलोचना करते हैं अपितु उसके समाधान हेतु भी समूचे विश्व को एकजुट करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
स्वामी विवेकानंद ने अपने संबोधनों में कहा था कि-विश्व की पीड़ित मानवता को भारत ही सहारा दे सकता है। गांधी जी ने भी कहा था कि- भारत अपने आत्मबल से सबको जीत सकता है… मेरा पूरा विश्वास है कि उसके पास सारी दुनिया के लिए एक संदेश है। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यों में भी वैदिक चिंतन,भारतवर्ष की ज्ञान परंपरा, स्वामी विवेकानंद,महात्मा गांधी, बाबा साहब अंबेडकर, दीनदयाल उपाध्याय, मदन मोहन मालवीय, सरदार पटेल एवं अटल बिहारी वाजपेई जैसे महापुरुषों की वैचारिक निरंतरता विद्यमान है। हाल ही में चेन्नई में एक कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि- आज दुनिया समाधान तलाश रही है, आपमें इन्हें देने की क्षमता है… आपके नए विचारों से ही भारत और विश्व का भविष्य तय होगा…। आज देश दुनिया को नरेंद्र मोदी के शब्दों और नेतृत्व में भरोसा है तो इसका बड़ा कारण यह है कि वे जब भी कोई बड़ा संकल्प प्रस्तुत करते हैं तो वह राजनीतिक स्वार्थ से परे जनकल्याण और राष्ट्र प्रमुख के भाव से समन्वित होता है।
वर्ष 2022 में लालकिले की प्राचीर से उन्होंने पंच प्रण प्रस्तुत किए। जिसमें सबसे पहला प्रण- विकसित भारत था। इस बड़े संकल्प अथवा विचार की पूर्ति हेतु उन्होंने गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता और नागरिकों का कर्तव्य बोध की भी व्यापक चर्चा की थी। यहां महत्वपूर्ण यह है कि उनके विकसित भारत के विजन और संकल्प में प्रतिबद्धता है और जन-जन को साथ लेकर चलने की योजना भी। इसके लिए वे ग्रामोदय, वोकल फार लोकल, स्वदेशी, समरस समाज, मूल्यपरक शिक्षा, जल संरक्षण, प्रकृति- पर्यावरण की चिंता, एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियान और जी 20 जैसे बड़े मंचों से नए विचारों की परिकल्पना प्रस्तुत कर रहे हैं।
हाल ही के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वी विल डू इट के माध्यम से जन-जन में आत्मविश्वास भरते हुए उनकी भागीदारी का आवाह्न किया है। भारी जनसमूह के समक्ष उन्होंने अपने जीवन की 25 वर्ष की यात्रा के इस कार्यक्रम के माध्यम से देश को नया मंत्र दिया है। उन्होंने कहा विकसित भारत 2047- वी विल डू इट। टाप थ्री इकोनमी- वे विल डू इट। आत्मनिर्भर भारत- वी विल डू इट। ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब- वी विल डू इट। ओलंपिक आयोजन- वी विल डू इट। अंतरिक्ष में कदम- वी विल डू इट।
स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया वी विल डू इट का सूत्र जन-जन को नई ऊर्जा, नए उत्साह और नए आत्मविश्वास से जोड़ने वाला है। विगत कई वर्षों से समूचा विपक्ष विकास की गति और विकसित भारत की प्रगति को झूठे नेरेटिव और धरने-प्रदर्शनों से बाधित करने का प्रयास कर रहा है। अब स्पष्ट हो चुका है कि राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति हेतु विपक्ष कभी किसान आंदोलन, कभी जाति-संप्रदाय के किसी मुद्दे पर आंदोलन, कभी शिक्षा व्यवस्था में कमियों के बहाने तो कभी निर्वाचन आयोग पर आरोप- प्रत्यारोप लगाकर जंतर मंतर, चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय पर धरने- प्रदर्शनों के जरिए सरकार और देश को अस्थिर करने के लिए प्रयासरत है। जाहिर सी बात है कि इस प्रकार के कृत्यों से हजारों करोड़ रुपए का नुकसान तो हुआ ही है सामान्य व्यक्ति के जीवन का अधिकार भी खुलेआम बाधित किया जा रहा है। आज यह भी समझने की जरूरत है कि कुछ हजार लोगों के गैर संवैधानिक धरने-प्रदर्शनों से करोड़ों लोगों का जीवन का संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहा है। क्या इस प्रकार के लोग विकसित भारत के संकल्प में बाधक नहीं हैं? विपक्ष में बैठे लोग भी जनप्रतिनिधि हैं। विकसित भारत के लिए यह आवश्यक है कि वे संसद में बैठकर जनकल्याणकारी योजनाएं बनवाने और उन्हें समुचित रूप में क्रियान्वित करने हेतु प्रयास करें।
स्वतंत्रता आंदोलन में भी भारत के जन जन ने ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास से ही लड़कर विजय प्राप्त की थी। विकसित भारत 2047 का संकल्प हेतु वी विल डू इट का मंत्र जन जन की ताकत बनेगा, ऐसी आशा है।
डा.वेदप्रकाश