लेखक परिचय

विजय सोनी

विजय सोनी

DOB 31-08-1959-EDUCATION B.COME.LL.B-DOING TAX CONSULTANT AT DURG CHHATTISGARH

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विजय सोनी


माननीय अन्ना हजारे जी ने दिल्ली के जंतर मंतर में एक अभूतपूर्व जन आन्दोलन लोकपाल विधेयक के लिए और इसकी ड्राफ्टिंग कमेटी में जनता के प्रतिनिधित्व और इसके स्वरुप को लेकर छेड़ा, इस देश के आम नागरिकों ने स्वमेव आगे आकर प्रबल समर्थन दिया केंद्र की सरकार को झुकाना पड़ा ,अन्ना जी की कल्पना व्यावहारिक सिद्ध हुवी सरकार ने ड्राफ्टिंग कमेटी में सुझाये गए लोगों का नाम शामिल किया,लोकपाल बिल के लिए अधिसूचना जारी हुवी , १० लोगों की ये कमेटी १६ अप्रेल से ड्राफ्टिंग का काम प्रारंभ करेगी -मानसून सत्र में लोकपाल विधेयक संसद में जाएगा .ये सारी प्रक्रिया इस बात का प्रतीक है की भारत में बढ़ाते हुवे भ्रस्ट आचरण से जनता अब परेशान हो चुकी है ,अब हर कोई भ्रष्टाचार मिटने की बात कर रहा है सभी निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं .
आमरण अनसन समाप्त होने के बाद विभिन्न राजनितिक दलों ने अपने अपने बेसुरे राग छेड़ दिए हैं कोई कहता है की लोकपाल विधेयक से कुछ नहीं होने वाला है ,कोई ये कहता है की इससे भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा ,किसी ने ये कह दिया की सभी नेता भ्रस्ट नहीं होते सभी की अपनी अपनी ढपली अपना राग किन्तु सच्चाई ये है की चाहे नेता हो या अधिकारी किसी ना किसी रूप में आज प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में हर कोई भ्रष्ट है ,ये आज की जीवन शैली हो गई सहज रूप में स्वीकार्य स्थिति में आज इसे स्थान मिल रहा है इसी लिए एक बड़ी चिंता की बात देश के समक्ष खड़ी हो गई है इसी मर्म को समझ कर देश की प्रबुद्ध जनता जनार्दन ने इस आन्दोलन को अपना समर्थन दिया ,कुछ नेताओं का पेट गड़बड़ा गया उन्होंने ये कहा की “एक वर्ग विशेष” द्वारा दबाव बनाया गया ,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की ये छबी जा रही थी की देश के सभी नेता बेईमान हैं इस लिए दबाव में आकर केंद्र सरकार ने अन्ना जी की बात मान ली ये बात हास्यास्पद तो है ही किन्तु जो लोग कहतें हैं की दबाव में आकर वो भी “एक वर्ग विशेष” के दबाव में आकर,सरकार झुकी कह रहें हैं ,क्या इतना बड़ा स्वस्फूर्त   आन्दोलन जिसमें देश के हर वर्ग ने अपना समर्थन दिया -वो वर्ग विशेष का सहयोग था ? क्या इसे आम व्यक्ति का आन्दोलन नहीं कहा जाएगा ? जहाँ तक सभी नेता भ्रस्ट नहीं होते की बात है तो ये भी सच है की ” सभी नेता नेता नहीं होते  ” कुछ लोग आज भी इस देश में है जो जन सेवा के उद्देश्य को सर्वोपरि मान कर अपने सार्वजनिक जीवन में उदहारण स्थापित कर रहें हैं .
एक समय था जब नेता का लोग अंतरात्मा से सम्मान करते थे ,किन्तु धीरे धीरे अपने कृत्यों से आम मानस के मन में नेता ने ये बात बैठा दी है की सार्वजनिक जीवन में लोग अपना स्वार्थ सिध्ध कर रहें हैं जन सेवा जैसी अब कोई बात नहीं रही है,सभी नेता भ्रस्ट नहीं हैं ये बात सही है ,ये बात भी सही है की सभी नेता- नेता नहीं होते ,इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की सभी सांसद आज वास्तव में जन प्रतिनिधि तो हैं किन्तु किसी भी लोक सभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं का मात्र १५% वोट पाकर भी आज सांसद विधायक बन जाता है ,इसके लिए भी “अनिवार्य वोटिंग ” का नियम बने ,तब कहीं जाकर कुछ सुधर संभव है ,ये सच है की देश में लोकतंत्र अब दुनिया के लिए मिसाल बन गया किन्तु परदे के अन्दर और बाहर वोटो का जो खेल होता है वो कहीं ना कहीं दीमक का काम कर रहा है ,अल्प मतों से जीत के बाद सांसद विधायकों से बनी सरकारें भी अब तो जोड़तोड़ का प्रतिनिधित्व,गढ़बंधन धर्म निभाने की बातें कर सिध्धान्तों की बलि चढ़ा रहीं हैं ,वर्तमान में केवल गुजरात की सरकार ही एक ऐसी सरकार है जिसने ५०% से ज्यादा वोट पाकर सरकार बनाई है ये एक दृष्टिकोण है की सभी नेता भ्रस्ट नहीं होते सभी नेता नेता नहीं होते सभी  सांसद विधायक सही जन प्रतिनिधि नहीं होते ,सभी सरकारें ५०% से जयादा वोट पाने वाली  नहीं होतीं ,इस लिए केवल एक आन्दोलन से घबराना नहीं चाहिए बल्कि सहज रूप से इस बात को मान लेना चाहिए की  देश की ९५% जनता अब भ्रस्टाचार से दुखी हो गई है ,वो अब आश्वासन नहीं समाधान चाहती है ,ये चाहत किसी वर्ग विशेष की नहीं बल्कि देश के हर आम और ख़ास की शसक्त और बुलंद  आवाज़ है,जो किसी भी प्रकार के ढोल नगाडो या शोर गुल तले दबाने या दबने वाली नहीं हैं .
लोकतंत्र इस देश की साख है ,दुनिया में हम सबसे बड़े प्रजातान्त्रिक देश के रूप में जाने जाते हैं ,समय के साथ साथ ६१ वर्षों में संविधान में अनेकों बार संसोधन किये गए ,अब वर्त्तमान परिस्थितियों में दो महत्वपूर्ण संसोधन अपेक्षित है –
(१) अनिवार्य वोटिंग -देश के सभी मतदाताओं को अनिवार्य वोटिंग के लिए नियम बनाए जा सकते हैं ,जैसे वोटिंग कार्ड -वोट देने वाले मतदाता के कार्ड पर अंक देकर उसे प्रेरित किया जा सकता है .जिससे साबित होगा की मतदाता केवल कहने के लिए या पहचान भर के लिए वोटर नहीं है बल्कि इसने वास्तव में मतदान भी किया है .
(२) किसी भी दशा में जीतने वाले प्रत्याशी को ५०% से ज्यादा वोट प्राप्त करने ही होंगें ,अन्यथा फिर से मतदान कराया जाएगा ,जीत के लिए ५०% से ज्यादा वोट प्राप्त क़रने की अनिवार्यता के कारण जनता को अपना सही जन प्रतिनिधि भी मिलेगा और साथ ही साथ चुनाव और नेता को लेकर उठाये जाने वाले अनेक संदेह भी बंद हो जायेंगें ,हो सकता है की प्रारंभ में हमें थोडा कठिन परिश्रम करना पड़े किन्तु वास्तव में ये जब होने लग जाएगा तो एक परिपक्व प्रजातंत्र हमारी पहचान अलग ढंग से बनाएगा .
इस प्रकार से जब जनप्रतिनिधि चुने जायेंगें तो लोकपाल विधेयक के साथ ही साथ हम उम्मीद कर संकेगें की जनता -नेता -प्रशासन-शासन सब कुछ ठीक हो सकेगा ,या उम्मीद की कुछ किरणे ज़रूर प्रज्वलित होंगीं

9 Responses to “सभी नेता भ्रष्ट नहीं होते -एक लोकतान्त्रिक दृष्टिकोण”

  1. Vivek Pal

    हेल्लो आप सब लोगो के ये कमेन्ट मुझे बहुत आचे लगे मैं आप सबका बहुत बहुत आभारी हु धन्यवाद

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  2. विजय सोनी

    विजय सोनी

    प्रिय प्रमोद जी ,इंद्र जी ,सुनील जी, शैलेन्द्र जी सहित सभी की बहुमूल्य राय के लिए आभार ,अनिवार्य वोटिंग के साथ नो वोटिंग का अधिकार भी निश्चित रूप से होना ही चाहिए ,अपने नेता को मतदाता चाहे तो वापस भी बुला सके ये सुझाव भी प्रमोद जी ने बहुत व्यावहारिक और कारगर बताया है ,देश में अब प्रजातंत्र के मूल स्वरुप को समझने और संविधान की मूल भावना को व्यावहारिक रूप में सत्य साबित करने के लिए सुधार आवश्यक है .

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  3. PRAMOD AGARWAL

    जिन दिनों आसम में उल्फा और आसू नामक संगठन चरम पर थे और उनके आव्हान पर असम में जब विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया गया था तब सिर्फ कांग्रेस ने चुनाव लड़ा और मात्र ३% मत प्राप्त कर अनवरा तैमुर के नेत्रित्व में सरकार का गठन हुवा और उसे संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुवि १९८४ में राजीव गाँधी के नेत्रित्व में फिर चुनाव लड़ा देश की वो एकमात्र ऐसी सरकार बनी जिसे ५०% से ज्यादा का बहुमत हासिल हुवा असम की उस सरकार और केंद्र की वो सरकार अगला चुनाव नहीं जीत सकी यह तुलना इसलिए की सम्यक रूप से होने वाले निर्वाचन में चुनी जाने वाली मुंडी का महत्त्व है मतदाता का नहीं ,शिक्षा विहीन हमारा देश ना अनिवार्य मतदान की स्थिति में है ना ही उसे किसी राजनितिक दल पर इतना विश्वास रह गया है की वह उसके पक्ष में ५०% से ज्यादा मतदान करे ,jaruri यह है की jaise उसके paas janpratinidhi chunane का adhikaar है vaise hee उसे janpratinidhi ko vaapas bulane का adhikar bhee mile sath hee yadi mujhe ummedwar ना pasand ho to no voting का bhee adhikar उसे diya jaye to ho sakata है की वो is adhikar का upayog karne avashy aayen तब मतदान 100 pratishat ho jaaye aapake dono sawalon का hal bhee isase nikal sakata है .

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  4. Indrapa Singh

    देश के संविधान में उपरोक्त दोनों संशोधन होने के बाद हकीक़त में सही चुनाव संपन्न होंगें ,सही जन प्रतिनिधि मिलेंगें ,जनता वास्तव में अब भ्रस्टाचार से मुक्ति चाहती है ,अन्ना जी के आन्दोलन ने देश में आम आदमी को प्रेरित किया है ,अनिवार्य वोटिंग -जीत के लिए अनिवार्य ५१% की शर्त जनता और नेता सहित लोकतंत्र के लिए भी आवश्यक है .

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  5. sunil patel

    श्री सोनी जी बिलकुल सही कह रहे है. अब जनता भ्रष्टाचार से उकता चुकी है और हर हाल में परिवर्तन चाहती है. अगर इस लोकपाल बिल से भी बात नहीं बनी तो १८५७ से बड़ी क्रांति करनी होगी जो की देश के भ्रष्टाचारियो की खिलाफ होगी.

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  6. NARENDR KHARIYA

    देश की जनता अब इन नेताओं के बहकावे में नहीं आने वाली हैं ,अब जो कदम भ्रष्टाचार के विरोध में उठाएगा वो भी ठोस कारगर,कदम जनता उसके साथ कदम ताल मिला कर चलेगी ,अन्ना जी बाबा रामदेवजी जो मुहीम चला रहें हैं वो देश की आम जनता की मुहीम है ,नेताओं के मुख से निकले हर शब्द को जनता अब मात्र आश्वासन मानती है वो भी ऐसा आश्वासन जो हकीक़त से कोसों दूर होता है .

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  7. Shailendra Saxena"Adhyatm"

    Bhrastrachar mitane ko Anna aaye Gandhi Bankar.
    bhrastra log dar gaye unnse ,khade na ho paye tankar
    yuva dosto aage aayo milkar alakh jagana
    Anna ko thakne na dena ,Bhrastrachar mitana.
    Shailendra saxena “Aadhyatm ”
    Director- Ascent English Speaking Coaching.
    Ganj Basoda.M.P. 9827249964.

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  8. Shailendra Saxena"Adhyatm"

    अन्ना जी का नाम उन महान लोगों मैं गिना जाना तय हो चुका है
    जिन्होंने देश के बारे मैं कुछ अच्छा विचार किया
    मिर्ची तो उन लोगों को ज्यादा लग रही हैं जो कि
    भ्रष्ट हैं तथा जिनको भविष्य मैं जेल की कोठरी और छिनने
    वाली सत्ता का भय सता रहा है .
    चन्द्र शेखर (पूर्व प्रधानमंत्री ) जी तो इसे जीवन का अभिन्न
    अंग मानते थे .
    कुछ भी कहो देशवासी इससे मुक्त होना चाहते हैं और लगभग सारे नेता इसलिए
    परेशान हैं कि कहीं जनता सही मैं जाग गई तो ….?
    शैलेन्द्र सक्सेना “आध्यात्म”
    संचालक – असेंट इंग्लिश स्पीकिंग कोचिंग
    गंज बासोदा म.प. ०९८२७२४९९६४.

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  9. VIKAS

    आपने एकदम ठीक लिखा की चुनाव प्रक्रिया में सुधार होगा तभी देश को सही प्रतिनिधि मिलेंगें ,सही लोगों के हाथ में कमान होगी -सही प्रक्रिया होगी इसके लिए अनिवार्य वोटिंग और जीतनें के लिए ५० प्रतिशत से ज्यादा वोट की शर्त एकदम सही है

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