दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम

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दाने दाने पर नाम लिखा है जिसने जिसको खाया है।
हर दाने पर मोहर लगी है जिसने जिसको उगाया है।।

खाने वाले करोड़ों मिलेगे देने वाला बस एक ही राम।
मिलेगा उसको उतना ही जिसका लिखा उसका नाम।।

मिलेगे उसको उतने दाने जितना उसका है नसीब।
चाहे जितना अमीर हो चाहे जितना हो वह गरीब।।

हर दाना है कीमती उसको कभी न तुम बर्बाद करो।
जितना जिसको मिल जाए उस पर तुम सबर करो।।

दाना चुगता पक्षी भी ,दाना ही खाता हर इंसान भी।
जैसा बोओगे वैसा काटोगे कहते हैं गीता कुरान भी।।

करता हूं प्रभु से प्रार्थना,सब को भोजन दीजिए।
भूखा कोई न सोए जगत में,ऐसी कृपा कीजिए।।

आर के रस्तोगी

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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