वीरेन्द्र सिंह परिहार
बीते गत दिनों देश में छात्रों पर दो जगहों पर लाठी चार्ज हुआ। एक तो दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में और दूसरे झारखण्ड की राजधानी राँची में। यह बात और है कि लाठी चार्ज को लेकर दोनो ही जगह परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग-अलग थी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जहाँ पत्थर चले, पुलिस पर लिचिंग की कोशिशें की गई, जिसमें 200 पुलिस वाले घायल हो गये। पत्रकारों पर हमले का प्रयास किया गया। हत्या बलात्कार और जघन्य अपराधों के 500 से ज्यादा आरोपी जहाँ छात्रों के बीच घुस गये और कानून-व्यवस्था को लेकर नंगा नाच किया। यहाँ तक कि आम आदमी पार्टी शासित पंजाब पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों में आतंकवादियों की भी इन्ट्री हो गई थी। प्रधानमंत्री मोदी को तो फूहड़ और अश्लील गालियाँ तो दी ही गई, उनकी दिवंगत माँ को भी नहीं छोड़ा गया जिनका राजनीति से कोई रिश्ता नहीं था। सनातन का अपमान और मोदी विरोध के चलते तो राष्ट्र विरोधी नारे ऐसे मामलो में तो इनका विशेषाधिकार होता है।
राँची में छात्रो ने शान्तिपूर्ण अहिंसक जुलूस निकाला। न किसी को गालियाँ दी, न राष्ट्र विरोधी नारे लगाये। यहाँ तक झारखण्ड के सत्ताधारियों को लेकर भी ऐसा कुछ नहीं कहा जिसे अमर्यादित कहा जाये। फिर भी उनको रोकने के लिये बैरिकेड्स पर नुकीले औजार लगाये गये, उन पर निर्ममता से लाठियाँ बरसाई गई, वह भी एक बार नहीं बल्कि तीन-तीन बार। दिन के उजारे में भी रात के अधेरे में भी। विधानसभा के पास धरने में बैठे छात्रों पर भी लाठियाँ बरसाई गई। यहाँ तक कि 500 से ज्यादा छात्रों के विरूद्ध एफआईआर भी दर्ज करने की खबरे हैं। अब घटनाक्रम पर गौर करने की जरूरत है। नीट पेपर मामले में मोदी सरकार ने गम्भीरता से संज्ञान लिया। तत्काल परीक्षा निरस्त कर दी गई। आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारियाँ हुई। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा भी दे दिया। पेपर लीक मामलो में कठोर कानून बनाये गये, जिसमें ऐसे आरोपियों के विरूद्ध कठोर सजाओं का प्रावधान किया गया लेकिन दिल्ली में छात्रों पर लाठी चार्ज को लेकर राहुल गाँधी कहते रहे कि बताया जाये कि लाठी चार्ज का आदेश किसने दिया ? फिर कहने लगे कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया ? विपक्ष कहने लगा लाठी और गोली देश के गृहमंत्री अमित शाह के कहने पर चलाई गई। जबकि गोली कही चली ही नहीं, फिर कहा गया कि गृह मंत्री घटना को लेकर संसद में बयान दें पर अब कहते हैं कि गृहमंत्री बताये कि लाठी चार्ज किसके आदेश से हुआ ? गृह मंत्री कहते रह गये कि वह विपक्ष के प्रत्येक सवाल का जवाब देने को संसद में तैयार हैं, राहुल गाँधी कह रहे कि हमें अमित शाह का भाषण सुनने में कोई रूचि नहीं है। गौर करने की बाते यह कि जंतर-मंतर पर लाठी चली तो राहुल गाँधी प्रधानमंत्री आवास जैसी संवेदनशील जगह के पास धरने पर बैठ जाते हैं। विपक्ष को सीधे भारत सरकार के गृहमंत्री का इस्तीफा चाहिए। संसद नहीं चलने दी गई। पर जब विपक्ष शासित राज्य झारखण्ड की राजधानी राँची में लाठी चार्ज होता है तो कहा जाता है कि वहाँ तो छात्रों की 98 प्रतिशत माँगे मान ली गई। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर 2 प्रतिशत माँगो का क्या ? क्या इसका जवाब लाठी है ? छात्रों की मुख्य मांग पेपर लीक की जाँच सी.बी.आई. से कराने की बात तो मानी ही नहीं गई। पता नहीं सी.बी.आई. जाँच कराने में झारखण्ड सरकार को क्या समस्या है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि यदि सी.बी.आई. जाँच हो गई तो इसकी आँच सत्ताधारियों तक पहुँच सकती है। राहुल गाँधी कहते हैं कि राँची में छात्रों पर लाठी चार्ज गलत है। उसकी निंदा भी करने की बाते करते हैं। पर दिल्ली के लाठी चार्ज को लेकर जो बहुत ही विषम परिस्थितियों में हुआ उसमें सीधे गृहमंत्री का इस्तीफा चाहिए। उसमें भी वगैर किसी जाँच के, किसी सफाई के। यानी वकील भी वहीं, अदालत ही वही। दूसरी तरफ वह यह कुछ कह कर कि हेमंत सोरेन संयमपूर्ण रवैया अपनाया, उन्हें बधाई भी देते हैं। प्रियंका बाड्रा का कहना है कि राहुल गाँधी राँची जाकर छात्रों से मिल आये हैं। यानी कुछ भी साय-पटाय। दूसरी तरफ राँची के मामले में काकरोच पार्टी भी मात्र जबानी जमा खर्च करती रही।
कुल मिलाकर उपरोक्त मामलों में राहुल गाँधी, उनकी कांग्रेस पार्टी का सम्पूर्ण विपक्ष का रवैया पूरी तरह दोहरा ही नहीं, पूरी तरह बेशर्मी से भी भरा है। इन्हें अब भी लगता है कि जनता तो कुछ समझती नहीं, इसलिये जो यह और अन्ध मोदी विरोधी चिल्लाएंगे, वही सच होगा। पर यह पब्लिक है “सब देख रही, सब जान रही।”
वीरेन्द्र सिंह परिहार