विश्ववार्ता

तीसरे विश्व युद्ध की आहट

डॉ. नीरज भारद्वाज

इतिहास हमें बहुत कुछ बताता और समझाता है। इतिहास को सही से पढ़ा और समझा जाए तो किसी भी व्यक्ति और देश को उससे सीख लेकर गलती को दोहराना नहीं चाहिए। यदि कोई दोहराता है तो उसे सीधे शब्दों में अज्ञानी और मूर्ख कहा जा सकता है। दो विश्व युद्धों के इतिहास को पढ़ा जाए जिससे हमें वर्तमान में हो रहे इस भयानक विश्व युद्ध के सभी पक्ष वैसे ही दिखाई दे जाते हैं जो पहले दो विश्व युद्धों के हैं। 28 जून,1914 को साराजेवो में ऑस्ट्रिया-हंगरी सिंहासन के उत्तराधिकारी आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड और उनकी पत्नी सोफी की हत्या हुई। यही हत्या प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक सबसे बड़ा कारण बनी। इस हत्या को बोस्नियाई सर्ब राष्ट्रवादी गैवरिलो प्रिंसिप ने अंजाम दिया था। गैवरिलो प्रिंसिप ‘यंग बोस्निया’ नामक समूह से जुड़ा राष्ट्रवादी माना जाता है। आर्कड्यूक की हत्या के बाद ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया पर युद्ध की घोषणा कर दी और देखते ही देखते यह वैश्विक संघर्ष में बदल गया। 1914 से 1918 के बीच चले इस विनाशकारी युद्ध में विश्व के लगभग सभी देश प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ गए।

वर्तमान युद्ध की स्थिति पर नजर दौड़ाकर देखें तो हमें पता चलता है कि 28 फरवरी, 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उसके पूरे परिवार की हत्या तेहरान के नजदीक इजरायल-अमेरिका द्वारा किए गए मिसाइल हमलों से कर दी गई। विचार करें तो यह हमले उच्च पदस्थ ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाकर किए गए थे। ईरानी सरकार ने 1मार्च, 2026 को खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि कर दी. इससे पूरे ईरान में इजरायल-अमेरिका के प्रति बदले की भावना भड़क उठी। हालांकि युद्ध के बादल पहले से ही बने हुए थे लेकिन इस घटना से ईरान को गहरा आघात लगा।

अब चलते हैं दूसरे विश्व युद्ध की ओर. सन 1929 में विश्व में महामंदी का दौर आया। यह महामंदी का दौर 1929 से 1939 अर्थात दस वर्षों तक चला। इस महामंदी के मुख्य कारणों में अक्टूबर 1929 का अमेरिकी शेयर बाजार (वॉल स्ट्रीट) का पतन, बैंकों की व्यापक विफलता, अत्यधिक उत्पादनऔर कम उपभोग (क्रय शक्ति में कमी) की कमी माने जाते हैं। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में गिरावट, गलत सरकारी नीतियां तथा कृषि क्षेत्र में संकट ने इस वैश्विक आर्थिक तबाही को बदतर बना दिया। इसी समय अमेरिका ने विदेशी सामानों पर भारी टैक्स लगा दिया (स्मूट-हॉली टैरिफ) जिसके जवाब में अन्य देशों ने भी ऐसा ही किया। इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार लगभग ठप हो गया।

अब वर्तमान में चल रहे वैश्विक युद्ध की स्थिति को समझें तो हमें पता चलता है कि 2019 के अंत में कोविड विश्व में फैला। इसने पूरे विश्व को लॉकडाउन की ओर धकेल दिया। 2020 और 2021 दोनों ही वर्ष लगभग लॉकडाउन में ही चले गए। चारों ओर भय का वातावरण बना। इससे विश्व की आर्थिक स्थिति चरमरा गई। कोविड से बाहर निकले ही थे कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध हो गया। इस युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन का साथ देने के लिए अमेरिका और यूरोप के देश शामिल हो गए। देखते ही देखते अमेरिका में सत्ता परिवर्तन हुआ और ट्रंप सरकार ने आते ही दुनिया को टैरिफ के उलटे-सीधे दबाव में धकेल दिया। अमेरिका ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दूसरे विश्वयुद्ध से पहले आर्थिक मंदी दस वर्ष चली जबकि कोविड के पाँच वर्ष बाद ही अमेरिका ने टैरिफ का दाव चला अर्थात अमेरिका महामंदी के दौर से गुजर रहा था। उसका परिणाम यह हुआ है कि आज विश्व के देश तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर खड़े हुए हैं।

वर्तमान में इजरायल-अमेरिका मिलकर ईरान पर हमला कर रहे हैं। ईरान अपने पड़ोसी देशों में बने अमेरिका के एयरबेस और सैनिक ठिकानों को निशाना बना रहा है। सही मायने में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों को भी इस युद्ध की चपेट में ले लिया है। इधर अफगानिस्तान पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा है। पाकिस्तान बलूचिस्तान के लड़ाकों के बीच में युद्ध लगातार जारी है। रूस और यूक्रेन के युद्ध को चलते हुए लगभग 4 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। यूक्रेन की सहायता में पूरा यूरोप और अमेरिका खड़ा हुआ है। ठीक ऐसे ही ईरान पर हो रहे हमलों में इजरायल और अमेरिका के साथ भी यूरोप के देश खड़े हैं।

विचारणीय बात यह है कि एक बार फिर पूरा विश्व युद्ध की विभीषिका में जल रहा है। अमेरिका और पूरे यूरोपीय देशों ने फिर मानवता का संहार करने की सोच ली है। इतिहास की बात शुरू में इसलिए हुई है क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध को अभी 100 वर्ष भी नहीं हुए हैं। एक बार फिर तीसरे विश्व युद्ध में विश्व पूरी तरह जुट गया है। कितने ही लोगों का मर जाना निश्चित हो गया है। इस युद्ध की चपेट में कितने लोग मारे जाएंगे, देशों के बीच आर्थिक कमजोरी आना स्वाभाविक है। चारों ओर विनाश के बादल छाए हुए हैं। सभी देश अपने को हाई अलर्ट मोड पर किए हुए हैं। कोई देश किसी के सामने झुकने को तैयार नहीं, अस्थिरता के वातावरण में चारों ओर तबाही सी मची हुई है।

( अदिति फीचर्स )

डॉ. नीरज भारद्वाज