भगवान महावीर स्वामी जयंती 31 मार्च
प्रदीप कुमार वर्मा
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की विभीषिका, यूएस- इसराइल और ईरान के बीच मिसाइल की मारामारी, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान के बीच वर्चस्व की लड़ाई और दुनिया पर मंडराता तृतीय विश्व युद्द का साया, समूचे विश्व में इन दिनों हिंसा और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर युद्ध के हालात बने हुए हैं। बीते कई दशकों से वर्चस्व की होड़,सुपर पावर बनने की सनक तथा तेल एवं मिनरल जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जे की चाहत ने समूचे विश्व को युद्ध की आग में धकेल दिया है। हालात ऐसे हैं कि विश्व स्तर पर आपसी भाईचारे और शांति के लिए बने अंतरराष्ट्रीय संगठन भी इन दिनों मूक और बेबस नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि आज एक बार फिर से विश्व शांति के पक्षधर लोग एवं संस्थाएं प्राचीन भारतीय मूल्यों की आवश्यकता तथा उपयोगिता पर विमर्श करती दिखाई पड़ रही है। ऐसे हालात में शांति एवं अहिंसा के पक्षधर के रूप में आज भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांत प्रासंगिक एवं आवश्यक नजर आ रहे हैं।
भगवान महावीर का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को 27 मार्च 598 ईस्वी पूर्व अर्थात 2618 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के कुंडलपुर के क्षत्रिय राजा सिद्धार्थ के यहां हुआ। भगवान महावीर ने सिद्धार्थ-त्रिशला की तीसरी संतान के रूप में चैत्र शुक्ल की तेरस को जन्म लिया। भगवान महावीर की उम्र जब मात्र 28 वर्ष थी, तब उनके माता-पिता का देहान्त हो गया। बड़े भाई नंदिवर्धन के अनुरोध पर वे दो बरस तक घर पर रहे। बाद में तीस बरस की उम्र में वर्धमान ने श्रमण परंपरा में श्रामणी दीक्षा ले ली। महावीर अधिकांश समय ध्यान में ही मग्न रहते। इस प्रकार से तीस वर्ष का कुमार काल व्यतीत हो जाने के बाद एक दिन स्वयं ही भगवान् को जाति स्मरण हो जाने से वैराग्य हो गया। तीसरे विश्व युद्द की चौखट पर खड़ी दुनिया को आज के दौर में भगवान महावीर स्वामी की तरह ही भोग और संसाधनों से वैराग्य और अहिंसा की आवश्यकता दिखाई पड़ती है।
भगवान महावीर ने अहिंसा की सूक्ष्म व्याख्या करते हुए मानव को मानव के प्रति ही प्रेम और मित्रता से रहने का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने मिट्टी, पानी, अग्नि, वायु और वनस्पति से लेकर पशु-पक्षी के प्रति भी मित्रता और अहिंसक विचार के साथ रहने का उपदेश दिया है। यहां यह भी बताना उचित होगा कि उनकी इस अहिंसा की शिक्षा में पर्यावरण के साथ बने रहने की सीख भी है। यह भी सर्व विदित है कि भगवान महावीर स्वामी के विचार एवं शिक्षाएं किसी एक वर्ग, जाति या सम्प्रदाय के लिए नहीं, बल्कि प्राणीमात्र के लिए है। भगवान महावीर स्वामी का यह मत भी था कि मनुष्य अपने भाग्य का स्वामी स्वयं है और प्रत्येक आत्मा में इतनी क्षमता है कि वह परमसिद्धि तक उठकर चरमावस्था को प्राप्त कर सके। इसे प्राप्त करने पर वह पुर्नजन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है। भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों में प्रमुख पंच महाव्रतों का खास महत्व है। भगवान महावीर ने कैवल्य ज्ञान हेतु धर्म के मूल पांच व्रत बताए- अहिंसा, अचौर्य, अमैथुन और अपरिग्रह।
उक्त पंचमहाव्रतों का पालन मुनियों के लिए पूर्ण रूप से और गृहस्थों के लिए स्थूलरूप अर्थात अणुव्रत रूप से बताया गया है। उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत सी सामाजिक कुरीतियों की समाप्ति और समाज सुधार के लिए सम्यकदर्शन, सम्यकज्ञान और सम्यक् आचरण के सिद्धांतों का प्रयोग भी किया। त्याग एवं करुणा के प्रतीक भगवान महावीर स्वामी ने स्त्री-दासता, देश एवं समाज में महिलओं के समान अधिकार और सामाजिक समता जैसे विषयों पर सामाजिक प्रगति की शुरुआत की। भगवान महावीर ने समतामूलक समाज का उपदेश देते हुए कहा कि जहां राग, द्वेष होता है, वहां विषमता पनपती है। इस दृष्टि से सभी समस्याओं की जड़ है राग और द्वेष। व्यक्ति अपने स्वार्थों का पोषण करने , अहं को प्रदर्शित करने, दूसरों को नीचा दिखाने, सत्ता और विमषता के गलियारे में भटकता रहता है। भगवान महावीर की शिक्षाएं आर्थिक असमानता को कम करने की आवश्यकता के अनुरूप हैं।
भगवान महावीर की शिक्षाओं के माध्यम से ही युद्ध और आतंकवाद जैसी वर्तमान की समस्याओं के समाधान पाए जा सकते हैं। भगवान महावीर ने ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का शंखनाद कर ‘आत्मवत् सर्व भूतेषु’ की भावना को देश और दुनिया में जाग्रत किया। भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाएँ विश्वशॉंति की पक्षधर हैं। यही वजह है कि ‘जियो और जीने दो’ अर्थात् सह-अस्तित्व, अहिंसा एवं अनेकांत का नारा देने वाले महावीर स्वामी के सिद्धांत विश्व की अशांति दूर कर शांति कायम करने में समर्थ है। आज विश्व के देश कई गुटों में बंटे हुए हैं लेकिन सिर्फ भारत देश ही है जो निर्गुट आंदोलन का समर्थक है और आपसी भाईचारे और अस्तित्व की भावनाओं का अनुसरण करता है। यही वजह है कि आज विश्व के लगभग सभी देश “विश्व शांति” के लिए भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। विश्व बिरादरी का आज यह भी मानना है कि भगवान महावीर के उपदेश आज भी अत्यंत समीचीन और प्रासंगिक हैं और भारत ही वह देश है जो रूस और यूक्रेन तथा यूएस-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध को खत्म करा सकता है।
प्रदीप कुमार वर्मा