फिर गांव को शहर में बदलने की सोचना….

         hindu-muslimइक़बाल हिंदुस्तानी

नफ़रत से दूसरों को ना नीचे दिखाइये,

गर हो सके तो खुद को ही ऊंचा उठाइये।

औरों को चोट देने में घायल ना आप हों,

पागल के हाथ में ना यूं पत्थर थमाइये।

 

फिर गांव को शहर में बदलने की सोचना,

पहले शहर को प्यार से जीना सिखाइये ।

 

इंसानियत को पायेंगे हर शै से आप अज़ीम,

आंखांे से पहले तंगनज़र चश्मा हटाइये।

   काश समझ लेते हम धर्मों के असली के सार को…..

कब तक रोक सकेगा कोई आती हुई बहार को,

आखि़र गिरना ही होगा नफ़रत की दीवार को।

 

इतना खून बहाकर मंदिर मस्जिद का करना क्या,

काश समझ लेते हम सब धर्मों के असली सार को।

 

उनके हाथ भी जल जायेंगे हम तुमको दिखलादेंगे,

जो निकले हैं आग लगाने इस सारे संसार को।

सोने की थाली में तो हम भी खाना खा सकते हैं,

लेकिन कैसे बेचके आयें हम अपने किरदार को।।

नोट-अज़ीम-महान, तंगनज़र-संकीर्ण,सार-संदेश, किरदार-चरित्र।।

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इक़बाल हिंदुस्तानी
लेखक 13 वर्षों से हिंदी पाक्षिक पब्लिक ऑब्ज़र्वर का संपादन और प्रकाशन कर रहे हैं। दैनिक बिजनौर टाइम्स ग्रुप में तीन साल संपादन कर चुके हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में अब तक 1000 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। आकाशवाणी नजीबाबाद पर एक दशक से अधिक अस्थायी कम्पेयर और एनाउंसर रह चुके हैं। रेडियो जर्मनी की हिंदी सेवा में इराक युद्ध पर भारत के युवा पत्रकार के रूप में 15 मिनट के विशेष कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं। प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ लेखक के रूप में जानेमाने हिंदी साहित्यकार जैनेन्द्र कुमार जी द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। हिंदी ग़ज़लकार के रूप में दुष्यंत त्यागी एवार्ड से सम्मानित किये जा चुके हैं। स्थानीय नगरपालिका और विधानसभा चुनाव में 1991 से मतगणना पूर्व चुनावी सर्वे और संभावित परिणाम सटीक साबित होते रहे हैं। साम्प्रदायिक सद्भाव और एकता के लिये होली मिलन और ईद मिलन का 1992 से संयोजन और सफल संचालन कर रहे हैं। मोबाइल न. 09412117990

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