विश्ववार्ता

अपने लाभ के लिए भारत की छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं ट्रंप  

 
ज्ञान चंद पाटनी

  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमले की घटना के कारण भारत के बारे में की गई टिप्पणी मीडिया की सुर्खियों से गायब जरूर हो गई, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत की छवि पर एक और आघात करके राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी अविश्वसनीयता का ही परिचय दिया है। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साझा एक पोस्ट में भारत को ‘नरक जैसी जगह’ (हेलहोल) बताया गया। यह टिप्पणी दक्षिणपंथी रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के पॉडकास्ट से ली गई थी जिसमें उन्होंने अमेरिका में जन्म-आधारित नागरिकता (बर्थराइट सिटीजनशिप) के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए भारत और चीन जैसे देशों को निशाना बनाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे बिना किसी टिप्पणी के शेयर कर दिया, जो अमेरिका की घरेलू राजनीति के संदर्भ में उनके एजेंडे को आगे बढ़ाती है। हालात की नजाकत को देखते हुए भारत ने आक्रामक पलटवार से परहेज किया। हां, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जरूर कहा कि, “ये टिप्पणियां अज्ञानता से भरी, अनुचित और निम्नस्तरीय हैं। ये भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करतीं।”  दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की बातचीत चल रही है। मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत अमेरिका से टकराव नहीं चाहता लेकिन अमरीका को भारत के सब्र की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।


  सैवेज के ‘सैवेज नेशन’ एपिसोड में कहा गया कि अमेरिका में जन्मा कोई बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है जिसका फायदा उठाकर ‘चीन, भारत या दुनिया की किसी दूसरी नरक जैसी जगह’ से प्रवासी परिवार आ जाते हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि आधुनिक प्रवासी अमेरिका के प्रति वफादार नहीं हैं और भाषा-संस्कृति को बदल रहे हैं। सैवेज ने भारतीय और चीनी प्रवासियों को ‘लैपटॉप वाले गैंगस्टर’ तक कह डाला, जो टेक्नोलॉजी सेक्टर में अमेरिकी नागरिकों के अवसर छीन रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह पोस्ट जन्मसिद्ध नागरिकता पर संवैधानिक संशोधन की अपनी मुहिम के बीच शेयर की, जो अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि यह नीति ‘बर्थ टूरिज्म’ को बढ़ावा दे रही है, हालांकि कनाडा और मेक्सिको जैसे कई देशों में ऐसी ही व्यवस्था है।  


  ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप का लक्ष्य भारत कम, अमेरिका वोटर ज्यादा थे। बर्थराइट सिटिजनशिप खत्म करने से दक्षिणपंथी आधार मजबूत होगा। रेडियो होस्ट सैवेज जैसे सहयोगी नस्लवादी टोन सेट कर रहे हैं। मिडटर्म चुनावों में प्रवासी मुद्दा बड़ा है। रेटिंग गिरने पर सुर्खियां बटोरना राष्ट्रपति ट्रंप की पुरानी चाल नजर आती है। भड़काऊ बयानों से अपने आधार को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। चीन का नाम भी लिया गया, लेकिन भारत पर फोकस ने यहां राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया। भारत जैसे सहयोगी देशों को निशाना बनाकर राष्ट्रवाद जगाना उनका हथकंडा लगता है, लेकिन यह दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप के रवैये से ऐसा लगता है जैसे उनको भारत की परवाह नहीं है।

  
राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने इसे ‘अत्यंत अपमानजनक’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से बात करने की मांग की। कांग्रेस की प्रमुख नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “ट्रंप ने भारत को नरक कहा, लेकिन सरकार चुप है।” भाजपा के राम माधव ने हडसन इंस्टीट्यूट में प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए अपमानजनक शब्दों पर चिंता जताई। अमेरिका में 55 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो एशियाई समुदाय का बड़ा हिस्सा हैं। ये प्रतिक्रियाएं घरेलू राजनीति को भी प्रभावित कर रही हैं। इस बीच अमेरिकी दूतावास ने सफाई दी कि ट्रंप ने भारत को ‘महान देश’ कहा है, जहां उनका ‘अच्छा दोस्त’ शीर्ष पर है—यह पीएम मोदी की ओर इशारा था। इस तरह की सफाई से भारत के जनमानस में अमेरिका के प्रति पैदा हो रहा अविश्वास कम नहीं होने वाला।


  भारत-अमेरिकी रिश्तों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव हो रहा है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में ‘हाउडी मोदी’ (2019) जैसे आयोजन हुए, जहां पीएम मोदी ने ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ का नारा तक दिया।  पहले कार्यकाल में जुलाई 2019 में ट्रंप ने कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश की, जिसे भारत ने सिरे से खारिज किया। पिछले साल पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक संघर्ष रोकने का श्रेय खुद लेने की कोशिश की। जुलाई 2025 में भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया, भारत को ईरान और रूस से तेल खरीदने से रोका।


   दोनों देशों के रिश्ते रक्षा, व्यापार और क्वाड जैसे मंचों पर मजबूत हैं। इसके बावजूद ट्रंप का अस्थिर रवैया चुनौतीवूर्ण है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में संबंध गहरे हुए, लेकिन दूसरे कार्यकाल में ट्रंप भारत को अपमानित करने का कोई न कोई बहाना तलाशते रहते हैं। साथ ही भारत के विरोधी पाकिस्तान के साथ खड़े नजर आते हैं। वे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश को हीरो बनाने में लगे हुए हैं। ऐसा लगता है कि वे पाकिस्तान को हथियार बनाकर भारत पर दबाव  भी बनाने लगे हैं। इसलिए भारत को सतर्क रहना होगा। भारत को रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी होगी। अमरीका अस्थिर साझेदार बन गया है, इसलिए हर स्थिति के लिए तैयारी जरूरी। 


     भारत की  नपी-तुली  प्रतिक्रिया  का कारण यह है कि वह आग में घी नहीं डालना चाहता। भारत चाहता है कि मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्रता से अंतिम रूप दे दिया जाए। रक्षा सौदे, तकनीक हस्तांतरण जारी रहे और प्रवासियों में भय या निराशा जैसे भाव न पनपें। इसके बावजूद भारत को सभी मंचों पर मजबूती दिखानी होगी। 
राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियां अपमानजनक हैं। अमरीका को समझना होगा कि आपसी संबंधों की नींव सम्मान और साझा हित हैं। राष्ट्रपति  ट्रंप की बयानबाजी को महज चुनावी स्टंट मानकर भी खारिज नहीं किया जा सकता। भारत को चौकस तो रहना ही होगा। सरकार को रक्षा सहित सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता पर जोर देना होगा, ताकि कोई भी देश भारत का अपमान करने का साहस नहीं कर सके।



ज्ञान चंद पाटनी