विश्व क्षय रोग दिवस- 24 मार्च
डा• रूप कुमार बनर्जी
वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक
हर वर्ष 24 मार्च को पूरा विश्व Tuberculosis (टीबी) के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एकजुट होता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि टीबी आज भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन सही जानकारी, सावधानी और उपचार से इसे पूरी तरह हराया जा सकता है।
टीबी एक संक्रामक रोग है, जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह रोग Mycobacterium tuberculosis नामक जीवाणु से होता है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने से फैलता है।
इसके पहचान के संकेत निम्नलिखित हैं:-
लगातार 2 सप्ताह से अधिक खांसी ,बलगम में खून ,शाम को बुखार, रात में पसीना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना ,वजन घटना व भूख कम होना आदि। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराना आवश्यक है।
बचाव के लिए खुद को क्या करना चाहिए :-
खांसते-छींकते समय मुंह ढकें , भीड़भाड़ व बंद स्थानों से बचें , घर में साफ हवा और धूप का प्रवेश रखें ,टीबी मरीज से उचित दूरी व सावधानी रखें ,फेस मास्क का प्रयोग करें,बार-बार साबुन पानी से हाथ को धोते रहे
संतुलित आहार – मजबूत रक्षा कवच :-
दाल, दूध, अंडा, पनीर (प्रोटीन), टोफू , बिल्कुल हल्का मसाले का चिकन अथवा मछली यदि मांसाहारी है तो , हरी सब्जियां और मौसमी फल ,सूखे मेवे – बादाम, अखरोट ,हल्दी वाला दूध । तम्बाकू, शराब, जंक फूड, फास्ट फूड आदि से दूरी बनाए रखना ही उचित है।
कैसे बढ़ाएं प्रतिरोधक क्षमता :-
नियमित योग व प्राणायाम , 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद ,तनाव से दूरी ,सप्ताह में काम से कम 5 दिन हल्की एक्सरसाइज , थोड़ी देर के लिए सूर्य की रोशनी (Vitamin D)। यदि टीबी का समय पर इलाज न हो, तो यह कई अन्य रोगों को जन्म दे सकती है: Pneumonia ,Bronchitis ,Malnutrition,Diabetes Mellitus, HIV/AIDS आदि। इसलिए टीबी को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
टीबी की चिकित्सा में होम्योपैथी की महत्वपूर्ण भूमिका :-
आज के समय में टीबी केवल एक संक्रमण नहीं, बल्कि कमजोर होती प्रतिरोधक क्षमता का संकेत भी है।यदि हम रोगी के सम्पूर्ण स्वास्थ्य (Body + Mind) को देखें, तो यहां होम्योपैथी एक विशेष और प्रभावी चिकित्सा के रूप में उभरती है।होम्योपैथी केवल बीमारी नहीं, बल्कि व्यक्ति का इलाज करती है। इसका मुख्य उद्देश्य है,शरीर की आंतरिक रोग-प्रतिरोधक शक्ति को जागृत करना,रोग के मूल कारण को संतुलित करना,दवाओं के दुष्प्रभाव को कम करना और रोगी के मानसिक और शारीरिक संतुलन को सुधारना। यही कारण है कि टीबी जैसे दीर्घकालिक रोगों में होम्योपैथी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
जीवनशैली में सुधार :-
स्वस्थ जीवनशैली ही टीबी से बचाव का मूल मंत्र है :- स्वच्छता , संतुलित आहार ,नियमित दिनचर्या , सकारात्मक सोच। टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से उपचार योग्य रोग है।
जरूरत है जागरूकता, सही समय पर जांच और पूर्ण उपचार की। इसलिए “डर नहीं, जागरूकता अपनाएं टीबी को हराएं।”
डा• रूप कुमार बनर्जी
वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक