लेखक परिचय

डॉ. सुरेंद्र जैन

डॉ. सुरेंद्र जैन

लेखक विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।

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डॉ. सुरेंद्र जैन

सात दिसम्बर की सायंकाल वाराणसी में गंगा के घाट पर गंगा आरती के समय किये गये बम विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया। इस भीषण कांड में एक मासूम बालक सहित दो लोगों को जान से हाथ धोना पडा और लगभग 37 हिंदू भक्त गंभीर रूप से घायल हो गये। इंडियन मुजाहिदीन ने अविलम्ब इस की जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए एक लम्बा ई मेल भी लिख दिया जिसमे उन्होनें स्पष्ट लिखा कि भारत का मुसलमान 6 दिसम्बर 1992 को नहीं भूल सकता। भारत के गृह मंत्री चिदम्बरम साहब भी रस्म अदायगी के लिये वाराणसी पहुंच गये और राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया। इसकी जिम्मेदारी से दोनों सरकारें ही नहीं, भारत के वे सैक्युलरिस्ट भी नहीं बच सकते जो अभी भी बाबरी ढांचे को मस्जिद कहते हैं और भारत के मुसलमानों को बार-बार बाबर जैसे विदेशी हमलावरों के साथ जोड कर उन्हें देश की मुख्य धारा से नहीं जुडने दे रहे हैं। इन सब लोगों के ही कारण इनका एक वर्ग अपने आप को हमलावर की मानसिकता से अलग नहीं कर पा रहा है। इसी कारण कुछ मुस्लिम युवक आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं तथा हिंदुओं का रक्त बहाने में गौरव का अनुभव करते हैं। गजनी, बाबर, हुमायूं कौन सा आदर्श प्रस्तुत कर सकते हैं, यह इनको अवश्य ध्यान में आना चाहिये।

इंडियन मुजाहिदीन ही नहीं भारत के मुसलमानों का एक वर्ग यह सोचता है कि उन्हें ६ दिस० का बदला लेना चाहिये। यह तर्क वे केवल अपने जेहादी कृत्यों को तार्किक आधार देने के लिये प्रयोग करते हैं। क्या वे दुनिया को बेवकूफ समझते हैं? पिछले 1400 वर्षों से जेहाद के नाम जो भीषण्रक्तपात हुए हैं, उनका 6 दिसम्बर से क्या सम्बंध है? भारत का विभाजन, विभाजन के समय लाखों हिंदुओं की निर्मम हत्या, कश्मीर घाटी से हिंदुओं का सफाया जैसे पचासों उदाहरण दिये जा सकते हैं जो 6 दिसम्बर की घटना से कहीं पहले हो चुके हैं। यदि बाबरी ध्वंस को वे 1992 के बाद की आतंकी घटनाओं के लिये उचित आधार मानते हैं तो वे स्वयम ही तय कर लें कि हिन्दुओं पर किये गये पैशाचिक अत्याचारों के लिये उन्हें क्या सजा देनी चाहिये? यह समय मुस्लिम समाज के लिये भी मंथन का है। वे जेहाद के मार्ग पर चलकर विध्वंस का मार्ग चुनना चाहते हैं या देश की जडों के साथ जुड कर अपनी आने वाली पीढी के लिये विकास का मार्ग। मैंने स्वयं 5 दिसम्बर को वाराणसी में एक विशाल धर्मसभा को संबोधित करते समय उनसे यह अपील बहुत विस्तृत रूप में की थी। यदि इस अपील का यही जवाब है तो उन्होनें विनाश का मार्ग चुना है।

आठ दिसम्बर के सफल वाराणसी बंद से उन्हें ध्यान में आ जाना चाहिये कि हिन्दु समाज गुस्से में है। काशी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि वहां के विद्वत समाज नें विरोधस्वरूप गंगा आरती को भी तीन दिन के लिये रोक दिया है। यदि इस आक्रोश की दिशा बदल गयी तो इसका क्या परिणाम हो सकता है, इसको आसानी से समझा जा सकता है। चिदम्बरम साहब ने कहा कि विस्फोट के बावजूद लोग अपने स्कूल, कालेजों में बच्चों को भेज रहे हैं तथा अपने काम काज पर इस तरह जा रहे हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। इसके लिये उन्होनें वहां के लोगों को बधाई भी दी। क्या वे समाज को क्या इतना स्वार्थी और आत्म केंद्रित बनाना चाहते हैं कि जब तक उनके घर का कोई नहीं जाये वे चिंता न करें? उन जैसे राजनेता समाज को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं? उन्हें वहां के समाज को बधाई तो देनी चाहिये परंतु वह बधाई सफल बंद के लिये होनी चाहिये। इस अवसर पर उन्हें बाबा विश्वनाथ की नगरी में आतंकवाद को निर्मूल करने का संकल्प लेना चाहिये तथा बाबा को आश्वासन देना चाहिये कि वे वोट बैंक या अन्य किसी राजनीतिक स्वार्थ की परवाह किये बिना आतंक को जड मूल से समाप्त कर देंगे। आतंकवाद को समाप्त करने के लिये उन्हें यही तेवर अपनाने होंगे। इंडियन मुजाहिदीन का केंद्र वाराणसी के ही नजदीक आजमगढ में है, यह तथ्य किसी से छुपा नहीं है। इसके बावजूद उन पर कठोर कार्यवाही क्यों नही हो पायी, इसका जवाब राष्ट्र को चाहिये। अभी तक हो रही जांच में शक की सूईयां आजमगढ की ओर ही संकेत कर रही हैं। पहले भी कई आतंकी घटनाओं के कर्णधारों का केन्द्र यही शहर पाया गया था परन्तु दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं के उनके साथ खडे होने के कारण उन आतंकियों पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी थी। इसका यह अर्थ स्पष्ट है कि वाराणसी के विस्फोट के लिये कांग्रेस ही जिम्मेदार है।

हिंदू समाज को भी कुछ बातों पर विचार करना होगा। आतंकवाद की यह जंग हिंदू समाज के खिलाफ है। उन्हें यह लडाई स्वयं लडनी होगी। निहित स्वार्थों से बंधी सरकारें समाज के संकल्प को देख कर ही प्रतिक्रिया करेगीं। जब उनको लगेगा कि हिंदू समाज का आक्रोश उनकी गद्दी के लिये भारी पड जायेगा तो ही वे हिंदूओं के साथ खडे होंगे और देश की रक्षा के लिये उचित कदम उठायेंगे। रामजन्म भूमि पर मंदिर का निर्माण इसी संकल्प को प्रकट करेगा। आज हम सबको इसके लिये प्राणपण से जूटना पडेगा।

(लेखक विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं)

5 Responses to “वाराणसी में विस्फोट : सम्पूर्ण राष्ट्र के लिये मंथन का अवसर”

  1. pandit sachin

    तो बताओ तो सही कैसे कैसे हम देश को खोखला कर रहे हैं और तुम्हारा आई एम क्या कर रहा है बताओ

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  2. अहतशाम "अकेला"

    @ Pandit सचिन
    मुझे जानकारी देने से पहले अपनी जानकारी दुरुस्त कर लो सचिन जी
    २ लाइन में ४ झूट बोल गए आप
    बेहतर होगा अपने गिरेबान में झांक लो

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  3. Pandit Sachin

    देश को खोखला कैसे कर रही है विश्व हिन्दू परिषद् ये भी बताते जाओ अतेह्शाम. अगर जेहादियों के खिलाफ आवाज उठाना देश को खोखला करना है तो फिर हाँ हम देश को खोखला कर रहे हैं पर भारत को नहीं तुम्हारे असली देश पाकिस्तान को. इस लिए अगली बार देश के साथ पाकिस्तान भी लिख देना. तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ, ये साईट भारत में ज्यादा पढ़ी जाती है.

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  4. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    सही लिखा है,हिन्दू समाज समझे या न समझे आतंग का निशाना वो ही है वैसे भी हिन्दू को खरगोश की तरह सर निचे रख कर समस्या से भागने का तरीका आता है जब हिन्दू इस बात को नहीं समझते की या अतंग जो ६ शताब्दी से शरु हो कर अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बंगला देश को निगल गया कश्मीर,असं को निगलने की तयारी में है उसका अगला निशाना यह भारत भूमि है जो थोड़ी बहुत बची है उसको भी 50-60 salo में निगलने की तयारी चल रही है उस तयारी का एक साधन yah जेहाद भी है जिसे यहाँ के लोकल लोगो का पूर्ण समर्थन है तभी तो बड़ी आसानी से हमले पर हमले हो रहे है हाथ कुछ नहीं लग रहा है सरकार के………………………

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  5. अहतशाम "अकेला"

    दूसरों को देशभक्ति की हिदायत देकर खुद देश को खोकला किये जाओ
    क्या यही मंथन है आपकी नज़रों में ?

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