जहाँ मनुष्य जीवन का धर्म सनातन है

—विनय कुमार विनायक
जहाँ मनुष्य जीवन का धर्म सनातन है,
वहाँ मनुज जाति तन मन से सज्जन है!
जहाँ बुद्ध का आचार विचार संस्कार है,
वहाँ मानव जन का शुद्ध सद्व्यवहार है!

जहाँ-जहाँ जिन का अनुयाई जैन फैला है,
वहाँ सुख चैन है, दुख का नहीं झमेला है!
जहाँ हिन्दू वहाँ हिंसा को दूर भगा देता है,
जहाँ सिख है वहाँ देशभक्ति सिखा देता है!

जहाँ सनातन नहीं वहाँ मानव जुदा होता है,
मंदिर-मस्जिद में ईश्वर अल्लाह तो होता है
पर दिल में रब नहीं,खुद में ना खुदा होता है,
मन में घृणा चेहरे पर आक्रोश गुदा होता है!

जहाँ का धर्म सनातन है, वहाँ अहिंसा कर्म है,
जहाँ हिन्दू आर्य समाजी है,नहीं जाति वर्ण है!
जहाँ का कर्म सनातन वहाँ कर्मफल का डर है,
जहाँ सनातन पंथ वहाँ कर्म पुण्य पर निर्भर है!

जहाँ सनातन है वहाँ सब धर्म से बंधा होता है,
माँ का धर्म जन्म देना,पालन धर्म पिता का है!
गुरु का धर्म ज्ञान देना, भाई का धर्म रक्षण है,
जीव जन्तु के प्रति दया धर्म मानव लक्षण है!

सत्य अहिंसा करुणा ममता को सनातन ने पाला,
सनातन सिखलाता है जीव जगत का करो भला!
सनातन से चली नारी को सबला बनाने की कला,
सनातनी ने माता बहन बेटी को कभी नहीं छला!

सनातन अनादि अनंत, सनातन का नहीं अंत है,
सनातन में वेद पुराण आगम निगम गुरु ग्रंथ है!
सनातन मनन है कण-कण में ईश्वर का दर्शन है,
सनातन धर्म है, कर्म है, मानवता का समर्थन ह!

सनातन से ही बौद्ध जैन हिन्दू सिख का प्रसार,
सनातन बौद्ध जैन हिन्दू सिख में सम संस्कार!
सनातनी कुकर्म पूर्व अपराध बोध से ग्रस्त होता,
सनातनी कृत दुष्कर्म मन में स्वीकार त्रस्त होता!

सनातन संस्कृति में कुरीतियाँ जब पाँव पसारती
तब एक नया पथ प्रवर्तक जन्म देती माँ भारती!
भगवान बुद्ध औ गुरु गोविंद सिंह थे ऐसी हस्ती
बुद्ध बलि कर्मकांड विरोधी गुरु ने मिटाई जाति!
—विनय कुमार विनायक

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