आर्थिकी

राममंदिर में आखिर किसकी अनदेखी से हुई चढ़ावे की चोरी

राजेश श्रीवास्तव

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एफआईआर आखिरकार हो गई है। ट्रस्ट के दो लोगों चंपत राय और अनिल मिश्र का इस्तीफा भी हो गया है। पूरे हफ्ते चढ़ावे की चोरी का ये मामला सुर्खियों में है। राम मंदिर में चढ़ावे पर जो कुछ हो रहा है वो बहुत दुखद है। खुलासा अब जाकर हुआ है लेकिन जब मंदिर बन रहा था तब भी जमीन खरीद को लेकर शोर शराबा हुआ था। उस वक्त बात आई-गई हो गई। अगर उस वक्त ही इस पर ध्यान दिया जाता तो शायद बात चंदा चोरी तक आती ही नहीं। तो आखिर उस समय उसे क्यों  दबाया गया। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्र पर तब भी उंगली उठी थी। एक बार मान भी लें कि चंपत ने चंदा चंपत नहीं किया लेकिन निगरानी की जिम्मेदारी उन पर ही है तो वह कहीं न कहीं जिम्मेदार माने ही जायेंगे।

उन्होंने क्यों नहीं ध्यान दिया कि कैसे उनका एक ड्राइवर इतनी जल्दी करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर लेता है। जब वो अपने 6० कमरे का हॉस्टल बनवा लेता है, जब वो उसका उद्घाटन करता है तो ट्रस्ट से जुड़े लोग भी जाते हैं। जब आपके सामने दिखाई दे रहा है कि एक आदमी जो साइकिल से चलता था वो बड़ी-बड़ी गाड़िया खरीद रहा है फिर भी आप भोले बने रहे। ये आपराधिक अनदेखी है। ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण  है। इससे पता चलता है कि हमारे धर्म के ठेकेदार किस स्तर तक भ्रष्ट हैं। जिसके देखरेख में ये सब काम हो रहा था, जिम्मेदारी उसकी है भले ही उसने एक भी रुपया नहीं लिया हो। दुर्भाग्य ये है कि ऐसा शायद हर संस्था में हो रहा है और हम आंख मूंदकर आगे चल रहे हैं। जो लोग कर्ताधर्ता बने हुए थे शायद वो खुद को इंसान से ऊपर भगवान से थोड़ा ही नीचे समझते थे। 

दूसरी तरफ इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत चुप क्यों हैं। क्या योगी आदित्यनाथ बुलडोजर चलाएंगे। रही बात चंपत राय कि तो जब उन्हें ये लगने लगा था कि वो यहां के सेवक नहीं है बल्कि वो इसके मालिक बन गए हैं। मुझे लगता है कि ट्रस्ट के दो लोगों के इस्तीफा को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए। पूरे ट्रस्ट को बर्खास्त कर देना चाहिए। जिस बात की चर्चा अयोध्या की गली-गली में थी क्या वो बात चंपत राय को नहीं मालूम थी? राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मामला तब आया था जब दो करोड़ की जमीन 18 करोड़ में खरीदी गई थी। वहीं, अंकुश लगना चाहिए था। जिन पर एफआईआर हुई है वो सिर्फ प्यादे हैं। सीसीटीवी अगर बंद हो गए तो ये कोई टिन्नू तो अकेले नहीं करा सकता है। ट्रस्ट जो बना, उस ट्रस्ट का ही ट्रस्ट खत्म हो गया है। इसलिए मुझे लगता है ट्रस्ट को भंग किया जाना चाहिए। 

निश्चित रूप से यह बहुत गंभीर मामला है क्योंकि यह मामला लाखों भारतीयों की आस्था से जुड़ा है। लाखों भारतीयों ने श्रद्धा और भरोसे के साथ राम मंदिर को दान दिया लेकिन ट्रस्ट ने लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया और जमकर लूटपाट की। राम मंदिर ट्रस्ट ने वित्तीय जांच और छानबीन के लिए एजेंसियां नियुक्त की थीं, जिन्होंने कई सुझाव दिए लेकिन ट्रस्ट के लोगों ने उन सुझावों को नजरअंदाज कर दिया। जब चोरी की घटनाएं सामने आने लगीं और मंदिर के कैश काउंटिग एजेंट ने जब कई मामलों का सार्वजनिक तौर पर खुलासा किया तो उन्हें पद से हटा दिया गया। जब और खुलासे होने लगे तो सीसीटीवी कैमरे हटा दिए गए और कैमरे की रिकॉîडग डिलीट कर दी गई। इस मामले में एसआईटी की रिपोर्ट के बाद कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई लेकिन उसमें सिर्फ छोटे कर्मचारियों के नाम शामिल थे। यूपी पुलिस एसआईटी ने इस मेगा रैकेट के शीर्ष पर बैठे लोगों को फंसाए बिना केवल निचले स्तर के पदाधिकारियों की पहचान की है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की अगुवाई में एक स्वतंत्र जांच से ही इस मंदिर लूट की बड़ी रकम का पता चल पाएगा।

राम मंदिर में चोरी का प्रकरण उजागर होने के बाद आज यह तो तय है कि जिन लोगों ने राम मंदिर के निर्माण के लिए शहादत दी उनकी आत्मा रो रही होगी, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी वह सोच रहे होंगे कि आखिर क्यों राम मंदिर की लड़ाई लड़ी और राम भी दुखी होंगे कि उनकी अयोध्या आज कैसी हो गयी है। जिस अयोध्या को संदेश देने के लिए उन्होंने माता सीता पर झूठा आरोप लगाने के बाद उनका परित्याग कर दिया था वहीं अयोध्या उनके ही प्रसाद पर डाका डाल रही है। लोग कहते हैं कि चंपत ईमानदार हैं वह साबूदाना खाकर रहते हैं, मैं भी मानता हूं कि चंपत ईमानदार हैं लेकिन किस विवश्ता में उन्होंने देख-सुनकर इस घोर अपराध को होने दिया।

महिपाल सिह जो कि निर्माण समिति में था, उसने बताया कि 4०% कमीशन की बात कहने पर उसे हटा दिया गया। 16०० करोड़ रुपये निर्माण में खर्च कर दिए गए लेकिन उसके कमीशन की जांच नहीं हो रही है। दूसरा भूमि घोटाला है, जिसमें 2 करोड़ की जमीन 22 करोड़ की हो जा रही है। आखिर ट्रस्ट ने इतनी महंगी जमीन क्यों खरीदी और इसकी जांच क्यों नहीं हुई? अब चंदा चोरी हो रही है और फर्जी ट्रस्ट बनाकर घोटाले किये गए हैं। वहीं अब तक 4० दिन का सीसीटीवी मिला है जिसमें 7० बार चोरी हुई है। 

मंदिर दान चोरी या गबन का ये क्या पहला मामला है? तो इसका जवाब है नहीं…., इससे पहले भी देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों में दान की चोरी की घटनाएं हुई हैं। इनमें शिरडी साईं बाबा मंदिर (महाराष्ट्र), पुरी जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा), उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर (मध्य प्रदेश), मदुरै मीनाक्षी मंदिर (तमिलनाडु), केरलम का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर शामिल हैं। देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक, केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखाने 2०11 में खोले गए थे। इसके बाद एक ऑडिट रिपोर्ट में दावा किया गया कि मंदिर से सैकड़ों किलोग्राम सोना गायब हुआ है। एक रिपोर्ट में तो खास तौर पर 266 किलोग्राम सोना गायब होने की बात कही गई थी। इसी दौरान, केरल के सबरीमाला मंदिर से भी सोना गायब होने की शिकायतें सामने आईं।

महाराष्ट्र के शिरडी साईं बाबा मंदिर में साल 2०25 में डोनेशन स्कैम यानी दान की चोरी सामने आई थी। चोरी का मामला अप्रैल 2०25 में सामने आया था। मंदिर के दान (हुंडी) की गिनती के दौरान 1.5 लाख से 3.25 लाख रुपए के बीच चोरी हुई थी। सीसीटीवी फुटेज में एक कर्मचारी नोटों के बंडल अपनी जांघों और कपड़ों में छिपाते हुए पकड़ा गया था। आरोपी की पहचान बालासाहेब गोंडकर के तौर पर हुई थी, जो ट्रस्ट के अकाउंट्स डिपार्टमेंट में चपरासी था और 3० साल से सेवा दे रहा था। खुलासे के बाद कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया गया था.

मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में दान पेटी से चढ़ावा चोरी होने का मामला साल 2०26 मार्च में सामने आया। मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार कर्मचारी दान पेटियों से रोजाना करीब 1०,००० रुपए की चोरी कर रहे थे। सुबह करीब 7 बजे रूटीन जांच के दौरान आरोपियों की हरकतें संदिग्ध लगीं जिसके बाद मामले की गहन जांच शुरू की गई. जांच में पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ था। मंदिर के कर्मचारी महीनों से दान का पैसा चुरा रहे थे। श्री जगन्नाथ मंदिर में भी दार पेटी से चोरी हो चुकी है। जगन्नाथ मंदिर के एक कर्मचारी पर गर्भगृह के पास रखे दान-पात्र से कैश चुराने का आरोप लगा था। तिरुमाला तिरुपति बालाजी मंदिर में साल 2०24 में दान पेटी से चोरी का एक मामला सामने आया था। 23 नवंबर 2०24 को, पुलिस ने तमिलनाडु के एक व्यक्ति को तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर मंदिर की ‘श्रीवारी हुंडी’ से 15,००० रुपए की चोरी करने के आरोप में पकड़ा था।