लेखक परिचय

नरेंद्र भारती

नरेंद्र भारती

जर्नलिस्ट और कोलुंनिस्ट यूनिवर्स न्यूज़ पेपर & रिसेर्च सेंटर डिस्ट्रिक्ट मंडी हिमाचल प्रदेश

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नरेन्द्र भारती dowry

बेशक देश में दहेज के खिलाफ ढेरों कड़े कानून बनाए है मगर यह कानून फाईलों की धूल चाट रहे है विश्व गुरु भारत में दहेज हत्याओं की बढती घटनाएं अशुभ सकेत है आखिर दहेज हत्याऐ क्यों नहीं रुकती है यह एक यक्ष प्रशन बनता जा रहा है।राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड व्यूरों में दर्ज मामले चौकानें वाले है हर वर्ष इन घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हो रही है मगर सरकारें मूकदर्शक बनी हुई हैं।आकडे़ बताते है कि वर्ष 2007 में 8093 मामले दहेज हत्या के हुए जबकि 2008 में यह बढकर 8172 हो गए वर्ष 2009 में 8383मामले दर्ज किए गए।2010 में 8391 और 2011 में 8618 हो गए। 2012 में 8233 मामले दहेज हत्या के हुए। पिछले बीते छह सालों के यह आंकडे बहुत ही खौफनाक तस्वीर प्रस्तूत कर रहे हैं। दहेज हत्याओं का ग्राफ घटनें के बजाए निरंतर बढता ही जा रहा है। कानून के अनुसार दहेज लेना व देना कानूनी जुर्म है मगर इस नियम की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।आज लोग भारी-भरकम दहेज दे रहे हैं जिस कारण यह प्रचलन दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।गरीब लोग दहेज देने में असमर्थ है नतीजन ससुराल पक्ष के लोग उन्हे प्रताड़ित करते हैं।देश का कोई भी राज्य इस दहेज की बीमारी से अछूता नहीं है हर राज्य में दहेज हत्याओं के मामले घटित हो रहे हैं।भारत में दहेज हत्याओं की प्रतिश्तता दर बढ़ती ही जा रही हे 18 से 25 वर्ष की लड़कियों की संख्या के ज्यादा मामले प्रकाश में आ रहे हैं।कानून का लचीलापन तथा सरकारें इसके लिए जिम्मेवार हैं।आज पंजाब ,हरियाणा, हिमाचल व उतर प्रदेश,राजस्थान जैसे राज्यों मे प्रतिदिन ऐसे मामले हो रहे है। मुम्बई, कोलकाता ,दिल्ली व चैन्नई जैसे महानगरों में तो ऐसे मामले हदें पार कर चुके हैं क्योकि यहां हर दिन दहेज हत्याएं होती है । मगर दहेज के लोभियों पर कोई सख्त कारवाई नहीं हो रही है नतीजन यह प्रथा विकराल रुप धारण करती जा रही है यदि सरकारें इन दहेज के लालचियों पर शिकंजा कसे तो इस प्रथा को रोका जा सकता हे मगर राज्य सरकारें हाथ पर हाथ धरे तमाशा देख रही हैं।दहेज न देने के कारण आज गरीब लड़कियों की शादीआं नहीं हो रही है क्योकि आज लोग दहेज के लालची हो गए हैं भले ही लडकी कितनी भी उच्च शिक्षित हो मगर पहली शर्त यही होती है कि यहां से कितना दहेज मिल सकता है दहेज ही सबसे बड़ी योग्यता बन गई हैं।आज लोग अपनी जमीन-जायदादे तथा सोने-चांदी के आभूषणों को गिरवी रखकर दहेज दे रहे है साहूकारों से पैसा उधार लेकर बेटियों के हाथ पीले कर रहे है ताकि शादी हो सके उसके बाद भी लालचियों का पेट नहीं भरता है। उसके बाद भी और दहेज लाने के लिए तंग करते हैं। अमीर व साधन-संपन्न लोग लाखों रुपयों का दहेज देते है मगर इसकी मार प्रत्यक्ष रुप से गरीबों पर पड़ रही है लोग देखा-देखी में ज्यादा से ज्यादा दहेज दे रहे है। देश में बढ रही दहेज की इस संस्कृति को रोकना होगा। इस प्रथा ने आज इतना भयानक रुप धारण कर लिया है कि समाज का प्रत्येक वर्ग इसके कारण दुखी है इसकी भयानकता का प्रमाण प्रतिदिन हो रही घटनाओं में साक्षात नजर आ रहा है।दहेज उन्मूलन के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपया खर्च किया जाता है सैमीनार लगाए जातें है रैलियां निकाली जाती है नारे लिखे जाते है, मगर नतीजा कुछ नहीं निकलता। जो जनता के मसीहा ऐसे कानून बनाते है वही लोग इसका सरासर उल्लघन करते हैं। क्यांकि राजनेता से लेकर धन्नासेठ इतना दहेज देते है कि उसकी कीमत लाखों में होती है। अक्सर देखा गया है कि कई रईस लोग नकद पैसा भी देते हैं। कार व कोठी तक देते हैं। आज बेटियों को जलाया जा रहा है यातनाएं दी जा रही हैं ऐसे कई रुह कंपा देने वाले मामले हर रोज देखने को मिल रहे हैं। गरीब घरों की बेटियां चारदीवारी के अन्दर ही अन्दर घूटती रहती है उनकी सिसकियां देखने वाला कोई नहीं है क्योकि उन्हे डर होता है कि यदि विरोध किया तो न घर की रहेगी न घाट की रहेगी इसलिए चुपचाप नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।सामाजिक संस्थाएं भी ऐसे मामलों पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रही है वे भी कुछ मामलो को ही तरजीह देती है जबकि संस्थाओं को ऐसे लोगों को कटघरे में खड़ा करके सजा दिलवानी चाहिए ताकि आने वाले समय में दहेज प्रथा पर पूर्ण रुप से प्रतिबन्ध लगाया जा सके। दहेज के विरुद्ध कुछ वर्ष पहले मेरठ की एक बहादुर लडकी निशा ने दहेज के लोभियों को ऐसा सबक सिखाया था कि उन्हे ताउम्र सबक याद रहेगा निशा एक मिसाल बन गई थी जब उसने बारात को वापिस भेजा ओर दहेज के लालचियों को पुलिस के हवाले करके हवालात भिजवाया था निशा के इस जज्बे को पूरा भारत सलाम करता है कि यदि हर लडकी निशा जैसा संबल दिखाए तो इस प्रथा का अंत हो जाएगा।सरकारों को इन मामलों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।दहेज के कारण आज बेटियों का जीवन बरवाद हो रहा है कई घरों की इकलौती बेटियां दहेज की बलि चढ़ाई जा रही हैं। निति-नियंताओं को चाहिए कि इस पर रोक लगाने के लिए कारगर कदम उठाएं ताकि इस दहेज के दानव से निजात मिल सके। सरकारों को एक ऐसी कमेटियां गठित करनी चाहिए कि जो लोगों को जागरुक कर सके ताकि एकजुट होकर इस प्रथा के खिलाफ कदम उठ सकें। समाज को इस कुरीती के विरुद्ध खडा़ होना पडे़गा तब इस पर विराम लग सकता है ।अगर अब भी सरकारों से लापरवाही बरती तो दहेज हत्याएं होती रहेगी।
’’ सरकार के कानून फाईलों की धूल चाटते रहेगें
दहेज के नाग बहु-बेटियों को काटते रहेंगें
समाज को आगे आना होगा,दहेज प्रथा को जड़ से मिटाना होगा
समाज में जब तक यह दहेज संस्कृति पलती रहेगी
’’े  तब तक हर रोज किसी की मां किसी की बेटी,किसी की बहन दहेज के लिए जलती रहेगी।’’

 

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