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    Homeसाहित्‍यकवितापुरुष दिवस क्यों नहीं मनाते ?

    पुरुष दिवस क्यों नहीं मनाते ?


    मना लिया है महिला दिवस सबने
    पुरुष दिवस क्यों नहीं मनाते हो ?
    महिलाओं को देदी है आजादी,
    पुरुषों को क्यों गुलाम बनाते हो ?

    माना नारी चूल्हे में जलती है,
    पर पुरुष भी धूप में जलता है।
    मिली है जब आजादी नारी को,
    तो पुरुष क्यों सबको खलता है।।

    आठ मार्च महिला दिवस निश्चित है,
    पुरुष दिवस भी निश्चित होता।
    अच्छा तो यें दिवस तब होता,
    दोनों का दिवस एक दिन होता।।

    दोनों के है जब समान अधिकार,
    पुरुषों को क्यों नहीं ये मिलता।
    जब चम्पा चमेली खिलती है,
    तब कमल क्यों नहीं ये खिलता।।

    नारी जब पुरुष के बिन अधूरी है,
    तब पुरुष दिवस क्यों मजबूरी है।
    जब तक पुरुष दिवस नहीं मनेगा
    तब तक महिला दिवस अधूरी है।

    नर और नारी गृहस्थ के पहिए है,
    तभी गृहस्थ की गाड़ी चलती है।
    महिला दिवस मना लो केवल,
    ये बात पुरुष को खलती है।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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