लेख

यूजीसी मतलब आ बैल मुझे मार


विनय कुमार मिश्र 


ऐसा माना जाता है कि भाजपा सवर्णों की पार्टी है । सवर्ण का हित इसी पार्टी को वोट देने में है। समय-समय पर ऐसा सिद्ध भी हुआ है क्योंकि कुछ पार्टियों तो इन्हें पानी पी पीकर गालियां देती थी लेकिन आजकल सवर्णों पर डोरे डाल रहीं हैं , इनके समर्थन में बोल रहीं हैं। एकाएक भाजपा को पता नहीं क्या हो गया है कि जहां सभी पार्टियां सवर्णों को अपने पक्ष में करने में लगी हुई है, वहीं भाजपा इन्हें क्रोधित होने का मौका देने के साथ-साथ इन्हें बगावत के लिए मजबूर कर रही है । आखिर क्या सोच रही है कि वह ऐसा करके अन्य लोगों का वोट जिन्हें खुश कर रही है उनका वोट पा पाएगी।

देश भर में हो रहे हो हल्ले मंडल आयोग की याद दिला रहे हैं । मंडल आयोग लागू  होने के बाद अन्य पार्टियों का भी देख लीजिए. जो भी इसके जिम्मेदार थे, जिन जिनका इसमें हाथ था, वह आज सत्ता से कोसों दूर है लेकिन अभी वही गलती भाजपा करके सत्ता से कोसों दूर  होना चहती है ।

 भाजपा की ग्रह दशा की अगर बात की जाए तो हमें लगता है कि कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। एक यूजीसी का जबरदस्त  विरोध तो दूसरी तरफ एसआईआर से परेशान लोग पानी पी पीकर अनाप सनाप बके जा  रहे हैं । आज तक सवर्ण भाजपा को इसलिए चुनते और वोट देते आये हैं कि वह उनका हित और रक्षा करेंगी लेकिन एकाएक यह भाजपा को क्या हो गया कि ऐसे बिल की बात सोच ली । कोर्ट का अगर आदेश था तो वह कमेंटी में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देती । झूठा आरोप लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रवधान करतीं तो बात कुछ अलग होंती लेकिन जिस रूप में यह कानून लाया जा रहा था, वह सच में काला कानून था। इससे उन बच्चों का भविष्य चौपट हो जाता जो भविष्य बनाने जातें हैं। सवर्णों के साथ घात किया जा रहा था। इस कानून के आ जाने से सवर्ण असहाय महसूस करता तथा कोई भी झूठे मुकदमों में फसा कर इनका भविष्य चौपट कर देता। झूठा मुकदमा करने वाला जिंदगी के मज़े करता और निर्दोष जेल की सलाखों के पीछे काल कोठरी में सवर्ण होने का दंश झेलता। इतने अंधे और बहरे है कि कई ऐसे बनें कानूनों की खामियां नहीं दिखीं।


जो जेल की हवा, झूठा मुकदमा झेल जाता, वह अंत में क्या करता, क्या बनता, समाज के प्रति क्या सोचता । आखिर यह कानून लाकर सरकार क्या संदेश देना चाहती थीं कि अब शिक्षण संस्थानों में भी भेदभाव, जातिवाद, अपराध, वैमनस्यता आदि भी पढ़ाए जाएंगे। शिक्षा का मतलब मानवीय होता है. शिक्षा इन सबसे ऊपर होती है। जब आप शिक्षण संस्थानों में इसकी नींव रख देंगे, तब तो पूरी शिक्षा व्यवस्था ही चौपट हो जाएंगी। फूट डालो राज करो की नीति छोड़िए और देश की सोचिए। देश अभी बहुत से संकटों से गुजर रहा है। अगर समानता नहीं होंगी तो हमारा देश धीरे-धीरे कमजोर होता जायेगा। जो कानून बने, उसमें समानता हों, भेदभाव की कोई जगह न हो, जातिगत मुद्दे की बात न हो। 

विनय कुमार मिश्र