लिमटी खरे

Author:   लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

लिमटी खरे has posted 149 articles for us.

ये है दिल्ली मेरी जान

ये है दिल्ली मेरी जान

-लिमटी खरे ममता से वसूले जाएं 11 लाख केंद्र में रेल मंत्री का दायित्व संभालने वाली पश्चिम बंगाल की क्षत्रप सुश्री ममता बनर्जी ने नैतिकता की सारी हदें पार कर दी हैं। उन्होंने देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली को छोड़कर पश्चिम बंगाल में ज्यादा समय बिताया जा रहा है। ममता बनर्जी ने सबसे पहले तो [...]

पितरों के पहले खिली खिली नजर आएगी कांग्रेस

पितरों के पहले खिली खिली नजर आएगी कांग्रेस

- लिमटी खरे लगातार चौथी बार कांग्रेस की सत्ता को संभालने के लिए सोनिया गांधी बेहद आतुर नजर आ रही हैं। हालात देखकर उनकी ताजपोशी मुकम्मल ही मानी जा रही है। अपनी नई पारी में सोनिया गांधी के तेवर कड़े होने की बात कही जा रही है। खामोशी के साथ लंबे समय से कांग्रेस और [...]

क्या निस्वार्थ सेवा का अपमान है तीन गुना वेतन!

क्या निस्वार्थ सेवा का अपमान है तीन गुना वेतन!

-लिमटी खरे राजनीति करना या चुनाव लड़ना जीतकर फिर जनसेवा करना, यह सब कुछ निस्वार्थ सेवा की श्रेणी में ही आता है। आजादी के मतवालों ने ब्रितानी हुकूमत को खदेड़ने के लिए सियासत की, भीड़ का नेतृत्व किया, लोगों को सही पथ पर चलने का आव्हान किया, कुछ नरमी से पेश आते थे वे नरम [...]

ये है दिल्ली मेरी जान

ये है दिल्ली मेरी जान

-लिमटी खरे अंधेरे में रहने पर मजबूर है राजमाता की रियाया भारत गणराज्य में छोटे बच्चे से अगर पूछा जाए कि देश पर वास्तव में शासन कौन कर रहा है तो निश्चित तौर पर उसका जवाब होगा ‘सोनिया गांधी‘। नेहरू गांधी परिवार के नाम पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस ने अघोषित [...]

घर के लड़का गौहीं चूसें, मामा खाए अमावट

-लिमटी खरे बुंदेल खण्ड की एक मशहूर कहावत है- ‘‘घर के लड़का गोहीं (आम की गुठली) चूसें, मामा खाएं अमावट (आम के रस से तैयार होने वाला एक स्वादिस्ट पदार्थ)।‘‘ जिसका भावार्थ कुछ इस प्रकार है कि घर में बच्चे भूख से परेशान होकर आम के रस निकालने के उपरांत बची गुठली को चूसने पर [...]

भूखे पेट न हों भजन गोपाला

भूखे पेट न हों भजन गोपाला

पवार उवाच, ‘सड़ जाए अनाज पर मुफ्त नहीं बाटेंगे’ -लिमटी खरे देश की सबसे बड़ी अदालत भले ही सरकार को फटकार लगाकर अनाज को सड़ने के बजाए गरीबों में मुफ्त बांटने की बात कह रही हो पर आधी सदी से ज्यादा देश पर राज करने वाली कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार के [...]

भोपाल गैस कांड में अर्जुन सिंह आखिर साबित क्या करना चाहते हैं?

भोपाल गैस कांड में अर्जुन सिंह आखिर साबित क्या करना चाहते हैं?

-लिमटी खरे बीसवीं सदी के अंतिम तीन दशकों में कांग्रेस की राजनीति के चाणक्या का अघोषित तमगा मिल चुका है पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर अर्जुन सिंह को। कुंवर अर्जुन सिंह के जहर बुझे तीरों के चलने के बाद जब घाव रिसने लगते हैं, तब लोगों को पता चल पाता है कि कुंवर साहब ने घाव [...]

मंहगाई पर साध लेते हैं चुप्पी पर वेतन भत्तों पर अड़े रहते हैं माननीय

मंहगाई पर साध लेते हैं चुप्पी पर वेतन भत्तों पर अड़े रहते हैं माननीय

-लिमटी खरे 14 और 15 अगस्त की दरम्यानी रात को जब डेढ़ सौ साल की ब्रितानी हुकूमत से देश को आजादी मिल रही थी तब हर एक भारतीय की आखों में उजले भविष्य की तस्वीर साफ दिखाई पड़ रही थी। उस वक्त जवान हो चुकी पीढ़ी को लगने लगा था कि आने वाला कल हमारा [...]

लाचार प्रधानमंत्री का उबाऊ उद्बोधन!

लाचार प्रधानमंत्री का उबाऊ उद्बोधन!

-लिमटी खरे भारत गणराज्य में आजादी के उपरांत यह परंपरा चल पड़ी है कि स्वाधीनता दिवस के रोज वजीरे आजम द्वारा स्वायत्त सत्ता के प्रतीक लाल किले में तिरंगा फहराया जाएगा और उसके बाद वे उसी लाल किले की प्राचीर से आवाम ए हिन्द को संबोधित करेंगे। अब तक के प्रधानमंत्रियों में डॉ. मनमोहन सिंह [...]

ये है दिल्ली मेरी जान

ये है दिल्ली मेरी जान

-लिमटी खरे राहुल शरणम जाने की तैयारी में सुरेश कलमाड़ी जनता के हजारों करोड़ रूपए हवा में उड़ाने के बाद अब कामन वेल्थ गेम्स आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कांग्रेस के अंदर अंदर ही मची खींचतान को रोकने के लिए कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी को सिद्ध करने का [...]

गांधी दर्शन से उबने लगी है कांग्रेस

गांधी दर्शन से उबने लगी है कांग्रेस

-लिमटी खरे नई दिल्ली 16 अगस्त। समूचा देश मोहन दास करमचंद गांधी को राष्ट्रपिता कहकर ही संबांधित करता है। बापू के सादा जीवन उच्च विचारों के सामने उन ब्रितानी आताताईयों ने भी घुटने टेक दिए थे, जिन्होंने देश पर डेढ़ सौ साल राज किया। उसी बापू के नाम को भुनाकर आधी सदी से ज्यादा देश [...]

लो फिर आ गया स्वाधीनता दिवस!

लो फिर आ गया स्वाधीनता दिवस!

-लिमटी खरे 14 और 15 अगस्त की दर्मयानी रात को 1947 में गोरे ब्रितानियों ने भारत को अपनी गुलामी की जंजीरों से आजादी दी थी। आजाद भारत को संवारने, दिशा देने में उस वक्त के शासकों ने बहुत सारे सपने देखे थे। इन सपनों को साकार करने का माद्दा भी था तत्कालीन शासकांे में। देश [...]

‘रतन‘ के बाद कौन कहेगा ‘टाटा‘

‘रतन‘ के बाद कौन कहेगा ‘टाटा‘

-लिमटी खरे भारत गणराज्य में टाटा समूह एक किंवदंती बनकर रह गया है। टाटा ग्रुप के वर्तमान अध्यक्ष रतन टाटा ने 1991 में इसके अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था, उसके बाद टाटा गु्रप ने पीछे मुडकर नहीं देखा। लगभग बीस सालों के कारोबार में रतन टाटा के नेतृत्व मंे टाटा गु्रप के राजस्व में पच्चीस [...]

क्या हम आजाद भारत गणराज्य में हैं!

क्या हम आजाद भारत गणराज्य में हैं!

-लिमटी खरे भारत गणराज्य के संसदीय इतिहास में पहली मर्तबा एसा हुआ होगा कि किसी कबीना मंत्री ने देश के माननीय कहे जाने वाले संसद सदस्यों के अधिकार क्षेत्र को ही चुनौति दे डाली हो। राष्ट्रमण्डल खेलों में हो रहे जबर्दस्त भ्रष्टाचार के बारे में सवाल जवाब और हंगामों के दौर के बीच भारत के [...]

खेल के बाद होगी जांच, मतलब तब तक भ्रष्टाचार की खुली है छूट

खेल के बाद होगी जांच, मतलब तब तक भ्रष्टाचार की खुली है छूट

-लिमटी खरे देश की नाक का सवाल बन चुके राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए सरकार तैयार हो अथवा न हो, स्टेडियम तैयार हों या न हों, पर मेहमानवाजी के लिए ‘‘अपराधियों‘ ने अपनी कमर कस रखी है। कामन वेल्थ गेम्स देश की नाक बचा सकें या न बचा सकें पर आयोजन समिति से जुडे लोगों की [...]

ये है दिल्ली मेरी जान

ये है दिल्ली मेरी जान

-लिमटी खरे अब पुलिस पर कसी लगाम सबसे बडी अदालत ने पुलिस जो चाहे सो कर सकती है। पुलिस की अगाडा, घोडे का पिछाडा और मौत का नगाडा इन तीनों चीजों से बचने की सलाह हर वक्त ही दी जाती है। आजादी के बाद भारत में पुलिस को इतना अधिकार सम्‍पन्न बना दिया गया है [...]

गुरू बिन गोविंद दर्शन हों तो कैसे?

गुरू बिन गोविंद दर्शन हों तो कैसे?

-लिमटी खरे बहुत पुराना दोहा है -‘‘गुरू गोविंद दोउ खडे, काके लागू पाय! बलिहारी गुरू आपकी, गोविंद दियो बताए!!‘‘ इस दोहे के भावार्थ बचपन में गुरूजनों द्वारा बडे ही चाव से बताए जाते थे, कि जब गुरू और ईश्वर दोनों खडे हों तो किसके पैरों को स्पर्श कर आर्शीवाद लिया जाना चाहिए। गुरू को ईश्वर [...]

खेल खेल में अरबों का खेल

खेल खेल में अरबों का खेल

-लिमटी खरे महज तेरह दिनों के लिए आयोजित राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए भारत गणराज्य की सरकार पैसे को पानी की तरह बहाने से नहीं चूक रही है। भारत पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस को इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि उसके राज में भारत गणराज्य की जनता किस [...]

इक्कीसवीं सदी में नहीं पहुंच सका है भारत गणराज्य

इक्कीसवीं सदी में नहीं पहुंच सका है भारत गणराज्य

-लिमटी खरे बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में भविष्यदृष्टा की अघोषित उपाधि पाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सबसे पहले इक्कीसवीं सदी में जाने की परिकल्पना कर लोगों को अत्याधुनिक उपकरणों आदि के बारे में सपने दिखाए थे। आज वास्तव में उनकी कल्पनाएं साकार होती दिख रही हैं। विडम्बना यह है कि स्व.राजीव गांधी की [...]

ये है दिल्ली मेरी जान

-लिमटी खरे मानो या ना मानो ‘मीडिया बन चुकी है धन कुबेर की लौंडी‘ स्वच्छ, निष्छल, निर्भीक, जनसेवा के लिए की जाने वाली पत्रकारिता के दिन लद चुके हैं। अब जमाना पेड न्यूज का आ चुका है। मीडिया की लगाम वाकई में धनपतियों के हाथों में जा चुकी है। पेड न्यूज पर देशभर में हो [...]

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