जानिए कैसे मिटटी के बर्तन द्वारा आप अपना किस्मत/भाग्य संवार सकते हैं .

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मिट्टी के बर्तनों में पकी दाल-सब्जी में धातु विषैले तत्व और चमक पैदा करने वाले रसायनों की मिलावट भी नहीं होती है। मिट्टी उष्णता की कुचालक है अत: इस तरह के बर्तनों में भोजन पकाने से उसे धीरे-धीरे उष्णता प्राप्त होती है, जिसके परिणामस्वरूप दालसब्जी में प्रोटीन शतप्रतिशत सुरक्षित रहता है। यदि कांसे के बर्तन में खाना पकाया जाए तो कुछ प्रोटीन का क्षरण हो जाता है व एल्युमिनियम के बर्तन में पकाने से 87 प्रतिशत प्रोटीन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है। भोजन में कुछ एल्युमिनियम चले जाने से एल्जाइमर, पार्किन्सन आदि अनेक बीमारियां हो जाती हैं।

जानिए की कैसे आप सही दिशा अपनाकर जियें स्वस्थ जीवन–

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प्रिय पाठकों, हमारे जीवन मे दिशाओ का बहुत महत्व है। हमारे जीवन मे अनेक कष्ट एवं कठिनाइयाँ केवल दिशाओं के गलत उपयोग के कारण ही आती है। आप अपनी दिशाएं बदल के अपने जीवन मे सुख शांति ला सकते हैं। वास्तु का भी हमारे जीवन में विशेष प्रभाव रहता है.मानसिक हालत कमजोर होने की स्थिति… Read more »

साइनस को इग्नोर करना ठीक नहीं

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इस बीमारी का मुख्य कारण झिल्ली में सूजन का आ जाना, साथ ही यह सूजन भी निम्न कारणों से आ सकती है बैक्टीरिया, फंगल संक्रमण, या फिर नाक की हड्डी का ढ़ेडा होना. उन्होने बताया कि इसके लक्षण आप इस बीमारी को आसानी से पहचान सकते हैं, सिर का दर्द होना, बुखार रहना, नाक से कफ निकलना और बहना, खांसी या कफ जमना, दांत में दर्द रहना, नाक से सफेद हरा या फिर पीला कफ निकलना. चेहरे पर सूजन का आ जाना, कोई गंध न आना. साइनस की जगह दबाने पर दर्द का होना आदि इसके लक्षण हैं. आम तौर पर ये गंभीर बीमारी नही है लेकिन समय रहते इसका इलाज नही कराया गया तो मरीज को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

जानलेवा फ्लोराइड और उसके चिकित्सीय उपाय

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डा. राधेश्याम द्विवेदी फ्लोराइड क्या है:-कई देशों जैसे सं. रा. अमेरिका आदि में पीने के पानी के फ्लोरिडेशन की नीति इतने लंबे समय से प्रभावी है कि अधिकांश लोग इसपर ध्यान ही नहीं देते. लेकिन अब बहुत से वैज्ञानिक और जनस्वास्थ्य अधिकारी यह प्रश्न उठा रहे हैं कि राष्ट्रव्यापी फ्लोरिडेशन का क्या औचित्य है और… Read more »

बिना जन जागरुकता टीबी से बचाव असंभव 

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टीबी के जीवाणुओं को मारने के लिए इसका उपचार करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। टीबी के उपचार में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली दो एंटीबायोटिक्स आइसोनियाजिड और रिफाम्पिसिन हैं, और उपचार कई महीनों तक चल सकता है। सामान्य टीबी का उपचार 6-9 महीने में किया जाता है। इन छह महीनों में पहले दो महीने आइसोनियाजिड, रिफाम्पिसिन, इथाम्बुटोल और पायराजीनामाईड का उपयोग किया जाता है।

कुष्ठ रोग पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास की जरूरत

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कुष्ठ रोग निवारण दिवस, 30 जनवरी 2017 पर विशेष कोढ़ को ही कुष्ठ रोग कहा जाता जो कि एक जीवाणु रोग है। यह एक दीर्घकालिक रोग है जो कि माइकोबैक्टिरिअम लेप्राई और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस जैसे जीवाणुओं कि वजह से होती है। कुष्ठ रोग के रोगाणु कि खोज 1873 में हन्सेन ने की थी, इसलिए कुष्ठ… Read more »

सभ्यता के इतिहास के तानेबाने के साथ जुड़ी है कोढ़ रोग के इतिहास की कहानी

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अनिल अनूप उत्तर प्रदेश के एक खेतिहर मजदूर प्रदीप कुमार (24) का इलाज तीन साल से एक ऐसे रोग के लिए हो रहा है जिसे 11 साल पहले बहुत हद तक भारत से भगा दिया गया था. वह रोग कोई और नहीं, बल्कि कुष्ठ है. भारत में अभी भी कुष्ठ रोगियों की संख्या 88,833 है…. Read more »

तंबाकू से होने वाले कैंसर के शोधों का सच

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संदर्भः चबाने वाली तंबाकू के सेवन पर हुए शोधों के विरोधाभासी निष्कर्ष- लकवा का कारण भी है तंबाकू प्रमोद भार्गव तंबाकू ऐसा नषीला पदार्थ है, जिसपर सबसे ज्यादा विरोधाभासी और चोंकाने वाले शोध आते रहे है। ऐसे ही एक नए शोध ने दावा किया है कि चबाने वाली तंबाकू (स्मोकलैस टोबैको) के सेवन से कैंसर… Read more »

सतर्क रहें बर्ड फ्लू फिर लौट आया है भारत

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मनुष्यों में बर्ड फ्लू के सामान्य लक्षणों में बुखार आना, हमेशा कफ बना रहना, नाक बहना, सिर में दर्द रहना, दस्त होना, जी मिचलाना, गले में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, आंख में कंजंक्टिवाइटिस, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, सांस लेने में तकलीफ होना, सांस ना आना और निमोनिया होना प्रमुख हैं। बर्ड फ्लू के इलाज के लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जाता है। इस बीमारी में पूरी तरह आराम करना बहुत आवश्यक होता है।

डेंगू ने खोल दी सरकारी अस्पतालों के दावों की पोल

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आज डेंगू ,मलेरिया ,चिकनगुनिया के साथ तेज बुखार के कारण राजधानी लखनऊ ही नहीं अपितु प्रदेश के कई शहरों की जनता आक्रोशित भी हो रही है जिसके कारण कानून व्यवस्था की समस्या भी पैदा होने लग गयी है। प्रदेश में सफाई व्यवस्था व फागिंग आदि का भी बुरा हाल हो रहा है। मशीनों की खराबी के कारण कई जगह फागिंग तक नहीं हो पा रही है। वहीं फागिंग को लेकर भी लेकर भी राजनीति हो रही है।