• कैसा ये बन गया समाज

    -रवि श्रीवास्तव- कैसा ये बन गया समाज, क्या है इसकी परिभाषा, हर तरफ बढ़ गया अपराध, बन रहा खून का प्यासा। मर्डर चोरी बलात्कार, बन गया है इसका खेल, जो नही खाता है देखो, इक सभ्य समाज से मेल। बदलती लोगों की मानसिकता, टूट रही घर घर की एकता, जिधर भी देखो घूम रही है, ... Read more »
  • पिछड़ी जातियों में क्रिमीलेयर वर्ग से आशय

    -श्यामलाल बोराना- पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है, पिछड़े वर्गों को आरक्षण देते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि समाज में पिछड़े वर्गों के साथ सामाजिक असमानता नही है। उनमें सिर्फ शिक्षा के स्तर की कमी है, अतः उन्हें मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार ... Read more »
  • बापू के आह्वान पर लिए व्रत पर आजीवन अडिग रहे शुभकरण बाबू

    -कुमार कृष्णन- बीते सदी के दूसरे दशक की शुरूआत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के केंद्र में आ गये थे और इसे उन्होंने आम लोगों से जोड़ा। यह वह दौर था, जब 21 मार्च 1919 को रोलेेट एक्ट लागू किया गया, इसमें न अपील न दलील और न वकील की ... Read more »
  • इस्लाम के नाम पर यज़ीदियत फैलाती वहाबियत

    -तनवीर जाफ़री- कुरान शरीफ़ की शिक्षाओं से लेकर अपने आखिरी रसूल हज़रत मोहम्मद के निर्देशों की बदौलत इस्लाम धर्म एक शांति, प्रेम, सद्भाव तथा मानवता की रक्षा करने वाले धर्म के रूप में पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाता रहा है। परंतु यह भी सच है कि अपने अस्तित्व में आने ... Read more »

कैसा ये बन गया समाज

-रवि श्रीवास्तव- कैसा ये बन गया समाज, क्या है इसकी परिभाषा, हर तरफ बढ़ गया अपराध, बन रहा खून का प्यासा। मर्डर चोरी बलात्कार, बन गया है इसका खेल, जो नही खाता है देखो, इक सभ्य समाज से मेल। बदलती…

पिछड़ी जातियों में क्रिमीलेयर वर्ग से आशय

-श्यामलाल बोराना- पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है, पिछड़े वर्गों को आरक्षण देते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि समाज में पिछड़े वर्गों के साथ सामाजिक असमानता नही है। उनमें सिर्फ शिक्षा के स्तर…

बापू के आह्वान पर लिए व्रत पर आजीवन अडिग रहे शुभकरण बाबू

-कुमार कृष्णन- बीते सदी के दूसरे दशक की शुरूआत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के केंद्र में आ गये थे और इसे उन्होंने आम लोगों से जोड़ा। यह वह दौर था, जब 21 मार्च 1919 को रोलेेट एक्ट लागू…

नमो सरकार को परखने के लिये अभी कुछ और वक्त देना होगा?

-इक़बाल हिंदुस्तानी- -भाजपा अपना बहुमत लाने के बाद भी डर डरकर कदम उठा रही!- नमो सरकार चुनाव से पहले जो सपने जनता को दिखा रही थी उन पर आमूलचूल अमल होता नज़र नहीं आ रहा है लेकिन पांच साल के…

इस्लाम के नाम पर यज़ीदियत फैलाती वहाबियत

-तनवीर जाफ़री- कुरान शरीफ़ की शिक्षाओं से लेकर अपने आखिरी रसूल हज़रत मोहम्मद के निर्देशों की बदौलत इस्लाम धर्म एक शांति, प्रेम, सद्भाव तथा मानवता की रक्षा करने वाले धर्म के रूप में पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाता रहा…

तेरे बिन

-रवि कुमार छवि- तू मोहब्बत है मेरी, तू मेरी संगिनी है। तू इमारत का वो हिस्सा है, जिस पर मेरे ख्वाब टिकते हैं। तू वो आशियाना है, जहां मेरी उम्मीदें रहती है। तेरी मुस्कराहटें, मेरी आवारगी है। तेरी खामोशी, मेरी…

तीन भागों में विभक्त ईराक

-फख़रे आलम- ईराक के क्षेत्रफल का चालीस प्रतिशत भाग दौलत-ए इस्लामिया की ईराक व शाम अर्थात् आईएसआईएस के अधिकार क्षेत्र में है और इस संगठन के प्रमुख अबुबकर अल बगदादी ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में अपने शासन का ऐलान…

या खुदा कैसा ये वक्त है

-जावेद उस्मानी- हर सिम्त चलते खंज़र, कैसा है खूनी मंज़र हर दिल पे ज़ख्मेकारी, हर आंख में समंदर दहशती कहकहे पर रक्स करती वसूलों की लाशें इस दश्तेखौफ़ में, अमन को कहां जा के तलाशें दम घुटता है इंसानियत का,…

‘महर्षि दयानन्द सरस्वती को चार वेद कब, कहां, कैसे व किससे प्राप्त हुए?’

-मनमोहन कुमार आर्य- हर अध्येता व स्वाध्याय करने वाले को सभी शंकाओं व प्रश्नों के उत्तर सरलता से प्राप्त नहीं होते, परन्तु प्रयास व पुरूषार्थ करने से कुछ के उत्तर मिल जाते हैं और अन्यों के बारे में अनुमान व…

जनलेवा बनता मिड-डे मील

-अरविंद जयतिलक- यह विडंबना है कि जिस मिड डे मिल योजना का लक्ष्य स्कूली बच्चों को उचित पोषण देकर उनमें शिक्षा के प्रति आकर्षण पैदा करना है, वह अब उनकी सेहत और जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। शायद ही…

सूरीनाम की धरती पर धड़कता भारत

-कविता मालवीय- खिचड़ी दाढ़ी, दो सितारा आंखों से फिसलती हुई दबी हंसी से सनी आवाज़ आई “मैं अंदर आ जाऊं गुरु जी ?” कहते हुए २० साल का युवक दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम देश के पारामारिबो शहर के भारतीय सांस्कृतिक…

सरकार पर अनुचित दबाव बनाना गलत

-सिद्धार्थ शंकर गौतम- इजराइल के गाजा पट्टी पर तेज होते हमलों के मद्देनज़र पूरी दुनिया का ध्यान इनकी तात्कालिक स्थिति पर आकृष्ट होना स्वाभाविक है किन्तु हमारे देश में विपक्ष और सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने फलस्तीन…