अभिलाषा

अभिलाषा

 अभिलाषा   हर  आँगन में उजियारा हो, तिमिर मिटे संसार का। चलो, दिवाली आज मनायें, दीया जलाकर प्यार का।   सपने हो मन में  अनंत के, हो अनंत की अभिलाषा। मन अनंत का ही भूखा हो, मन अनंत का हो प्यासा। कोई भी उपयोग नहीं,…

महाभारत – ७

महाभारत – ७

  धृतराष्ट्र फिर भी अपना ध्येय नहीं बदलता। वह प्रतिप्रश्न करता है – मेरी राजसभा भीष्म, द्रोण, कृप आदि वीर पुरुषों और ज्ञानियों से अलंकृत है। वे सभी महासमर में मेरा ही साथ देंगें। फिर मैं अपनी विजय के प्रति…

अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाय

अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाय

प्रणय विक्रम सिंह  दीपावली अर्थात आलोक का विस्तार। पराजित अमावस्या का उच्छवास, घोर अंधकार का पलायन, आलोक सुरसरि का धरती पर अवतरण है दीपावली। आकाश के अनंत नक्षत्र मंडल से धरा की मूर्तिमान स्पर्धा है दीपावली। मनुष्य की चिर आलोक…

सेव दे रहा है रतलाम को अंर्तराष्ट्रिय पहचान

सेव दे रहा है रतलाम को अंर्तराष्ट्रिय पहचान

      हिमांशु जोशी रतलाम के साथ तीन स जुडे है जो रतलाम को विशिष्ट पहचान दिलाते है। सोना, सेव , साडी। सेव सभी की पहुॅच में है ऐसा नही है कि सेव सिर्फ रतलाम मे ही बनती है परन्तु यहा की…

शुभ-लाभ नहीं होगा, चीन के अशुभ सामान से

शुभ-लाभ नहीं होगा, चीन के अशुभ सामान से

शुभ-लाभ नहीं होगा, चीन के अशुभ सामान से भारतीय परम्पराओं और शास्त्रों में केवल लाभ अर्जन करनें को ही लक्ष्य नहीं माना गया बल्कि वह लाभ शुभता के मार्ग से चल कर आया हो तो ही स्वीकार्य माना गया है.…

गहन अंधकार को भी मिटाने वाला प्रकाश पर्व: दीपावली

गहन अंधकार को भी मिटाने वाला प्रकाश पर्व: दीपावली

मृत्युंजय दीक्षित भारतीय संस्कृति पर्वों की संस्कृति है। हमारी पर्व परम्परा में पांच दिवसीय दीपावली पर्व का विशिष्ट स्थान है।दीवाली शब्द का अर्थ है “दीपों की पंक्ति, दीपों की माला।“ दीपावली का पर्व कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता…

भारत की आजादी के लिए हुई आजाद हिंद फौज की स्थापना

भारत की आजादी के लिए हुई आजाद हिंद फौज की स्थापना

21 अक्टूबर पर विशेष:- मृत्युंजय दीक्षित 21 अक्टूबर का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में एक ऐतिहासिक महत्व का दिन है। भारत के महान सपूत नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आज ही के दिन सिंगापुर में आजाद हिंद फौज की…

नई राजनीति के खिलाड़ी वरूण गांधी

नई राजनीति के खिलाड़ी वरूण गांधी

सूखे पेड़ पर बैठा पक्षी भी बुरा लगता है। यहां तक कि यात्री भी सूखे पेड़ की अपेक्षा हरे-भरे पेड़ को तलाशता है, और अपनी थकान मिटाता है। इस घटना को समझने के दो पहलू हो सकते हैं, एक तो…

कैटल क्लास की दीवाली

कैटल क्लास की दीवाली

शाम के वक्त चौपाल सज चुकी थी। रावण दहन के बाद मूर्ति विसर्जित कर लोग धीरे-धीरे चौपाल की जानिब मुखातिब हो रहे थे। दशहरा वाली सुबह ही काका ने जोखन को पूरे गांव में घूमकर मुनादि का हुक्म दे दिया…

महाभारत – ६

महाभारत – ६

यदि ज्ञान से धृतराष्ट्र का हृदय परिवर्तन संभव होता, तो विदुर के वचनों से कभी का हो गया होता। विदुरजी को यह तथ्य ज्ञात है फिर भी वे बार-बार सत्परामर्श देने से चुकते नहीं हैं। उस रात्रि में धृतराष्ट्र की…

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