प्राथमिक सेवाओं को आधुनिक बनाने वाला रेल बजट

railway

सत्यव्रत त्रिपाठी रेल को देश के विकास की रीढ़ कहा जाता है। रेलवे लगभग 14 लाख कर्मचारियों के साथ दुनिया में सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला विभाग है। यह एकमात्र ऐसा व्यवसाईक संस्थान है जिसके पास ना सिर्फ अपने माल…

विनाशकारी आतंक की योजना और शिक्षित युवा वर्ग

Aatankvaad

आतंकवाद भारत की ही नही अपितु आज विश्व की एक बड़ी समस्या बन चुका है। सही अर्थों में मानव समाज की यह बुराई मानव के दानवी स्वरूप की सनातन परंपरा का अधुनातन स्वरूप है। विश्व के पिछले दो हजार वर्ष…

मैया मोरी , मैं नहीं संसद जायौ!

school bus

हांतो रसिको! आज आपको ससंद पुराण कीआगे की कथा सुनाता हूं। संसद पुराण अनंत है। इसकी कथाएं अनंत हैं। मेरी इतनी हिम्मत कहां जो इन सात दिनों में आपके सामने पूरे संसद पुराण की कथा बांच सकूं। उसे सुनने के…

आसान है गोपनीय दस्तावेजों का चुराना ??

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प्रमोद भार्गव चोरी पकड़ने के तमाम तकनीकी व प्रौद्योगिकी प्रंबंधों के बावजूद सरकारी गोपनीय दस्तावेज कितनी आसानी से चुराकर बेचे जा सकते हैं,इसका ताजा उदाहरण पेट्रोलियम व ऊर्जा मंत्रालय से हुआ चोरी का पर्दाफाश है। इस कथित जासूसी का दायरा…

क्या आम आदमी की पहुंच में रहेगी रेल ?

railway platform

प्रमोद भार्गव भारतीय रेल विश्व का सबसे बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान है,लेकिन इस ढांचे को किसी भी स्तर पर विश्वस्तरीय नहीं माना जाता। गोया इसकी सरंचना को विश्वस्तरीय बनाने की दृष्टि से कोशिशें हैं कि देश में सुविधा संपन्न तेज गति…

अण्णा हजारे : राजनैतिक बन्दूक के खाली कारतूस से ज्यादा कुछ नहीं

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आर्थिक उदारीकरण और बाजारीकरण की नयी नीतियों के   प्रारम्भिक दौर में भी जब नरसिम्हाराव और मनमोहनसिंह की जुगलबंदी ने  देश और दुनिया के पूँजीपतियों  -कार्पोरेट घरानों के लिए ,मल्टिनेसनल कम्पनियों के लिए भूमि अधिग्रहण की शुरुआत की थी तब  भी देश  की…

हंगामा है क्यूं बरपा : भूमि आधिग्रहण बिल

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अमित राजपूत पिछली मनमोहन सरकार काजिसे संशोधित करने पर बीते दिनों से संसद से सड़क तक हंगामा मचा हुआ है, आख़िर इसकी असल वजह है क्या? ज़मीन एक ऐसा पेचीदा मामला है जिसके लिए लोग भाई-भाई का ख़ून बहा देते…

टेरेसा की असलियत पर बखेड़ा क्यों?

teresa

प्रवीण दुबे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मदर टेरेसा की सेवा के पीछे के मुख्य उद्देश्य को उजागर क्या किया कुछ कथित धर्मनिरपेक्षतावादियों के पेट में जैसे मरोड़ हो उठी। डॉ. भागवत ने कहा कि मदर…

समय से पहुंचने वाली ट्रेनें ही दे दीजिए

bullet train

हे रेलवे के नीति – नियंताओं ! हमें मंजिल पर समय से पहुंचने वाली ट्रेनें ही दे दीजिए …!! तारकेश कुमार ओझा चाचा , यह एलपी कितने बजे तक आएगी। पता नहीं बेटा, आने का राइट टेम तो 10 बजे का…

छुट्टी का हक तो बनता ही है..

vacation

शर्मा जी बहुत दिन से घूमने नहीं आ रहे थे। न सुबह, न शाम। बाकी मित्र तो ज्यादा चिन्ता नहीं करते; पर मेरा मन उनके बिना नहीं लगता। बहुत दिन हो जाएं, तो बेचैनी होने लगती है। सो मैं उनके…

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