राम मंदिर सहमति से हल की उम्मीद ?

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हालांकि पुरातत्वीय सक्षों, निर्मोही अखाडे़ और गोपाल सिंह विशारद द्वारा मंदिर के पक्षपक्ष में जो सबूत और शिलालेख अदालत में पेश किए गए थे, उनसे यह स्थापित हो रहा था कि विंध्वस ढांचे से पहले उस स्थान पर राममंदिर था। जिसे आक्रमणकारी बाबर ने हिन्दुओं को अपमानित करने की दृष्टि से शिया मुसलमान मीर बांकी को मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने का हुक्म दिया था। मस्जिद के निर्माण में चूंकि शिया मुसलमान मीर बांकी के हाथ लगे थे, इस कारण इस्लामिक कानून के मुताबिक यह शिया मुसलमानों की धरोहर था। इसकी व्यवस्था

बदलनी शुरु हो गई आगरा में यमुना की तस्बीर

Posted On by & filed under विविधा, सार्थक पहल

यमुना निर्मलीकरण से सम्बन्धित समिति के दिनांक 06.08.2009 के आवेदनपत्र पर तत्कालीन आयुक्त महोदया माननीया राधा एस. चैहान की अध्यक्षता में दिनांक 17.08.2009 को आयुक्त सभागार में एक बैठक भी आहूत हो चुकी है। इसके कुछ विन्दुओं पर कुछ कार्यवाही भी हुई थी और कई अभी भी लम्बित पड़े हैं। इस कार्य के सम्पन्न होने पर जहां भारत की स्वच्छता व हरीतिमा का पुनः दर्शन सुगम हो सकेगा वहीं आगरा शहर एक हेरिटेज सिटी की ओर भी बढ़ सकेगा।

बिना जन जागरुकता टीबी से बचाव असंभव 

Posted On by & filed under विविधा, स्‍वास्‍थ्‍य-योग

टीबी के जीवाणुओं को मारने के लिए इसका उपचार करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। टीबी के उपचार में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली दो एंटीबायोटिक्स आइसोनियाजिड और रिफाम्पिसिन हैं, और उपचार कई महीनों तक चल सकता है। सामान्य टीबी का उपचार 6-9 महीने में किया जाता है। इन छह महीनों में पहले दो महीने आइसोनियाजिड, रिफाम्पिसिन, इथाम्बुटोल और पायराजीनामाईड का उपयोग किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट की चाल

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इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्वामित्व का मामला फिर गरमाया। कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्त्व विभाग ने मन्दिर के पास काफी खुदाई कराई और १५२८ के पूर्व वहां मन्दिर होने के अनेक साक्ष्य प्राप्त किए जिसके आधार पर ३०, सितंबर २०१० को हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया जिसके अनुसार विवादित परिसर की एक तिहाई जमीन मुसलमानों को और शेष दो तिहाई जमीन हिन्दुओं को देने का आदेश पारित किया गया।

जन्मभूमि का नजराना देकर नजीर पेश करे मुस्लिम समाज

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भारतीय मुस्लिमों के समक्ष भी उच्चतम न्यायालय के समझौते के आग्रह के बाद एक बड़ा महत्वपूर्ण व एतिहासिक अवसर बनकर आया है. भारतीय मुस्लिमों को यह बात विस्मृत नहीं करना चाहिए कि बाबर (जिसके नाम पर वह बदनुमा दाग रुपी बाबरी मस्जिद थी) महज एक विदेशी आक्रमणकारी व लूटेरा था. भारतीय मुस्लिमों की रगों में बाबर का खून नहीं बल्कि उनके भारतीय (पूर्व हिन्दू) पुरखों का रक्त बहता है.

नदियों के नागरिक अधिकार

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कायापलट के बाद साबरमती की तुलना अब लंदन की टेम्स और सिंगापुर की सिंगापुर नदी से की जाने लगी है। ये दोनों नदियां कभी नालें में तब्दील हो चुकी थीं, लेकिन अब नदियों का ही रूप ग्रहण कर लिया है। साबरमाती की सफाई मुहिम के नतीजतन इसका जो कायापलट हुआ है, उसकी मिसाल विकसित देशों की सफल परियोजनाओं के बरक्ष पेश की जाने लगी है। 1152 करोड़ के रिवर फ्रंट योजना की बदौलत यह परिवर्तन संभव हुआ अब अहमदाबाद के बीचोंबीच करीब 10.5 किमी की लंबाई में बहने वाली इस नदी में साफ पानी लबालब भरा रहता है।

खुशियों के देश !

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धर्म में रूढ़ि और आडंबर को प्रचारित किया जा रहा है। जबकि खासतौर से सनातन धर्म अध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत समन्वय है, जिसे आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में कम ही परिभाषित किया जा रहा है। मानव-शरीर सरंचना के परिप्रेक्ष्य में विज्ञान की पहुंच केवल अस्थि-मज्जा के जोड़ और जैविक रसायनों के घोल तक सीमित है। जबकि मानव शरीर महज जैविक रसायनों का संगठन भर नहीं है, बल्कि उसकी अपनी मनोवैज्ञानिक एवं उससे भी इतर आध्यात्मिक सत्ता भी है, जो मानसिक स्तर पर मानवीय चेतना एवं व्यक्तित्व विकास का प्रमुख आधार तत्व है।

विश्व जल दिवस : समाधान सुझाती परंपरायें

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दुर्योग से सरकारी विज्ञापनों जल उपभोग में बचत के हमारे नुख्से अभी मुंह, बर्तन, गाङी धोते वक्त नल खुल रखने की बजाय, मग-बाल्टी और सिंचाई में मजबूत मेड़बंदी, फव्वारा व टपक बूंद पद्धति के उपयोग तक सीमित हैं। इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय नजरिया ज्यादा व्यापक है। वे मानते हैं कि पानी…ऊर्जा है और ऊर्जा…पानी। यदि पानी बचाना है तो ऊर्जा बचाओ, उपभोग घटाओ। यदि ऊर्जा बचानी है, तो पानी की बचत करना सीखो। हमें भी अपना नजरिया ज्यादा व्यापक करना होगा।

दम तोड़ती भारत की जीवित जीवनदायिनी मैया यमुना

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इसका बड़ा कारण यह है कि दिल्ली के करीब 50 फीसद इलाकों में सीवर नेटवर्क नहीं है। जल बोर्ड के सीवरेज शोधन संयंत्रों की क्षमता करीब 604 एमजीडी है, लेकिन प्रतिदिन करीब 450 एमजीडी सीवरेज शोधित हो पाता है। जल बोर्ड ने 1962 करोड़ रुपये की लागत से इंटरसेप्टर सीवर लाइन का निर्माण वर्ष 2011 में शुरू कराया था। अभी तक इसका एक पैकेज पूरा हुआ है। इसके पांच पैकेजों का काम अधूरा है। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर छोटे नालों के गंदे पानी के शोधन के लिए 14 सीवरेज शोधन संयंत्र लगाने की योजना बनी थी।

नदी जीवंतता को मिला अदालती आधार

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योगेन्द्र नाथ नसकर बनाम आयकर आयुक्त कोलकोता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था कि हिदुओं की देव प्रतिमायें न्यायाधिकार धारण करने की क्षमता रखने वाली सत्ता हैं। इसलिए समाज की आस्था और उसकी मान्यता की रक्षा करने के लिए गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति या न्यायाधिकार प्राप्त व्यक्ति के रूप मेें घोषित करने की ज़रूरत है। नदियों की जीवंतता को संवैधानिक दर्जा दिलाने के विचार और मांग की पूर्ति का संकल्प पहली बार तब सार्वजनिक हुआ, जब वर्ष 2013 के इलाहाबाद कुंभ के दौरान ’गंगा संसंद आयोजित की गई।