शहरी कांक्रीट में भटकते जंगली जानवर

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जावेद अनीस ऐसा लगता है कि अपनी रिहाईश को लेकर  इंसान और जंगली जानवरों के बीच जंग सी छिड़ी हुई है. जंगल नष्ट हो रहे हैं और वहां रहने वाले शेर चीते और तेंदुए जैसे शानदार जानवर कंक्रीट के आधुनिक जंगलों में बौखलाए हुए भटक रहे हैं. उनके लिए जंगल और शहर के बीच का… Read more »

खादी ,गांधी और मोदी

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मृत्युंजय दीक्षित ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आजकल भाजपा व संघविरोधी मानसिकता वाले राजनैतिक दलों व मोदी विरोधियों के पास बहस के लिए कोई विषय नहीं रह गया है यही कारण है कि वह आजकल खाली समय के विषयांे पर ही बहस करते हुए और उन्हीं मुददों के सहारे केंद्र की भाजपा सरकार व… Read more »

जजों की नियुक्ति का विकल्प तलाशना महत्वपूर्ण

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संवैधानिक देश के लिए यह नितान्त महत्वपूर्ण तथ्य होता है कि वहां के नागरिकों को ऐसी सुविधाएं नसीब हो, जिससे उन्हें अपना सामाजिक और आर्थिक जीवन में रूकावट न हो. देश के लोगों को भारतीय संविधान के द्वारा कुछ अधिकार दिये गए है जिसकी रक्षा करना हमारे संवैधानिक तंत्र की जिम्मेदारी बनती है। आज देश… Read more »

पटना  नाव हादसा : प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा

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सरकारी दावा २१ मौतें परन्तु अपनों को तलाशते घाट पर मौजूद लापता लोगों के परिजनों को देख कर कहा जा सकता है कि मृतकों की संख्या इससे हो सकती है बहुत ज्यादा l नीतीश सरकार के आपदा प्रबंधन की एक बार फिर खुली पोल , NDRF के बाद पहुँचा जिला – प्रशासन, प्रकाश-पर्व उत्सव के इंतजामातों की कुछ ज्यादा ही हो… Read more »

सर्वधर्म समागम : समय की पुकार

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तनवीर जाफ़री भारतवर्ष दुनिया का एक ऐसा देश है जहां धर्म और अध्यात्म पर सबसे अधिक चर्चा की जाती है। जितने अधिक धर्मगुरू,उपदेशक,धर्म प्रचारक, धर्मस्थान आदि हमारे देश में पाए जाते हैं विश्व में कहीं भी नहीं पाए जाते। मज़े की बात तो यह है कि इन धर्मोपदेशकों व प्रवचन कर्ताओं में सभी एक ही… Read more »

सार्वभौमिक-समन्वित भारतीय हिन्दू संस्कृति

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दूसरों को दुख देना सबसे बड़ा अधर्म है एवं दूसरों को सुख देना सबसे बड़ा धर्म है । यही हिन्दू की भी परिभाषा है। कोई व्यक्ति किसी भी भगवान को मानते हुए एवं न मानते हुए हिन्दू बना रह सकता है। हिन्दू की परिभाषा को धर्म से अलग नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि भारत में हिन्दू की परिभाषा में सिख, बौद्ध, जैन, आर्यसमाजी व सनातनी इत्यादि आते हैं। हिन्दू की संताने यदि इनमें से कोई भी अन्य पंथ अपना भी लेती हैं तो उसमें कोई बुराई नहीं समझी जाती एवं इनमें रोटी बेटी का व्यवहार सामान्य माना जाता है।

सेना की साख में सुराख होना चिन्तनीय

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ना की साख में यह पहला सुराख नहीं है। समय-समय पर अनेक सुराख कभी भ्रष्टाचार के नाम पर, कभी सेवाओं में धांधली के नाम पर, कभी घटिया साधन-सामग्री के नाम पर, कभी राजनीतिक स्वार्थों के नाम पर होते रहे हैं। एक बार नहीं कई बार सुराख हो चुके हैं। कभी जीप घोटाला तो कभी घटिया कम्बल खरीदने पर खूब विवाद हुआ था। कभी बोफोर्स तोप खरीद घोटाला तो कभी ताबूत खरीद में हेराफेरी के मामले उछलते रहे हैं। दाल खरीद में घोटाला हुआ तो दूध पाउडर घोटाला, अंडा घोटाला, घटिया जूतों की खरीद घोटाला भी चर्चित हुआ।

एक हुतात्मा दुला भट्टी जिसकी स्मृति में मनायी जाती है लोहड़ी

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  नवमुस्लिमों  का हिन्दू प्रेम इतिहास में ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जब किसी कारण से या किसी परिस्थितिवश कोई व्यक्ति यदि मुसलमान बन भी गया तो भी उसने हिंदू संस्कारों का और हिंदू संस्कृति का हृदय से बहिष्कार नही किया। इसके विपरीत वह अपने पूर्व संस्कारों के अनुसार अपने धर्मबंधुओं के प्रति सहयोगी और सदभावी… Read more »

बचपन मुस्कुराने से महरूम न हो जाए

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– ललित गर्ग – इन दिनों बन रहे समाज में बच्चों की स्कूल जाने की उम्र लगातार घटती जा रही है, बच्चों के खेलने की उम्र को पढ़ाई-लिखाई में झोंका जा रहा है, उन पर तरह-तरह के स्कूली दबाव डाले जा रहे हैं। अभिभावकों की यह एक तरह की अफण्डता है जो स्टेटस सिम्बल के… Read more »

अनुशासन की आड़ में कहीं शोषण तो नहीं

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भ्रष्टाचार जिसकी जड़ें इस देश को भीतर से खोखला कर रही हैं उससे यह देश कैसे लड़ेगा ? यह बात सही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काफी अरसे बाद इस देश के बच्चे बूढ़े जवान तक में एक उम्मीद जगाई है। इस देश का आम आदमी भ्रष्टाचार और सिस्टम के आगे हार कर उसे… Read more »