राष्ट्रीय विकास में युवाओं की भूमिका सुनिश्चित करता भारत का युवा कौशल विकास मिशन

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आजकल देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों तथा सभी व्यावसायिक व तकनीकी स्कूलों और पोलिटेक्निक व अन्य व्यावसायिक कॉलेजों में युवा कौशल विकास के लिए अध्ययन प्रवर्तन उद्यमों से लेकर अनेक औपचारिक एवम् अनौपचारिक प्रशिक्षणों द्वारा स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए ई-लर्निंग और वेब-आधारित तथा दूरस्थ अध्ययन आधारित कौशल विकास प्रशिक्षणों की सुविधाएं दी जा रही हैं।

जीएसटी-मोदी सरकार के तीन वर्षो की बड़ी कामयाबी

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बात जीएसटी की आवश्यकता क्यों पड़ी ? इसकी की जाये तो विभिन्न राज्यों के बीच जिस तरह टैक्स में असंतुलन आ गया था, उससे निपटने के लिए जीएसटी आवश्यक हो गया था। इसके लागू होने से उत्पाद शुल्क, सेवा कर, राज्य वैट, मनोरंजन कर, प्रवेश शुल्क, लग्जरी टैक्स जैसे तमाम टैक्स समाप्त हो जाएंगे। इस समय देश में केंद्र और राज्यों के आठ से दस अप्रत्यक्ष कर सेस है, जीएसटी लागू होने के बाद ये खत्म हो जाएंगे और इसका मतलब है कि दोहरे कराधान से सबको निताज मिल जायेगी। इ

डिजिटल भुगतान की अनिवार्यता के सबब

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-ललित गर्ग – विमुद्रीकरण के बाद डिजिटल भुगतान प्रणाली और कैशलेस अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लोगों ने स्वागत किया है। लेकिन डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए महीने में चार बार से अधिक नकदी लेन-देन पर शुल्क की व्यवस्था जनता की परेशानियां बढ़ायेगा, उन पर… Read more »

बजट 2017 : सशक्त वित्तीय अनुशासन का सन्देश

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 ललित गर्ग – बजट हर वर्ष आता है। अनेक विचारधाराओं वाले वित्तमंत्रियों ने विगत में कई बजट प्रस्तुत किए। पर हर बजट लोगों की मुसीबतें बढ़ाकर ही जाता है। लेकिन इस बार बजट ने नयी परम्परा के साथ राहत की सांसें दी है। इस बजट में कृषि, डेयरी, शिक्षा, कौशल विकास, रेलवे और अन्य बुनियादी… Read more »

भारत की ईंधन आपूर्ति की दूसरों पर निर्भरता कितनी सार्थक है ?

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत के लिए यह एक अच्‍छी बात है कि जब से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने हैं, विश्‍व स्‍तर पर देश पूर्व की अपेक्षा ओर अधिक शक्‍ति सम्‍पन्‍नता की दृष्‍टि से देखा जाने लगा है। विदेशी मुल्‍कों से जो अनुबंध इन दिनों हुए भी हैं तो वे ज्‍यादातर भारत के पक्ष… Read more »

तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए

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बहरहाल, हंगामा खड़ा कर रहे राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों से एक प्रश्न यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने खादी और गांधी के विचार के लिए अब तक क्या किया है? जो लोग गांधीजी के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पर संदेह कर रहे हैं, उन्हें ध्यान करना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे अधिक प्रचारित ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को महात्मा गांधी को ही समर्पित किया है। इस अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए गांधीजी के चित्र और उसके प्रतीकों का ही उपयोग किया जाता है।

नोटबन्दी : क्या खोया-क्या पाया?

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वीरेन्द्र सिंह परिहार मोदी सरकार द्वारा 8 नवम्बर से 1,000 एवं 500 रू. पर लागू #नोटबंदी की अवधि 30 दिसम्बर को समाप्त हो चुकी है। नोटबंदी के विरोध में जब विरोधी दलों ने तमाम तरह की कटु आलोचना करना शुरू कर दिया और सड़को पर उतरने लगे। तब प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से कहा कि… Read more »

नोटबंदी की असली परीक्षा व परिणाम 2017 में

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मृत्युंजय दीक्षित विगत 8 नवंबर 206 को पीएम मोदी ने अचानक से देश को संबोधित करते हुए 500 व हजार के नोट बंद कर देने और कालेधन ,आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐतहासिक जंग का ऐलान किया था। पीएम मोदी ने इस महाअभियान में जनता से 50 दिन का सहयोग मांगा था जो अब पूरा… Read more »

प्रधानमंत्री से रक्षा बजट पर देश को उम्‍मीदें

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हाल ही में आई शोध फर्म आइएचएस मार्किट की जेन्स डिफेंस बजट्स रिपोर्ट 2016 बताती है कि रक्षा पर खर्च करने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों में अमेरिका, चीन और ब्रिटेन के बाद भारत का चौथा स्थान है। इस साल भारत का रक्षा बजट 50.7 अरब डॉलर (करीब 3.41 लाख करोड़ रुपये) है। जबकि पिछले साल यह 46.6 अरब डॉलर था। इस रिपोर्ट के आंकड़े देखकर एक बात की संतुष्‍ट‍ि तो है कि केंद्र में सत्‍ता परिवर्तन का लाभ सामरिक मामले में भी हुआ है

‘मेरा भारत महान’, जहाँका ‘जनजन बेईमान’

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इस देश के रग-रग में भ्रष्टता है, चाहे वो नोट बंदी में चीखे या न चीखे। मुझे बस एक ही ईमानदार दिखाई दे रहा है। इस कुरुक्षेत्र में वो प्रधान सेवक है, वो बर्बरीक है, जिसने अपने ही हाथों अपनी गर्दन काटकर (भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेकर) खूब तमाशा देख व दिखा रहा है। उस बर्बरीक ने सबको नंगा करके रख दिया है । अपनों को,गैरों को, मुझको, आपको और सबको।हम यदि उसको सहयोग ना कर सके तो कमसे कम हो-हल्ला करने वालों को रोकने-टोकने वा जनता में उसके सही मैसेज को पहुंचाने का काम तो कर ही सकते हैं।