विलुप्त होती जा रही नैतिकता और मानवता

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डा. राधेश्याम द्विवेदी आज का मानव कहने को और भौतिक रुप में दिखने को बहुत ही आधुनिक तथा सम्पन्न हो गया है, परन्तु आन्तरिक रुप में वह बहुत ही खोखला और टूट सा गया है। उसमें सहनशीलता खत्म सी हो गयी है. दूसरों के अन्धानुकरण ने विश्व को बरबादी के कागार पर लाकर खड़ा कर… Read more »

बेटी ने बदला परिवार का जीवन

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पवन वैष्णव किसानों का देश कहा जाने वाला भारत, जहाँ देश का अन्नदाता आज खुद अन्न को तरस रहा है और बदहाल जीवन जी रहा है। बीते कुछ दिनों में किसानों की आत्महत्या के बहुत से मामले सामने आए हैं। किसानों की आत्महत्या की अहम वजह उनका बढ़ता कर्ज़, गरीबी और भुखमरी है। एक ओर… Read more »

आहार से उपजे विचार ही शिशु के व्यक्तित्व को बनाते हैं

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क्या मनुष्य केवल देह है या फिर उस देह में छिपा व्यक्तित्व? यह व्यक्तित्व क्या है और कैसे बनता है? भारत सरकार के आयुष मन्त्रालय द्वारा हाल ही में गर्भवती महिलाओं के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं जिसमें कहा गया है कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को माँस के सेवन एवं सेक्स से… Read more »

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

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पतंजलि और उसके संस्थापक श्री रामदेव की जीवनी आज के युवाओं को और प्रेरणास्पद तथा निर्विवाद लगती यदि वे स्टीव जॉब्स या मार्क जुकरबर्ग या रतन टाटा और मुकेश अंबानी जैसे कॉर्पोरेट लीडर होते। एक अतिसामान्य किसान परिवार के युवक का सामान्य आर्थिक-शैक्षिक पृष्ठभूमि को पीछे छोड़कर शिखर पर पहुंचना और उसका बहादुरी से स्वीकारना कि ब्रांडिंग और पैकेजिंग के इस युग में उसने योग की उपयुक्त ब्रांडिंग-पैकेजिंग द्वारा उक्त सफलताएँ प्राप्त की हैं, व्यक्तित्व विकास की पाठ्य पुस्तकों में स्थान पाने योग्य है।

ईद इंसानियत का पैगाम देता है 

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रोजा वास्तव में अपने गुनाहों से मुक्त होने, उससे तौबा करने, उससे डरने और मन व हृदय को शांति एवं पवित्रता देने वाला है। रोजा रखने से उसके अंदर संयम पैदा होता है, पवित्रता का अवतरण होता है और मनोकामनाओं पर काबू पाने की शक्ति पैदा होती है। एक तरह से त्याग एवं संयममय जीवन की राह पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होती है। इस लिहाज से यह रहमतों और बरकतों का महीना है।

योग से आती है मनुष्य में सकारात्मकता

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27 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अपने पहले संबोधन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की जोरदार पैरवी की थी। इस प्रस्ताव में उन्होंने 21 जून को ‘‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’’ के रूप में मान्यता दिए जाने की बात कही थी। मोदी की इस पहल का 177 देशों ने समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में इस आशय के प्रस्ताव को लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। और 11 दिसम्बर 2014 को को संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को ‘‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।

योग परम्परा की ओर लौटता समाज

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उल्लेखनीय है कि तीन बरस पहले देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अथक प्रयासों से पूरी दुनिया में भारत ने योग का परचम फहराया. संयुक्त राष्ट्रसंघ के कैलेंडर पर 21 जून भारतीय योग विद्या के लिए चिंहाकित किया गया. मोदी की पहल पर यह वह तारीख है जिस दिन भारत की प्राचीन योग परम्परा को संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्वीकार किया और 21 जून की तारीख को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी.

युवापीढ़ी की निराशा बहुत घातक हो सकती है

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देश-विदेश में तमाम संकटों से जूझ रही भारतीय आईटी कंपनियों को लग रहा है कि ऊबर का तरीका अगर वे सॉफ्टवेयर इंजिनियरों को लेकर अपना लें – उन्हें नियमित नौकरी पर रखने के बजाय प्रॉजेक्ट की जरूरतों के अनुरूप ही उनकी सेवाएं लें – तो न सिर्फ उनके स्थायी खर्चे बचेंगे, बल्कि कर्मचारियों से जुड़ी हर तरह की जिम्मेदारी से भी वे मुक्त हो जाएंगी।

शराबबंदी से बदलता महिलाओं का जीवन

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जगीना जांगड़े बिहार की ही तर्ज पर कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शराबबंदी लागु करने का निश्चय किया गया। इसका असर छत्तीसगढ़ के कई गांवो में दिखने लगा है। जिला जांजगीर चांपा का कोसिर गांव इन्ही गांव में से एक है। जहां कुछ समय पहले तक कई परिवार शराब बंदी के कारण… Read more »

बारिश  और बचपन  

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बचपन में बारिश हो और हम जैसे बच्चे घर में बैठे रहें, नामुमकिन था. किसी न किसी बहाने बाहर जाना था, बारिश की ठंडी फुहारों का आनन्द लेते हुए न जाने क्या-क्या करना था. हां, पहले से बना कर रक्खे विभिन्न साइज के कागज़ के नाव को बारिश के बहते पानी में चलाना और पानी में छप-छपाक करना सभी बच्चों का पसंदीदा शगल था.