अव्यवस्थित आंगनबाड़ी व्यवस्था

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आंगनबाड़ी में आने वाले कुछ बच्चों से बात हुई जिनके अनुसार “यहां पर बैठने की जगह अच्छी नही है। और रोज-रोज खिचड़ी या दाल चावल ही मिलता है। 26 जनवरी, 15 अगस्त के समय जलेबी, हलवा मिलता है”।

भारत के विरूद्ध सक्रिय संगठनों का वैश्विक तंत्र – ०२

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यह विडम्बना ही नहीं धूर्त्तता भी है कि जिन लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान का ककहरा-मात्रा भी नहीं मालूम है वे दलितों को आध्यात्मिक लाभ देने में लगे हुए हैं और इस तथाकथित लाभ के नाम पर उनके गले में गुलामी का फंदा डालने वाले वे लोग उस फंदे को ही मुक्ति का माध्यम व स्वयं को मुक्तिदाता भी बता रहे हैं । इतना ही नहीं, इसकी पूरी अनुकूलता नहीं मिल पाने के कारण वे भारत के कानून-व्यवस्था को धार्मिक स्वतंत्रता का उत्पीडक बताते हुए इसके विरूद्ध अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग भी कर रहे हैं ।

सकारात्मकता के लिए आनंद मंत्रालय

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प्रमोद भार्गव आज पूरे देश में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। हर वर्ग, जाति उम्र और धर्म का व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। इसके कारणों में पढ़ाई, होड़, भविष्य निर्माण, एकाकीपन, ईश्र्या व विद्वेष माने जा रहे हैं। व्यक्ति आत्महंता न बने, इस दृष्टि से मध्य-प्रदेश सरकार ने एक अनूठी पहल कर दी है। आनंद उत्सव… Read more »

सार्वभौमिक-समन्वित भारतीय हिन्दू संस्कृति

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दूसरों को दुख देना सबसे बड़ा अधर्म है एवं दूसरों को सुख देना सबसे बड़ा धर्म है । यही हिन्दू की भी परिभाषा है। कोई व्यक्ति किसी भी भगवान को मानते हुए एवं न मानते हुए हिन्दू बना रह सकता है। हिन्दू की परिभाषा को धर्म से अलग नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि भारत में हिन्दू की परिभाषा में सिख, बौद्ध, जैन, आर्यसमाजी व सनातनी इत्यादि आते हैं। हिन्दू की संताने यदि इनमें से कोई भी अन्य पंथ अपना भी लेती हैं तो उसमें कोई बुराई नहीं समझी जाती एवं इनमें रोटी बेटी का व्यवहार सामान्य माना जाता है।

युवा, रफ्तार और सड़क दुर्घटनाएं

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दीपक तले अंधेरे की तर्ज पर प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देष्य से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सम्पूर्ण भारत में  का बुलावा होता है, इस बार भी हो रहा है, लेकिन समझने योग्य और विमर्श का मुद्वा यह है, कि इन कोशिशों के बावजूद सड़क दुर्घटनाएं है, कि कम होने का… Read more »

प्राचीन सेक्स परम्पराओं से जन्मी फ्री सेक्स ट्रेडिशन

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-अनिल अनूप सेक्स शब्द सुनते ही आम आदमी थोड़ा शर्मा जाता है, क्यों शर्मा जाता है? क्योंकि हमारे समाज ने हमें यही सिखाया है। सेक्स शब्द से शादी और पति-पत्नी जुड़ चुके हैं और इससे इतर हटकर शायद आप नहीं सोच पाते। अगर सोचते भी हैं तो कहीं न कहीं आपके मन में एक अपराधबोध… Read more »

ग़लती किसकी?

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निकहत प्रवीन नए साल के अवसर पर बैंगलोर में होने वाली रेप की घटना ने एक बार फिर देश के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निश्चित रुप से ये सवाल स्वाभाविक हैं क्योंकि इस बार घटना एक ऐसे शहर में हुई हैं जों महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। कारणवश चर्चा… Read more »

युवा भारत हेतु प्रेरणा स्त्रोत: शिकागो संभाषण

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सम्पूर्ण विश्व भर की अपेक्षा हम भारतीय युवाओं हेतु ईश्वर कितना कृपालु है यह केवल इस बात से समझा जा सकता है कि ईश्वर ने हमें प्रेरणा देनें हेतु भारत भू पर स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को जन्म दिया !! आज जबकि एतिहासिक दृष्टि से और वैश्विक दृष्टि से देखने पर हमें पता चलता है… Read more »

भारत में सेवा और सार्वजनिक सम्पत्ति…..

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-अनिल अनूप सेवा और धर्मान्तरण बहुत लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है. लेकिन स्वयं सेवा और सर्वजन हिताय सामूहिक प्रयास की प्रेरणा का होना या न होना किसी के लिए मुद्दा नहीं है. मुझे लगता है कि सेवा से धर्मान्तरण को जोड़कर देखने के बजाय भारतीय समाज में सेवा की धारणा के न… Read more »

स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लें युवा

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राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी पर विशेष -डॊ.सौरभ मालवीय युवा शक्ति देश और समाज की रीढ़ होती है. युवा देश और समाज को नए शिखर पर ले जाते हैं. युवा देश का वर्तमान हैं, तो भूतकाल और भविष्य के सेतु भी हैं. युवा देश और समाज के जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं.  युवा गहन ऊर्जा… Read more »