परिवार को पतन की पराकाष्ठा न बनने दे

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ललित गर्ग वर्तमान दौर की एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि पारिवारिक परिवेश पतन की चरम पराकाष्ठा को छू रहा है। अब तक अनेक नववधुएँ सास की प्रताड़ना एवं हिंसा से तंग आकर भाग जाती थी या आत्महत्याएँ कर बैठती थी वहीं अब नववधुओं की प्रताड़ना एवं हिंसा से सास उत्पीड़ित है, परेशान है। वे… Read more »

कभी इन असली जंगलियों से भी मिलिए

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बांस, बहेड़ा, टीम, गांभरी, सेब, गुलमोहर, आम, बरगद… जादव द्वारा लगाये वृक्षों की सूची विविध और इतनी लंबी है कि आप हम पढ़ते-पढ़ते भले ही थक जायें; श्री जादव इन्हे लगाते-पालते-पोषते अभी भी नहीं थके हैं। उनकी सुबह आज भी तीन बजे शुरु होती है। यूं श्री जादव अभी भी दूध बेचते हैं, पर अब वह साधारण दूध विक्रेता नहीं हैं। मवेशी इनकी रोजी-रोटी भी हैं और इनके वृक्षारोपण को मिलने वाली खाद का स्त्रोत भी। पिछले 35 वर्षों मंे राॅयल बंगाल टाइगरों ने उनकी 85 गायों, 95 भैंसों और 10 सुअरों का शिकार किया है; बावजूद इसके जादव को टाइगर सबसे प्रिय हैं। अगस्त, 2012 में एक गैंडे का शिकार होने पर श्री जादव और उनके सबसे छोटे बेटे ने कई दिन तक खाना नहीं खाया।

पानी के लिए हथियार नहीं, हाथ बढ़ाइए

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एक अनुमान के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष 2,600 से 3,500 घन किलो मीटर के बीच जल की वास्तविक खपत है। मनुष्य को जिंदा रहने के लिए प्रतिवर्ष एक घन मीटर पीने का पानी चाहिए, परन्तु समस्त घरेलू कार्यों को मिलाकर प्रतिव्यक्ति प्रतिवर्ष 30 घन मीटर जल की आवश्यकता होती है। विश्व जल की खुल खपत 6 फीसदी हिस्सा घरेलू कार्यों में प्रयुक्त होता है। कृषि कार्यों में 73 प्रतिशत जल और उद्योगों में 21 प्रतिशत जल की खपत होती है।

योगीराज का लाॅगइन ‘विकास’ है तो पासवर्ड ‘हिंदुत्व’।

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भारत में तब
सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे।
रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी
खोज करवा कर स्थापित किया। विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन
धर्म को बचाया। गौर से देखें थे विक्रमादित्य और आज के ‘योग्यादित्य’ के
समय की परिस्थितियां एक जैसी हैं

बदलाव के लिए तैयार हो जाओ

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फौज़िया रहमान खान   “बदलाव के लिए तैयार हो जाओ” इस नारे के साथ कुछ समय पहले देश भर में विश्व महिला दिवस का आयोजन किया गया। परंतु महत्वपूर्ण बात यह है कि बदलाव की प्रक्रिया तब तक पूरी नही हो सकती जब तक शिक्षा उसके साथ जुड़ न जाए। इस सिलसिले में जेंडर और… Read more »

इस्लाम,संगीत,फ़तवा और फ़तवेबाज़

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तनवीर जाफ़री इस्लाम धर्म से संगीत के क्या रिश्ते हैं,रिश्ते हैं भी या नहीं यह बहस काफी पुरानी है। निश्चित रूप से इस्लाम धर्म का ही एक वर्ग संगीत को इस्लाम विरोधी बताता है। परंतु इस्लाम के ही अनेक वर्ग या फिरके ऐसे भी हैं जो संगीत अथवा संगीत से संबंधित धुनों के प्रति अपना… Read more »

जीवन की राहः शांति की चाह

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शांति केवल शब्द भर नहीं है, यह जीवन का अहम् हिस्सा है। शांति की इच्छा जहां भी, जब भी, जिसके द्वारा भी होगी पवित्र उद्देश्य और आचरण भी साथ होगा। शांति की साधना वह मुकाम है जहां मन, इन्द्रियां और कषाय तपकर एकाग्र और संयमित हो जाते हैं। जिंदगी से जुड़ी समस्याओं और सवालों का समाधान सामने खड़ा दिखता है तब व्यक्ति बदलता है बाहर से भी और भीतर से भी क्योंकि बदलना ही शांति की इच्छा का पहला सोपान है और बदलना या बदलाव ही शांति के संकल्पों की बुनियाद भी है।

नैतिक मूल्यों का असल जीवन में महत्व   

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हर रोज जन्दगी कुछ पुरानी, नयी उम्मीदें एवं नया रूप दिखाती हैं, कुछ चीजों को हम ध्यानित करते हैं, एवं कुछ चीजों को भूल जाते हैं। कुछ अच्छाईयां, बुराईया हमें एक नया रास्ता बताती हैं। अब हम इस मोड़ पर क्या नया कदम चुनेगे, यह आपका दिल और दिमाग ही बता पायेगा । हमें हमेशा लगनपूर्वक सामाजिक, सांसारिक जिमेवारी निभाते हुए कुछ अलग करने की साहस रखना होगा । यह तभी सम्भव हैं, जब हर इंसान अपनी नैतिक मूल्यों का सही मूल्यांकन अपने सहासिक कदमो से इस धरती पर गौरवान्वित करें।

वीरव्रत

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कल्पना से परे है कि अध्ययन में कुशाग्र, हर ओर से समाज की बराबरी करने के बाद भी समाज ने उनसे भेदभाव किया। लेकिन लगातार प्रताड़ित होने के बाद भी उन्होंने संघर्ष नहीं छोड़ा। विधि, अर्थशास्त्र व राजनीति शास्त्र में अध्ययन, कोलंबिया वि.वि. और लंदन स्कूल आॅफ इकाॅनोमिक्स से कई डाक्टरेट डिग्रियां लीं। कुल 32 डिग्रियां बाबासाहेब ने प्राप्त कीं। जीवन भर समाज के दलित, पिछड़े और शोषित वर्ग की आवाज बने रहे। उन्होंने अपने समाज को शैक्षिक, आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक आदि रूपों में समान करने का अथक प्रयास किया। मृत्यु के 34 वर्ष उपरान्त 1990 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

कट्टरपंथ की बुरी नजर से कला-संस्कृति को बचाना होगा

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लोकेन्द्र सिंह असम के 46 मौलवियों की कट्टरपंथी सोच को 16 वर्षीय गायिका नाहिद आफरीन ने करारा जवाब दिया है। नाहिद ने कहा है कि खुदा ने उसे गायिका का हुनर दिया है, संगीत की अनदेखी करना मतलब खुदा की अनदेखी होगा। वह मरते दम तक संगीत से जुड़ी रहेंगी और वह किसी फतवे से… Read more »