महाशिवरात्रि 2017 पर बने हैं ये विशेष योग —

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–,हमारे देश में सभी त्योहार बड़ी धूम धाम से मनाए जाते है। फिर वह चाहे दिवाली हो, होली हो या महाशिवरात्रि। आगामी 24 फरवरी 2017 को महाशिवरात्रि है। ऐसे में सभी श्रद्धालू धूम धाम से शिवरात्रि की तैयारी में लगे हुए है। देशभर के सभी शिव मंदिरों में धूम मची हुई है। विशेष बात यह… Read more »

ऋक्सूक्ति रत्नाकर वैदिक साहित्य का एक प्रमुख महनीय ग्रन्थ

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मनमोहन कुमार आर्य वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तक है। वेद का पढ़ना पढ़ाना और सुनना सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है। यह वाक्य सभी ऋषि भक्तों व आर्यसमाज के सदस्यों के जिह्वाग्र पर विद्यमान रहता है। हम यदि चारों वेदों का अध्ययन करें तो इसके लिए कई महीनों का समय लग सकता है।… Read more »

श्रेष्ठ एवं आदर्श महापुरुष ऋषि दयानन्द

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मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द संसार के मनुष्यों व सभी ज्ञात महापुरुषों में सर्वश्रेष्ठ आदर्श महापुरुष हैं। इसके अनेक कारण एवं प्रमाण हैं जिनके आधार यह निष्कर्ष निकलता है। महाभारतकाल वर्तमान से लगभग 5,200 वर्ष पूर्व है। महाभारत काल के बाद ऐसे अनेक पुरुष व महापुरुष हुए जिनके बारे में देश व संसार के लोगों… Read more »

हम क्यों नहीं चढ़ाएं शिवलिंग पर दूध ??

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“मैं अपने धर्म की शपथ लेता हूँ, मैं इसके लिए अपनी जान दे दूंगा. लेकिन यह मेरा व्यक्तिगत मामला है. राज्य का इससे कुछ लेना-देना नहीं. राज्य का काम धर्मनिरपेक्ष कल्याण, स्वास्थ्य , संचार, आदि मामलों का ख़याल रखना है, ना कि तुम्हारे और मेरे धर्म का.” – महात्मा गाँधी आजकल सोशल मिडिया पर आयेदिन… Read more »

गृह कलह रोकेंगे ये उपाय—

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सामजिक व्यवस्था में घर-परिवार का अपना महत्व है, जहां सभी सदस्य मिल-जुलकर रहते हैं तथा एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाते हैं। परिवार में बने रिश्तों की डोर बड़ी नाजुनिवारण क होती है, एकता प्रेम और स्नेह भाव बनाए रखने के प्रयास के बावजूद कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर… Read more »

ज्योतिष में पेड़-पौधों की उपयोगिता

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पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाये रखने में वृक्षों का महत्वपूर्ण योगदान है। एक वृक्ष सौ पुत्रों से भी बढ़कर है क्योंकि वह जीवन भर अपने पालक को समान एवं निःस्वार्थ भाव से लाभ पहुंचाता रहता है। भविष्य पुराण के अनुसार संतानहीन मनुष्य द्वारा लगाया गया वृक्ष लौकिक और पारलौकिक कर्म करता है। लोमेश… Read more »

शिव का भौतिक एवं वैज्ञानिक महत्व

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प्रमोद भार्गव संपूर्ण संस्कृत वांग्मय में शिव साधु रूप में हैं। माया मोह से लगभग निर्लिप्त हैं। शिव अपने शरीर पर जो वस्तुएं धारण किए हुए हैं,उनमें भी वैभव के प्रतीक नहीं झलकते। उनके शरीर पर राख मली हुई है। जटा-जूट धारी हैं। कई सर्प उनके गले और हाथों में गहनों की तरह शोभायमान हैं।… Read more »

सन्त गुरू रविदास और आर्य समाज

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सन्त रविदास जी सन् 1377 में जन्में व सन् 1527 में मृत्यु को प्राप्त हुए। ईश्वर की कृपा से उन्हें काफी लम्बा जीवन मिला। यह उस काल में उत्पन्न हुए जब हमारे देश में अन्य कई सन्त, महात्मा, गुरू, समाज सुधारक पैदा हुए थे। गुरूनानक (जन्म 1497), तुलसीदास (जन्म 1497), स्वामी रामानन्द (जन्म 1400), सूरदास (जन्म 1478), कबीर (1440-1518), मीराबाई (जन्म 1478) आदि उनके समकालीन थे। गुरू रविदास जी के जीवन काल में देश में सन् 1395-1413 अवधि में मैहमूद नासिरउद्दीन, सन् 1414-1450 अवधि में मुहम्मद बिन सईद तथा सन् 1451 से 1526 तक लोधी वंश का शासन रहा।

मनुष्य जीवन का अन्तिम व महानतम लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति

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मनमोहन कुमार आर्य संसार में ईश्वर की बहुत चर्चा होती है। घोर अज्ञानी व्यक्ति भी ईश्वर को मानता है और परम्परा से प्राप्त ज्ञान के अनुसार ईश्वर की उपासना वा उसकी पूजा करता है, भले ही उसका वह कृत्य यथार्थ उपासना न होकर अन्धविश्वास व पाखण्डपूर्ण कृत्य ही क्यों न हो। महर्षि दयानन्द भी गुजरात… Read more »

हिन्दू धर्म के आदि रक्षक संत रैदास

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10 फर. माघ पूर्णिमा, संत रविदास जयंती पर विशेष – लगभग सवा छः सौ वर्ष पूर्व 1398 की माघ पूर्णिमा को काशी के मड़ुआडीह ग्राम में संतोख दास और कर्मा देवी के परिवार में जन्में संत रविदास यानि संत रैदास को निस्संदेह हम भारत में धर्मांतरण के विरोध में स्वर मुखर करनें वाली और स्वधर्म… Read more »