जानिए कुछ विशेष जानकारियां इन नागपंचमी (27 /28  जुलाई 2017 ) पर–

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नाग पंचमी का त्यौहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ज्योतिष के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं। इस दिन नागों की पूजा प्रधान रूप से की जाती है। शास्त्रों के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता है. श्रवण मास में नाग पंचमी होने के कारण इस मास… Read more »

‘ईश्वर विद्वानों के निकट और अविद्वानों से दूर है : ईशावास्योपनिषद’

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-मनमोहन कुमार आर्य ईशावास्योपनिषद् के नाम से विख्यात यजुर्वेद के चालीसवें अध्याय के मन्त्र क्रमांक 4 से 7 का ऋषि दयानन्दकृत व्याख्यान महत्वपूर्ण होने के कारण इस लेख के माध्यम से यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। ऋषि दीर्घतमाः। देवता ब्रह्म=स्पष्टम्। छन्द निचृत्त्रिष्टुप्। स्वर धैवतः।। कैसा मनुष्य ईश्वर का साक्षात् करता है, यह उपदेश किया है।।… Read more »

 भगवान शिव की आराधना के लिये प्रसिध्द है आगरा का कैलाश मेला

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(24 जुलाई 2017 कैलाश मेले पर विशेष आलेख) हमारे भारत देश में एक समृद्ध आध्यात्मिक और धार्मिक विरासत के साथ, कई धर्मों का पालन किया जाता है। नतीजतन धार्मिक त्योहारों की एक बड़ी संख्या को मनाया जाता है। ऐसा ही एक त्यौहार आगरा का सुप्रसिध्द कैलाश मेला है। आगरा का यह सुप्रसिध्द कैलाश मेला हर… Read more »

जानिए भगवान् शिव को श्रावण की शिवरात्रि विशेष प्रिय क्यों है?

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यूं तो सनातन धर्म में सृष्टि संहार के स्वामी श्रीरूद्र की उपासना के लिए श्रावण माह को सर्वाधिक पुण्य फलदाई माना गया है | पूरे साल सोमवार के दिन महादेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है और शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है, लेकिन महाशिवरात्रि और श्रावण शिवरात्रि… Read more »

स्वामी सत्यानन्द रचित ऋषि दयानन्द के भावपूर्ण जीवनचरित की भूमिका में प्रस्तुत महत्वपूर्ण विचार

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  मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द के प्रमुख जीवन चरितों में एक जीवन चरित है ‘श्रीमद्दयानन्द प्रकाश’। इस ग्रन्थ के लेखक हैं स्वामी सत्यानन्द जी। स्वामी दयानन्द जी के जीवन चरितों में पं. लेखराम जी रचित जीवन चरित का शीर्षस्थ स्थान है। अन्य सभी जीवन चरित उनके द्वारा संग्रहित जीवन चरित की सामग्री के आधार… Read more »

सृष्टि का उत्पत्ति, पालन व प्रलयकर्ता होने से ईश्वर ही सब मनुष्यों का उपासनीय

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य को ज्ञान की आवश्यकता होती है। यह ज्ञान वह मुख्य रूप से अपने माता-पिता व आचार्यों से प्राप्त करता है। मनुष्य अल्पज्ञ है, इस कारण समय के साथ साथ उसमें विस्मृति का होना भी होता है। माता-पिता व आचार्य अल्पज्ञ प्राणी होते हैं। अतः अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करने के… Read more »

वेद और ऋषि दयानन्द के सिद्धान्तों को अपनाकर ही देश अखण्डित, स्वतन्त्र और सुरक्षित रह सकता है

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  -मनमोहन कुमार आर्य आजकल हमारा देश इतिहास के बहुत ही खराब दौर से गुजर रहा है। कश्मीर में आतंकवाद अपनी तीव्रतम स्थिति में है जहां पाकिस्तानी और राज्य के कुछ गुमराह लोग देश की रक्षा करने वाली सेना का विरोध करते हैं और न केवल उनकी जान लेने के लिए तत्पर रहते हैं अपितु… Read more »

जानिए पितृ दोष के लक्षण,कारण एवं निवारण हेतु उपाय

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 ️ ️ ️पितृ -दोष शांति के सरल उपाय पितृ या पितृ गण कौन हैं ? आप सभी की जिज्ञासा को शांत करने के लिए  प्रस्तत हैं मेरा विनम्र प्रयास—   प्रिय पाठकों/मित्रों,  पितृ गण हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है ,क्योंकि उन्होंने कोई ना कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया है मनुष्य… Read more »

सावन की फुहार  में ‘ कजरी ‘ का महत्व 

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अशोक भाटिया सावन चल   है जो इस भीषण तपिश से राहत ही नहीं प्रदान करेगा बल्‍कि अपनी मखमली हरियाली से मन मयूर को नाचने के लिए विवश कर देगा और फिर सावन नाम आते ही ‘कजरी‘ गीतों का उनसे जुड़ जाना स्‍वाभाविक ही है। गाँवों में जब युवतियाँ सावन में पेड़ों पर झूला झूलते समय समवेत स्‍वर… Read more »

आर्यसमाज चकराता (देहरादून) व चकराता विषयक हमारे कुछ संस्मरण

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मनमोहन कुमार आर्य देहरादून में आर्यसमाज की स्थापना अक्तूबर, सन् 1880 में हुई थी जब ऋषि दयानन्द दूसरी बार देहरादून पधारे थे। देहरादून से लगभग 87 किमी. दूरी पर पर्वतीय व पर्यटक स्थल चकराता है। मसूरी की ही भांति चकराता भी पर्वतीय व वनाच्छादित होने के साथ मसूरी से अधिक ऊंचाई पर है परन्तु यह… Read more »