किसानों का कैशलेस बैंक

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शैलेन्द्र सिन्हा देश के वित्तमंत्री ने साल 2017-2018 का बजट पेश करते हुए कहा कि “डिजिटल लेनदेन से अर्थव्यवस्था को पारदर्शी बनाने और कालेधन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी”। लेकिन झारखंड के जिला दुमका के गांव सरसाजोल में स्थित सरसाजोल लैम्पस, लिमिटेड बैंक किसानो को कैशलेश पद्धति से जोड़ने के क्रम में लगभग 3… Read more »

ये गुदड़ी के लाल : मनीषा कीर

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अनिल अनूप गरीबी और मुफलिसी के बावजूद कुछ करने की चाहत रखने वाले अपनी मंजिल ढूंढ ही लेते हैं. मध्य प्रदेश के भोपाल शहर की मनीषा कीर ने ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया है. मछुआरे की बेटी मनीषा देश की नंबर वन शूटर बन गई हैं. 16 वर्षीय मनीषा के लिए नंबर वन की पायदान… Read more »

कैशलैश होते छत्तीसगढ़ के छोटे-छोटे गांव

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-प्रियंका तावड़े समय के साथ कदमताल करता छत्तीसगढ़ एक ऐसे राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुआ है जिसके लिए नवाचार करना उसके व्यवहार में शामिल हो चुका है। इसकी ताजा मिसाल है छत्तीसगढ़ राज्य का कैशलेश की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाना। आमतौर पर लोगों की सोच है कि छत्तीसगढ़… Read more »

काले धन के जड-मूल : पाश्चात्य-पद्धति के स्कूल

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काले धन के विष-वृक्ष से समाज व देश को अगर सचमुच ही मुक्त
करना है , तो इसकी पत्तियों व डालियों के ‘विमुद्रीकरण’ अथवा लेन-देन की
प्रक्रिया के ‘कम्प्युटरीकरण’ से कुछ नहीं होगा ; बल्कि इसके लिए इसके
जड-मूल अर्थात दीक्षाहीन पाश्चात्य शिक्षा-पद्धति को उखाड कर
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष-सम्पन्न भारतीय शिक्षण-पद्धति का पुनर्पोषण करना
होगा ।

जिन्दगी में नया करने की ठाने

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एक अच्छा, सफल एवं सार्थक जीवन के लिये जरूरी है अच्छी आदतें। अच्छी आदतों वालों व्यक्ति सहज ही अच्छे चरित्र वाला व्यक्ति बन जाता है। बुरी आदतों वाला व्यक्ति खुद-ब-खुद बुरे चरित्र का व्यक्ति बन जाता है। अच्छे और बुरे का मापदण्ड यह है कि जो परिणाम में अच्छा या बुरा हो, वही चीज, विचार या व्यक्ति अच्छा या बुरा होते हैं।

हिंदी का स्वाभिमान बचाने समाचार-पत्रों का शुभ संकल्प

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ह सर्वविधित है कि हिंदी के समाचार माध्यमों में अंग्रेजी शब्दों का बढ़ता प्रयोग भारतीय मानस के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषकर, हिंदी समाचार पत्रों में अंग्रेजी के शब्दों का चलन अधिक गंभीर समस्या है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि हिंदी समाचार पत्रों की भाषा से नवयुवक अपनी भाषा सुधारते थे। समाचार पत्र सूचना और अध्ययन सामग्री देने के साथ-साथ समाज को भाषा का संस्कार भी देते थे।

कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत

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भारत के लोग नयी चीजों को देर से अपनाते हैं लेकिन जब अपनाते हैं तो फिर पीछे नहीं देखते! आज देश में लगभग १०५ करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन हैं! और हर व्यक्ति धड़ल्ले से उसका प्रयोग कर रहा है! अगर पूरे जोरशोर से प्रयास किया जाये तो निश्चय ही लोग कॅश के स्थान पर कार्ड व्यवस्था को रोजमर्रा की जिंदगी का भाग बना लेंगे और एक बार जब उन्हें इसकी सुविधा की आदत पड जाएगी तो फिर देखते ही देखते भारत भी इस क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में दिखाई देगा!

अंग्रेजी और चोगा, दोनों हटें

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संघ हिंदी की बात बहुत जोर से करता रहा है लेकिन उसे पता नहीं कि हिंदी आएगी कैसे? वह नौकरानी से महारानी बनेगी कैसे? यह रास्ता डा. लोहिया ने खोला था। उन्होंने कहा था, अंग्रेजी हटाओ। सिर्फ हटाओ, मिटाओ नहीं। संघ अभी तक हिंदी की लड़ाई खाली हाथ लड़ रहा था। कोठारी ने उसके हाथ में ब्रह्मास्त्र दे दिया है। देखें, जावड़ेकर क्या करते हैं? वे टीवी या सिनेमा के पर्दे से उतरकर मंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठे हैं। वे जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं। एक पत्रकार-परिवार के वारिस हैं। वे जरुर कुछ हिम्मत दिखाएंगे।

औद्योगिक नीतियों में हम केंद्र के पूरक – शिवराज सिंह चौहान

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विशेष बात यह है कि मध्यप्रदेश पहला ऐसा राज्य है, जिसने Analog Semiconductor Fabrication नीति जारी की है। आज राज्य भर में Electronic Manufacturing Cluster विकसित किये जा रहे हैं, ताकि आने वाली इकाइयों को अत्याधुनिक आधारभूत ढाँचा प्रदान किया जा सके। इसके अतिरिक्त राज्य की आईटी नीति और Analog Semiconductor Fabrication नीति के तहत वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किये जा रहे हैं।

अविरल और निर्मल गंगा

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गंगा को सुधारना है, तो राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामाजिक जागरूकता, विशेषज्ञों द्वारा निर्मित समयबद्ध योजना, कठोर कानून और उनका पालन, धर्म, विज्ञान और वर्तमान जनसंख्या की जरूरतों में व्यावहारिक समन्वय जैसे मुद्दों पर एक साथ काम करना होगा, तब जाकर जगत कल्याणी मां गंगा स्नान और ध्यान, वंदन और आचमन के योग्य बन सकेगी।