‘मांसाहार से नाना दुखों, रोग व अल्पायु की प्राप्ती

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मांसाहार छोड़िये और शाकाहार अपनाईये क्योंकि शाकाहारी भोजन ही सर्वोत्कृष्ट भोजन है। यह बल, आयु और सुखों का वर्धक है। इससे परजन्म में उन्नति होने से इस जन्म से भी अच्छा मनुष्य जीवन मिलने की सम्भावना है। मनुष्य शाकाहारी प्राणी है, इसका एक प्राण भी दे देते हैं। सभी शाकाहारी पशु मांसाहारियों पशुओं की गन्ध व आहट से ही दूर भाग जाते हैं परन्तु वही पशु मनुष्य को देखकर उसके पास आते हैं।

जानिए आपकी राशि अनुसार आपका भोजन ..???

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सभी खाद्य पदार्थ चाहे वे किसी भी रूप-स्वरूप में हों जैसे तरल खाद्य पदार्थ, अनाज, दाले, फल, सब्जियाँ, मेवे इत्यादि भी अपने-अपने गुणों व स्वादों के अनुसार किसी न किसी ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। आप ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ फल को कुछ खाकर शुभ फल में बदल सकते हैं। क्या सचमुच ऐसा हो सकता है? कहते हैं कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा बनेगा मन।

हानिकारक रसायनों पर सजग हो सरकार

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पोटेशियम ब्रोमेट एक ऐसा रसायन है, जिसके कारण इंसान में पेट का कैंसर, गुरदे में ट्युमर, थायोराइड संबंधी असंतुलन तथा तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियां होने की संभावना रहती है। इसे कैंसर संभावित रसायनों की 2बी श्रेणी में रखा गया है। पोटेशियम आयोडेट से थायोरायड संबंधी असंतुलन पैदा होने का खतरा होता है; बावजूद इन ज्ञात… Read more »

मौत का व्यापार है जहरीली शराब का खेल

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सुरेश हिंदुस्थानी भारत में कानून का सही तरीके पालन हो जाए तो कई समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाएंगी। लेकिन हमारे देश में राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव के कारण समस्याएं बढ़ती ही जा रही हैं। राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार ही इन समस्याओं के बढ़ाने में सहायक होता है। हम जानते हैं… Read more »

जैविक कृषि : कृषि विचार मन्थन से अमृत तत्व

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किसी भी कार्य की दिशा में बढाया गया प्रथम कदम सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि प्रथम कदम मार्ग को प्रशस्त करता है। समय तथा हमारा जीवन हमसे अपेक्षा करता है कि हम स्वयं का ध्यान रखें तथा ध्यान हम तभी रख सकते हैं जब हमारा आहार शुध्द हो एवं शुध्द आहार के लिए कृषि… Read more »

मंहगाईः कभी ‘डायन’, कभी ‘डाॅल’ जैसी

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संजय सक्सेना खाद्य पदार्थो में समय-बेसमय लगने वाला मंहगाई का ‘तड़का’ आम जनता का बजट बिगाड़ देता है। मंहगाई प्रत्यक्ष तौर पर गृहणियों की रसोई से जुड़ा मसला है, इस लिये इसका प्रभाव भी ज्यादा तीव्र गति से दिखाई देता है। चारों तरफ हाहाकार मच जाता है। मंहगाई गृहणियों और आम जनता को रूलाती हैं।… Read more »

कहां और कैसे मिले पौष्टिक आहार?

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निर्मल रानी देश के करोड़ों लोग जब देश में लंबे समय से बिक रही बहुचर्चित एवं लोकप्रिय खाद्य सामग्री मैगी खाने के आदी हो चुके थे उस समय पिछले दिनों इस समाचार ने देश में तहलका मचा दिया कि इसमें मिलाई जाने वाली लेड की अत्यधिक मात्रा उपभोक्ताओं के लिए कैंसर जैसे भयंकर रोग का… Read more »

राजस्थानी व्यंजन: जायका भी गुणवत्ता भी

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ललित गर्ग – राजस्थान को सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के समृद्ध प्रदेशों में गिना जाता है। यहां की संस्कृति जहां त्याग, बलिदान एवं शौर्य की अद्भुत दास्तान है वहीं कला, संगीत, साहित्य एवं सांस्कृतिक प्रतीकों एक विशाल सागर है। यहां संस्कृति तो गाँव-गाँव ढांणी-ढांणी, चैपाल चबूतरों, महल-प्रासादों में ही नहीं, वह तो घर-घर जन-जन में… Read more »

देशी गाय बनाम विदेशी गाय

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देशी गाय

न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने १९९३ ई. में डायबिटीज (टाइप-१), ऑटो इम्यून रोग, कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी कई बीमारियों की जड़ यूरोपियन गायों का दूध होने का दावा (हाइपोथिसिस)पेश किया है!इस दूध को वे A1 दूध कहते हैं!यूरोपियन गोवंशमें से होल्सटीन, फ्रिजियन, जर्सी, स्विसब्राउन के दूध में BCM 7 जहर होने का मुद्दा उठने के बाद… Read more »

शादियों में खाने का मज़ा..

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.मैं बचपन से ही शादी-पार्टियों में खाने का शौक़ीन रहा हूँ| बचपन में जब गाँव में रहता था तो वहां बाराती वालों के बाद गाँव-मुहल्ले को खिलाने का इंतजाम किया जाता था| जब तक काफी रात हो चुकी होती थी और मैं भी बुलावे का इंतज़ार करते-करते भूखे पेट ही सो जाता था| उस वक्त… Read more »