वरदान  

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दूसरे ही दिन आशा के पिताजी का फोन आया और फिर वे अपनी पत्नी के साथ हमारे घर आ गये। प्रारम्भिक बात के बाद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और विवाह का बजट साफ-साफ हमें बता दिया। उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी आप हमारी बेटी लेंगे, तो यह उनके लिए बहुत खुशी की बात होगी। आपके घर की बहू बनना आशा के लिए सौभाग्य की बात है। हम तो सोचते थे कि वह नर्स है, तो अस्पताल के किसी कर्मचारी से ही उसका विवाह कर देंगे; पर वह इतने अच्छे और सम्पन्न परिवार में जाएगी, यह तो हमने कभी सोचा ही नहीं था।

इतिहास से सीख (लघुकथा)

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डा. राधेश्याम द्विवेदी महाभारत के कौरव तथा पाण्डवों के बीच हुए युद्ध तथा विवाद के बारे में एक पिता पुत्र के मध्य वार्तालाप हो रही थी। पिता बार बार श्रीकृष्ण की दूरदर्शिता की सराहना कर रहे थे और पुत्र बार बार तर्क देकर श्रीकृष्ण के नाटकीय चरित्र पर उंगली उठाकर आशंका व्यक्त कर रहा था।… Read more »

आधुनिकता का गरुर

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डा. राधेश्याम द्विवेदी पापा मुझे चोट लग गया खून आ रहा है। स्कूल के लिए निकलते एक बच्चे के मुख से ये शब्द निकला था। 5 साल के अपने बच्चे के मुँह से इतना सुनते ही लगभग 40 साल पूर्व साधारण सा दिखने वाले एक पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर बच्चे को गोदी में… Read more »

खुंखार कुत्ता भीगी बिल्ली बना

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डा. राधेश्याम द्विवेदी एक बादशाह अपने खुंखार कुत्ते के साथ नाव में बैठकर यात्रा कर रहा था। उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था। उस कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। वह उछल-कूद कर रहा था और… Read more »

अजनबीपन और मासूमियत

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डा. राधे श्याम द्विवेदी एक पाँच साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर एक मंदिर में एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था । उसके कपड़े में मैले से लग रहे थे मगर वह साफ जैसा दिख रहा था। उसके नन्हें- नन्हें से गाल… Read more »

टिया और मैं

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एक मशहूर पौराणिक कथा से बात शुरु होती है। नारद मुनि को हाथ में तेल से लबालब भरा कटोरा लिए राजर्षि जनक के बाग का पूरा चक्कर लगाने को कहा गया था। शर्त थी कि तेल की एक भी बूँद छलकने नहीं पाए। मुनिवर ने सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। अब उनसे बाग का वर्णन देने को… Read more »

प्यार की गरमी

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मोहन उनकी इरादे समझ गया। वह बोलना तो नहीं चाहता था, पर आज उससे रहा नहीं गया, ‘‘हां, ठीक कहते हो। तुम्हारे स्वेटर और कोट इतने गरम हो भी नहीं सकते। चूंकि उनमें पैसों की गरमी है और मेरे स्वेटर में दीदी के प्यार की गरमी।

सब लड़कों का मुंह बंद हो गया।

लघुकथा : बचपन की पूंजी

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  घर में सब लोग साथ बैठकर खाना खा रहे थे। चार साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग सब वहां थे। मां सेब काट कर सबको दे रही थीं। जब उन्होंने चार साल के चुन्नू को भी एक फांक दी, तो वह मचलता हुआ बोला, ‘‘मैं दो सेब लूंगा।’’ मां ने चाकू… Read more »

डायल कुमार फॉर किलिंग

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“कुमार तुम्हारे कारण मेरी ज़िन्दगी खराब हुई और मैंने तुम्हें इस बात की सजा दी. एक महीने पहले उन तीनों ने मुझे जहर देकर मार डाला था और किरण ने ये इसलिए किया था ताकि वो मेरी दौलत के साथ तुमसे मिलकर जीवन जी सके. लेकिन जैसे कि कहते है कि बुरा करो तो वो वापस जरूर आता है. मेरी आत्मा भटकती रही और तुम्हारी राह देखती रही. किरण ने तुम्हें बुलाया और मैंने तुम्हारे बनाए हुए प्लान के अनुसार ही उन्हें डरा कर आत्महत्या करने पर मजबूर किया. वो हत्या भी थी और आत्महत्या भी और तुम्हें आज यहाँ तक पहुंचा दिया ! चलो जल्दी जाओ ! मैं तुम सबसे नफरत करता हूँ. तुम सब अब नरक में मिलना !”

अकबर बीरबल के मुलाकात की दो प्रमुख प्रारम्भिक कहानियां

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डा.राधेश्याम द्विवेदी पहली कहानी अकबर को शिकार का बहुत शौक था. वह किसी भी तरह शिकार के लिए समय निकल ही लेते थे. बाद में वे अपने समय के बहुत ही अच्छे घुड़सवार और शिकरी भी कहलाये. एक बार राजा अकबर शिकार के लिए निकले, घोडे पर सरपट दौड़ते हुए उन्हें पता ही नहीं चला… Read more »