टिया और मैं

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एक मशहूर पौराणिक कथा से बात शुरु होती है। नारद मुनि को हाथ में तेल से लबालब भरा कटोरा लिए राजर्षि जनक के बाग का पूरा चक्कर लगाने को कहा गया था। शर्त थी कि तेल की एक भी बूँद छलकने नहीं पाए। मुनिवर ने सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। अब उनसे बाग का वर्णन देने को… Read more »

प्यार की गरमी

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मोहन उनकी इरादे समझ गया। वह बोलना तो नहीं चाहता था, पर आज उससे रहा नहीं गया, ‘‘हां, ठीक कहते हो। तुम्हारे स्वेटर और कोट इतने गरम हो भी नहीं सकते। चूंकि उनमें पैसों की गरमी है और मेरे स्वेटर में दीदी के प्यार की गरमी।

सब लड़कों का मुंह बंद हो गया।

लघुकथा : बचपन की पूंजी

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  घर में सब लोग साथ बैठकर खाना खा रहे थे। चार साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग सब वहां थे। मां सेब काट कर सबको दे रही थीं। जब उन्होंने चार साल के चुन्नू को भी एक फांक दी, तो वह मचलता हुआ बोला, ‘‘मैं दो सेब लूंगा।’’ मां ने चाकू… Read more »

डायल कुमार फॉर किलिंग

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“कुमार तुम्हारे कारण मेरी ज़िन्दगी खराब हुई और मैंने तुम्हें इस बात की सजा दी. एक महीने पहले उन तीनों ने मुझे जहर देकर मार डाला था और किरण ने ये इसलिए किया था ताकि वो मेरी दौलत के साथ तुमसे मिलकर जीवन जी सके. लेकिन जैसे कि कहते है कि बुरा करो तो वो वापस जरूर आता है. मेरी आत्मा भटकती रही और तुम्हारी राह देखती रही. किरण ने तुम्हें बुलाया और मैंने तुम्हारे बनाए हुए प्लान के अनुसार ही उन्हें डरा कर आत्महत्या करने पर मजबूर किया. वो हत्या भी थी और आत्महत्या भी और तुम्हें आज यहाँ तक पहुंचा दिया ! चलो जल्दी जाओ ! मैं तुम सबसे नफरत करता हूँ. तुम सब अब नरक में मिलना !”

अकबर बीरबल के मुलाकात की दो प्रमुख प्रारम्भिक कहानियां

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डा.राधेश्याम द्विवेदी पहली कहानी अकबर को शिकार का बहुत शौक था. वह किसी भी तरह शिकार के लिए समय निकल ही लेते थे. बाद में वे अपने समय के बहुत ही अच्छे घुड़सवार और शिकरी भी कहलाये. एक बार राजा अकबर शिकार के लिए निकले, घोडे पर सरपट दौड़ते हुए उन्हें पता ही नहीं चला… Read more »

कैलाश

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आह ! क्या दिन है थोड़ी – थोड़ी ठंड पड़नी शुरू हो गई थी साथी संग कैलाश ठंड से ठिठक रहे थे । कैलाश अभी 10 साल का है और 7वीं कक्षा में पढ़ रहा है, इनकी दो बहने है और दो भाई है, कैलाश परिवार में सबसे छोटा है इस कारण माँ का लाड़ला… Read more »

मेन इन यूनिफ़ॉर्म

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धाँय ….धाँय ….धाँय ….. तीन गोलियां मुझे लगी ,ठीक पेट के ऊपर और मैं एक झटके से गिरा….गोली के झटके ने और जमीन की ऊंची -नीची जगह के घेरो ने मुझे तेजी से वहां पहुचाया , जिसे NO MAN’S LAND कहते है … मैं दर्द के मारे कराह उठा.. पेट पर हाथ रखा तो देखा… Read more »

सखी वे मुझसे कह कर जाते..

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“सिद्धि हेतु स्वामी गए यह गौरव की बात पर चोरी चोरी गए यही बड़ा व्याघात. सखी वे मुझसे कह कर जाते”, —‘यशोधरा’ मैथिलीशरणगुप्त. ” भाई साहिब क्या आप जल्द से जल्द इस अस्पताल में पहुँच सकते हैं?” कोकिला. मैं तो अवाक रह गया.मेरे फोन पर यह सन्देश मेरी मुंह बोली बहन कोकिला का था,पर यह… Read more »

बेबसी के आंसू

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अकाल तो दिख ही रहा था , और दूसरी ओर चुनाव कदमों में थे । मीरपुर गांव में इन दिनों विधायक के चुनाव होने वाले थे इस कारण हर जगह राजनीतिज्ञों का धूम धड़ाका हो रहा था । बरसात की ऋतु थी किन्तु इस बार अकाल ही दिख रहा था अर्थात अभी तक इन्द्र देव… Read more »

बाप जी की दुकान

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यों तो हर गांव और नगर में चौक होते हैं; पर लखनऊ के चौक की बात ही कुछ और है। यह केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि 200 साल पुराना बाजार और घनी आबादी वाला क्षेत्र भी है। इसलिए इसे ‘पुराना शहर’ भी कहते हैं। लखनऊ के प्रसिद्ध चिकन की कढ़ाई वाले कपड़े यहां सबसे अच्छे… Read more »