डिलीट गांधी –पेस्ट मोदी

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जग मोहन ठाकन खादी ग्रामोद्योग के कलेंडर –डायरी से गांधी जी की फोटो डिलीट कर मोदी जी की फोटो पेस्ट कर देने मात्र से न जाने कुछ लोगों के पेट में क्यों मरोड़े उठने लगे हैं । समय बड़ी तेज़ी से बदल रहा है । इतने लंबे अरसे तक गांधी जी को चरखे पर सूत… Read more »

चल चमेली लैन में.. 

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  कई दिन से शर्मा जी के दर्शन नहीं हो रहे थे। अतः कल मैं उनके घर चला गया; पर वे वहां भी नहीं थे। भाभी जी से पूछा, तो गुस्से में बोली, ‘‘सुबह से ‘मोदी लैन’ में लगे हैं।’’ – ये मोदी लैन क्या चीज है भाभी जी ? – वर्मा जी, आप किस… Read more »

भारत खुला, मुंह बंद

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जब से मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की है, देश के अधिकांश राजनेताओं, काले धन पर ऐश कर रहे सरकारी अधिकारियों और कारोबारियों की तरह शर्मा जी भी बहुत बेचैन हैं। वैसे शर्मा जी बहुत सज्जन आदमी हैं। उनका मन भले ही काला हो, पर काले धन से उनका कोई खास लेना-देना नहीं है। फिर… Read more »

​समय की रेत, घटनाओं के हवा महल …

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तारकेश कुमार ओझा बचपन में टेलीविजन के प र्दे पर देखे गए दो रोमांचक दृश्य भूलाए नहीं भूलते। पहला क्रेकिट का एक्शन रिप्ले और दूसरा पौराणिक दृश्यों में तीरों का टकराव। एक्शन रिप्ले का तो ऐसा होता था कि क्रिकेट की मामूली समझ रखने वाला भी उन दृश्यों को देख कर खासा रोमांचित हो जाता… Read more »

ऊ लाला! उनका रस्म उठाला

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वे जो कल तक हर किसीका सिर बड़े इतमिनान से मंूडा करते थे, मुंडे सिर जब उनको किराए की गाड़ी से सफेद कपड़ों में उतरते देखा तो पैरों तले से जमीन सरक गई। ये क्या हो गया? कब हो गया?? कैसे हो गया?? मुहल्ले में रहते हुए भी मुझे पता नहीं कि…. आखिर मैं रहता… Read more »

आ आ पा के 50 % से अधिक विधायको ने अपने “विधायक-कोष” में से एक भी पैसा ख़र्च नहीं किया

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सोशल मीडिया पर चल रहे ताज़ा ट्रेंड की माने तो आप विधायको ने इसलिए भी अपने कोष से कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं करवाया क्योंकि मार्केट में सारे नोट्स पर “सोनम गुप्ता बेवफा है “लिखा है जबकि केजरीवाल जी चाहते थे किसी भी परियोजना की शुरुवात “मोदी बेवफा है” लिखे नोट्स से होनी चाहिए।

सरकार बनने के बाद से आप विधायको पर अलग अलग अपराधों में इतने आरोप लगे है और इतने विधायक तिहाड़ जेल की हवा खा चुके है की, लगता है विधायक कोष का पैसा अपने विधानसभा क्षेत्र में खर्च करने के बजाय विधायको ने ये पैसे अपना केस लड़ने के लिए और वकील की फीस के लिए बचा रखे है।

#नोटबंदी पर रामभुलावन ने कहा, हम कितने ढीठ किस्‍म के हो गए हैं साहब !

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हम कितने ढीठ किस्‍म के हो गए हैं, वह ऐसे ही नहीं कह रहा, उसके पीछे ओर भी कई कारण है। रामभुलावन आगे बोला..मसलन लोगों ने लाइन में लगने को ही धंधा बना डाला, सरकार ने बैंक से नोट बदलने की सुविधा एटीएम का उपयोग करने वालों की तुलना में जो लोग इस का उपयोग नहीं करते हैं, उनको ध्‍यान में रखकर की थी लेकिन हुआ क्‍या ….. लोग चंद रुपयों के लालच में लाइन में लगकर काले को सफेद करने के फेर में पड़ गए। जिसके बाद मजबूरी में सरकार को 4 हजार 500 की नगद राशि परिवर्तन किए जाने के निर्णय को वापिस लेकर उसे 2 हजार रुपए करना पड़ा।

पप्पू गिरी

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खबरियों के लिए खबर थी और मनचलों के लिए सेल्फी लेने का एक मौका पप्पू महज़ ४००० हज़ार के गाँधी बैंक में बदलने जा पहुंचे ….. गाड़ियों का काफिला और अनगिनत अंग रक्षक साथ में पप्पू के पप्पियों की फौज ,ऊपर से खबरियों का झुण्ड – मधुमखियों की भांति पप्पू पर मंडरा रहा था …..
पप्पू इतरा रहे थे ….मैं इन लोगों के लिए लाइन में लगा हूँ ….. मोदी के सताए हुए हैं ये सब।

आखिर क्यों युवराज की करीबी दूरी में बदल रही है ?

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कहते है कि युवराज को कोई चीज बिना मांगे ही मिल जाती है और जब तक युवराज उस चीज की मांग करता है तब तक वे चीज उसके सामने हाजिर हो जाती है पर यहाँ तो स्थिति उल्टी ही है युवराज बेचारा हर बार कहता है कि वे अब बड़ा हो गया है और जिम्मेदारी उठा सकता है पर महारानी का पद लोभ और युवराज का अपरिपवक्क व्यवहार महारानी को उनके पद से दूर नही जाने दे रहा है और युवराज को पद के करीब नही आने दे रहा है ।

इस लाइन को देख कर मुझे ‘कालिया ’ याद आ गया….!!

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तारकेश कुमार ओझा बचपन में एक फिल्म देखी थी … कालिया। इस फिल्म का एक डॉयलॉग काफी दिनों तक मुंह पर चढ़ा रहा… हम जहां खड़े हो जाते हैं… लाइन वहीं से शुरू होती है। इस डॉयलॉग से रोमांचित होकर हम सोचते थे… इस नायक के तो बड़े मजे हैं। कमबख्त को लाइन में खड़े… Read more »