मैं जब भ्रष्ट हुआ

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वीरेन्द्र परमार मेरी नियुक्ति जब एक कमाऊ विभाग में हुई तो परिवार के लोगों और सगे – संबंधियों को आशा थी कि मैं शीघ्रातिशीघ्र भ्रष्ट बनकर राष्ट्र की मुख्यधारा में जुड़ जाऊंगा लेकिन आशा के विपरीत जब मैं एक दशक तक भ्रष्ट नहीं हुआ तो सभी ने एक स्वर से मुझे कुल कलंक घोषित कर… Read more »

खट्ठा-मीठा : भाभी से होलियाना छेड़छाड़

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ऐसे दीवाने देवरों को देखकर भाभी डर गयीं। भैया से शिकायत करने की धमकी दी। इस पर देवर और भी अधिक हो-हल्ला करने लगे। ‘भाभी, हम भैया से नहीं डरते। अगर भैया डाँटेंगे, तो उनको भी गुलाल लगा देंगे। पर हम भाभी से होली जरूर खेलेंगे।’ भाभी जानती थी कि ससुर जी से भी शिकायत करने का कोई लाभ नहीं होगा। वे तो ज्यादा से ज्यादा यही कहेंगे कि ‘लड़के हैं, लड़कों से गलतियाँ हो जाती हैं।’

आईपीएल, मनोरंजन और भारतीय दर्शन

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आईपीएल की बोली लग चुकी है, खिलाडी बिक चुके है, बस अब खेल का बिकना बाकी है। मज़मा लग चुका हैै, खिलाडी मुजरा करने को तैयार है। बाज़ारीकरण के इस दौर में “आई-पिल” और “आईपीएल” दोनों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है क्योंकि दोनों ही कम समय में “सुरक्षित” मनोरंजन सुनिश्चित करते है। विकासशील… Read more »

“लांच” होने से ज़्यादा रूचि “लंच” करने में

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इसरो ने अंतरिक्ष में 104 उपग्रह एक साथ छोड़कर उन्हें सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित कर दिया है,ये पूरे देश के लिए तो गर्व की बात है ही लेकिन मेरे लिए  यह गर्व के साथ -साथ प्रेरणास्पद बात भी है क्योंकि बचपन में अपने मम्मी-पापा के कई असफल प्रयासों के बाद भी मैं अपनी स्कूल… Read more »

नये इसरो की तलाश 

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इन दिनों हर कोई ‘इसरो’ के गुण गा रहा है। सचमुच उसने काम ही ऐसा किया है। दुनिया में आज तक कोई देश एक साथ 104 उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित नहीं कर सका है। जो लोग वैज्ञानिक सफलता के नाम पर सुबह उठते ही अमरीका और रात में सोने से पहले रूस की माला जपते हैं,… Read more »

    नेता जी के साथ एक दिन

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ये चुनाव के दिन हैं। जिसे देखो अपनी प्रशंसा और दूसरे की बुराई करने में दिन-रात एक कर रहा है। नेता लोग दूसरे की सबसे अधिक आलोचना जिस मुद्दे पर करते हैं, वह है भ्रष्टाचार। लेकिन चुनाव जीतते ही अधिकांश लोग उसी काम में लग जाते हैं, जिसकी आलोचना कर वे चुनाव जीतते हैं। कई… Read more »

मफलर के मौसम में रेनकोट

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मफलर के मौसम में रेनकोट के चर्चे है। कपड़ो का उपयोग उनकी प्रवृति के हिसाब से अब किसी मौसम विशेष तक सीमित नहीं रह गया हैै वो अपनी सीमाए लांघकर हर मौसम में “सर्जिकल- स्ट्राइक” कर अपनी निर्भरता और उपयोगिता का लौहा मनवा रहे है। यह उल्लेखनीय है की ये लोहा , “लौहपुरुष” के मार्गदर्शक… Read more »

वाद, विवाद और विकासवाद  

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सिरदर्द के अनेक कारण होते हैं। कुछ आतंरिक होते हैं, तो कुछ बाहरी। पर मेरे सिरदर्द का एक कारण हमारे पड़ोस में रहने वाला एक चंचल और बुद्धिमान बालक चिंटू भी है। उसके मेरे घर आने का मतलब ही सिरदर्द है। कल शाम को मैं टी.वी. पर समाचार सुन रहा था कि वह आ धमका।… Read more »

 मैं वोट जरूर दूंगा

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चुनाव के दिन जैसे-जैसे पास आ रहे हैं, हर कोई उसके रंग में रंगा दिख रहा है। किसी ने छत पर अपनी मनपंसद पार्टी का झंडा लगाया है, तो किसी ने सीने पर उसका बिल्ला। कुछ लोगों ने साइकिल, स्कूटर और कार पर ही अपने प्रिय प्रत्याशी को चिपका लिया है। पान की दुकान हो… Read more »

आलू और पनीर (सेल्वम्)

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दुनिया की हर भाषा में लोकजीवन में प्रचलित प्रतीकों और मुहावरों का बड़ा महत्व है। फल-सब्जी, पशु-पक्षी और व्यवहार या परम्पराओं से जुड़ी बातें साहित्य की हर विधा को समृद्ध करती दिखती हैं। अब आप आलू को ही लें। यह हर सब्जी में फिट हो जाता है। इससे नमकीन और मीठे, दोनों तरह के व्यंजन… Read more »