आहत होने की चाहत

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राजनीती, खेल, बॉलीवुड,धर्म या अन्य किसी भी क्षेत्र से जुडी कोई भी घटना हो या इन से जुड़े किसी भी सेलेब्रिटी या किसी व्यक्ति का कोई भी बयान हो वो रोज़ सोशल मीडिया की भट्टी में ईंधन रूपी कच्चे माल के रूप में झोंक दिया जाता है जो “ट्रेंड”की शक्ल में बाहर निकल कर लोगो को कोमल भावनाए आहत करने का अपना क़र्ज़ और फ़र्ज़ अदा करता है।

भगवा और हरा

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राष्ट्रीय ध्वज के शीर्ष में लगा, भगवा को आदर हमने दिया।
विदेशी हमले से ही आकरके, हरा रंग यहां फहराती है ।।
भारत का मूल स्वरूप चेतना, औ गरिमा को गिरा दिया।
हरा को बढ़ाचढ़ा करके, सभ्यता संस्कार धुलवाती है ।।4।।

मोदी विश्व का नेता बन, योगी गुरु जगत कहायेगा।।

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यूपी में ना शासन था, सब हाथ पर हाथ धरे रहे।
योगीजी के आते ही, सब द्रुत गति से बदल रहे।।
वह वक्त एक दिन आयेगा, योगी मोदी बन जाएगा।
मोदी विश्व का नेता बन, योगी गुरु जगत कहायेगा।।

कुछ  दिन तो गुजारो ;  गुजरात ( माडल ) में

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मित्रों , अब तो अमिताभ बच्चन का कहा मानकर कुछ दिन तो गुजारो गुजरात (माडल) में । हाँ , पर चीख चीख कर यू पी चुनाव में ई वी एम मशीन पर सवाल उठाने वाली मायावती जी की बात भी सुन लो, कहीं वहाँ भी गुजराती माडल का प्रयोग तो नहीं किया गया है । क्योकि गुजराती माडल देता है परीक्षा में 100 % सफलता की गारंटी

धर्म का सत्य —- विज्ञान का सत्य

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 सबसे सुन्दर और गम्भीर अनुभूतियाँ, जिनका हम अनुभव कर सकते हैं, अध्यात्म की सिहरन है। यह विज्ञान की शक्ति है। — एलबर्ट आइंस्टिन भगवान और भूत तमाम मानव सभ्यताओं में प्रारम्भ से मौजूद रहे हैं। इनके जरिए आदमी अपनी प्रासंगिकता समझता रहा है। प्राचीन सभ्यताएँ जीवों के साथ नदी, पर्वत, तथा हवा जैसी निर्जीव वस्तुओं… Read more »

मोदी राज में कितनी बदली भारतीय रेल …!!

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इस साल मार्च में होली के दौरान उत्तर प्रदेश जाने का अवसर मिला। संयोग से इसी दौरान प्रदेश में चुनावी बुखार चरम पर था।वाराणसी से इलाहाबाद जाने के लिए ट्रेन को करीब पांच घंटे इंतजार करना पड़ा। वाराणसी से ही खुलने वाली कामायिनी एक्सप्रेस इस सीमित दूरी की यात्रा में करीब घंटे भर विलंबित हो गई। वापसी में भी कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ। प्लेटफार्मों पर किसी ट्रेन की बार – बार उद्घोषणा हो रही थी, तो कुछ ट्रेनों के मामलों में उद्घोषणा कक्ष की अजीब खामोशी थी।

वरदान  

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दूसरे ही दिन आशा के पिताजी का फोन आया और फिर वे अपनी पत्नी के साथ हमारे घर आ गये। प्रारम्भिक बात के बाद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और विवाह का बजट साफ-साफ हमें बता दिया। उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी आप हमारी बेटी लेंगे, तो यह उनके लिए बहुत खुशी की बात होगी। आपके घर की बहू बनना आशा के लिए सौभाग्य की बात है। हम तो सोचते थे कि वह नर्स है, तो अस्पताल के किसी कर्मचारी से ही उसका विवाह कर देंगे; पर वह इतने अच्छे और सम्पन्न परिवार में जाएगी, यह तो हमने कभी सोचा ही नहीं था।

यकीऩ मानिए, आपके शब्द आपको महान बना देंगे

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यकीनन् यह हमें मानना ही होगा कि हम सब कुछ विशेष कार्य के निमित्त जन्में हैं. जीवन को व्यसनों, कुविचारों और अन्धकार में बिताने से तो ठीक ही है कि अपने मनो-मस्तिष्क एवं शब्दों को पवित्र रखें. हाँ कुछ लोग आज यह जरूर बोलते हैं कि अब इमानदारी का जमाना नहीं रहा. वह शायद आज यह भूल चुके हैं कि दुनियाँ को चलाने वाला सर्वशक्तिमान पहले भी वही था और आज भी वही है.

  विश्वकाव्य दिवस के अवसर पर हिन्दी के कवियों का स्मरण भी आवश्यक

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सुयश मिश्र   21 मार्च विश्वकाव्य दिवस के अवसर पर हिन्दी के एक बड़े अखबार (दैनिक भास्कर) जो कि स्वयं को देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर-1 अखबार’ घोषित करता है, ने  ‘ये हैं दुनियाँ की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रचनाएं’ शीर्षक से बड़ा समाचार प्रकाशित किया। इस समाचार में विलियमशेक्सपियर कृत ‘सानेट-18’, जानडन कृत डेथ,… Read more »

एक बार फिर …

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तुम्हारा वक्तव्य पढ़ कर (चूँकि स्त्रियाँ इस मार्ग पर आ गयी हैं इसलिये ब्रह्मचर्य चिरजीवी नहीं होगा और सद्धर्म केवल पाँच सौ वर्षों तक चलेगा.“)पहले तो मैं यह समझने का यत्न करती रही कि इसके लिये दोषी किसे मानें -स्त्रियों को, सद्धर्म में दीक्षित ब्रह्मचर्य निभानेवाले को , या मानव की स्वाभाविक वृत्तियाँ को ?