हैलो माईक टेस्टिंग , हैलो , हैलो

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चौबे जी मंद मंद मुस्काये , बोले –ठीक पकड़े है . आज की सत्ता के शिखर पर बैठे पुरोधा यही तो चाहते हैं , यही तो इनका एजेंडा है , कि वजन बढे तो केवल उनका , दूसरा कोई इनके समान वजन धारी ना हो जाए .  सुना है कि कुछ ‘शाह’ लोग ज्यादा ही वजनधारी  होने लगे थे , पर  समय रहते हमारे  पारखी ‘ग्रीन टी’  वाले की नजर पड़ गयी  और आज उनका लगभग बीस किलो वजन कम हो गया बताते हैं . वजन कम करने की तकनीक में तो ग्रीन टी का कोई सानी नहीं है . कल तक जिनकी ‘वाणी’ में अदम्य ‘जोश’ था , आज उनका इतना कम वजन हो गया है कि कोई उनका वजन तौलने तक राजी नहीं है .

क्षणजन्मा डॉक्टर हेनरी नॉर्मन बेथुन

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किताब चलते रहने का हौसला पैदा करती है, रास्ता दिखाती है और कभी कभी हमारा रास्ता रोककर खड़ी हो जाती है। — अनाम   कभी कभार ही ऐसा होता है कि आपके हाथ ऐसी किताब लग जाए जो सालों बीत जाने पर भी आपकी चेतना को संस्कार-मण्डित करती रहती है और सदा के लिए महत्वपूर्ण… Read more »

है नाट्यशाला विश्व यह !

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है नाट्यशाला विश्व यह, अभिनय अनेकों चल रहे; हैं जीव कितने पल रहे, औ मंच कितने सज रहे ! रंग रूप मन कितने विलग, नाटक जुटे खट-पट किए; पट बदलते नट नाचते, रुख़ नियन्ता लख बदलते ! उर भाँपते सुर काँपते, संसार सागर सरकते; निशि दिवस कर्मों में रसे, रचना के रस में हैं लसे… Read more »

मैं आज तेरा नाम लिख लूँ   

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  प्रेम के इक गीत पर मैं आज तेरा नाम लिख लूँ   पंछियों की चहक मीठी शहद जैसे मन में घोले कोकिला की मृदु कुहुक पर आज तेरा नाम लिख लूँ   रंग हर ऋतु का अलग है ढंग भी उसका नया है धूप के हर क़तरे पर मैं आज तेरा नाम लिख लूं… Read more »

क्योंकि  मोबाइल है…

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घड़ी पहनने की आदत छूट गई, पहले पैन साथ लेके चलते थे वो आदत भी छूट गई अब तो क्योंकि मोबाइल है……,, कैमरे की भी ज़रूरत नहीं है अब, पहले वीडियो बनाना मुश्किल था, अब स्टिंग इतने होते हैं क्योंकि मोबाइल है…………. पहले कैसेट सी डी से गाने सुनतेथे साथ बैठकर रेडियो भी सुनते थे… Read more »

सोने नहीं देते……

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  कभी कभी कुछ शब्द, सोने नहीं देते…… जब तक उन्हे किसी कविता का आकार न दे दूँ।   कभी कभी कोई धुन, सोने नहीं देती….. जब तक उसमे शब्द पिरोकर, गीत का कोई रूप न दे दूँ।   कभी कभी कोई विचार सोने नहीं देते….. जब तक विचारों को संजोकर आलेख का आकार न… Read more »

यह आंदोलन , वह आंदोलन  ….!!

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बेशक अपराधी के गांव वाले या परिजनों के लिए यह मामूली बात थी। क्योंकि उसका जेल आना – जाना लगा रहता था। अपराधी को जीप में बिठाने के दौरान परिजनों ने पुलिस वालों से कहा भी कि ले तो जा रहे हैं … लेकिन ऐसी व्यवस्था कीजिएगा कि बंदे को आसानी से जमानत मिल जाए। पुलिस ने केस फारवर्ड किया तो अदालत ने उसकी जमानत याचिका नामंजूर करते हुए आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बस फिर क्या था। आरोपी के गांव में कोहराम मच गया। लोगों ने पास स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर पथावरोध कर ट्रैफिक जाम कर दिया। सूचना पर पुलिस पहुंची तो उन्हें दौड़ा – दौड़ा कर पीटा।

आदमी

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हज़ारों की भीड़ में भी, अकेला है आदमी! आदमी ही आदमी को, नहीं मानता आदमी! संवेदनायें खो गईं, चोरी क़त्ल बढ़ गये, कोई भी दुष्कर्म करते, डरता नहीं अब आदमी। भगवान ऊपर बैठकर ये सोचता होगा कभी, ऐसा नहीं बनाया था मैने क्या बन गया है आदमी! स्वार्थ की इंतहा हुई , भूल गया दोस्ती… Read more »

तोहफे

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मै नहीं कोई ताल तलैया ना ही मैं सागर हूँ। मीठे पानी की झील भी नहीं, मैं बहती सरिता हूँ। सरल नहीं रास्ते मेरे चट्टनों को काटा है। ऊपर से नीचे आने.में झरने कई बनाये मैने इन झरनों के गिरने पर प्रकृति भी मुस्काई है पर मेरी इक इक बूँद ने  यहाँ हर पल चोट… Read more »

जो छा रहा वह जा रहा !

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जो छा रहा वह जा रहा ! जो छा रहा वह जा रहा, ना संस्कार बना रहा; प्रारब्ध है कुछ ढा रहा, ना लोभ पैदा कर रहा ! मन मोह से हो कर विलग, लग संग मन-मोहन सजग; नि:संग में सब पा रहा, वह हो असंग घुला मिला ! खिल खिला कर है वह खुला,… Read more »