पारदर्शी चंदा, मुसीबत का धंधा   

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जब से वित्त मंत्री अरुण जेतली ने राजनीतिक चंदे को पारदर्शी बनाने की बात कही है, तब से कई दलों की नींद हराम है। यद्यपि जेतली ने अभी बस कहा ही है; पर सब जानते हैं कि जेतली ने कहा है, तो सरकार अंदरखाने जरूर कुछ तैयारी कर रही होगी। विपक्ष (और अधिकांश सत्तापक्ष) वालों… Read more »

अभिलाषा

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आओ धरती को सजाएं,  हम एक उपवन की तरह, इसके हर अंश को महकाएं हम मधुबन की तरह, आओ धरती को सजाएं……….. एक धरती है जो बिन मांगे,  अपना सब देती, हमने छलनी किया सीना,  चुप कर सब सहती, रात-दिन सजदा करो,  चरणों में भगवन की तरह, आओ धरती को सजाएं…….. अपनी एक सांस भी… Read more »

 फेसबुक टैगिंग या फिर डिजिटल रैगिंग

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डिजिटल आपाधापी के इस घोर कलयुग में भी इंसानियत समाप्त नहीं हुई है, अभी भी कई लोग टैग की गई सभी पोस्ट अपनी वाल पर दिखने के लिए allow कर देते है। दया और करुणा का एक्स्ट्रा रिचार्ज करवा कर धरती पर डिलीवर किये गए लोग तो टैग किए जाने पर इतने भावविभोर हो जाते है कि टैग किये जाने को ही अपना सम्मान समारोह समझ लेते है और कमेंट बॉक्स में “थैंक्स फॉर द टैग” लिखकर टैगीत होने के ऋण से उऋण होते है।

आग बुझती जा रही है बस धुंआ सा रह गया

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आग बुझती जा रही है बस धुंआ सा रह गया राजनीती देख लगता, ये तमाशा रह गया,   जात में बंटते दिखे, धर्मों के ठेकेदार सब आदमी उनकी जिरह में बस ठगा सा रह गया,   एक बदली ने गिराई चंद बूंदे आस की, उस भरोसे की वजह से खेत प्यासा रह गया,   हर… Read more »

हां, भगवान है   

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अब पटना में देखो। वहां विपक्ष से अधिक बखेड़ा सत्ता पक्ष में ही चल रहा है। पहलवान हर दिन लंगोट लहराते हैं; पर बांधते और लड़ते नहीं। लालू जी का निश्चय है कि उनके घर का हर सदस्य उनकी भ्रष्ट परम्परा को निभाएगा। उन्होंने चारा खाया था, तो बच्चे प्लॉट, मॉल और फार्म हाउस खा रहे हैं। आखिर स्मार्ट फोन और लैपटॉप वाली पीढ़ी अब भी घास और चारा ही खाएगी क्या ? उधर नीतीश कुमार अपने सुशासन मार्का कम्बल से दुखी हैं। पता नहीं उन्होंने कम्बल को पकड़ रखा है या कम्बल ने उन्हें। इस चक्कर में शासन भी ठप्प है और प्रशासन भी। फिर भी हर साल की तरह वहां बाढ़ आ रही है। इससे सिद्ध होता है कि भगवान का अस्तित्व जरूर हैं।

कब्र का अजाब

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आरिफा एविस ‘नहीं, मदरसे में रूही नहीं जायेगी . ‘पर क्यों अम्मी?’ ‘कहा ना अब वो नहीं जायेगी मदरसे में बस..’ ‘तो क्या रूही आपा अपना कुरआन पूरा नहीं कर पाएंगी ?’ ‘मैंने यह तो नहीं कहा कि रूही अपना कुरआन पूरा नहीं करेगी. मैंने तो इतना ही कहा कि वो अब मदरसे में पढ़ने… Read more »

धरा पर आये है

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धरा पर आये हैं तो कुछ धरा को देते जायें धरा ने जितना दिया है कुछ तो उसका मान रखें नदियों मे नही अपनी अस्थियों को बहायें क्यों न किसी पेड़ की खाद बने,लहलहायें। फलफूल से पूजाकरें मिट्टी की मूर्ति बनायें खँडित होने पर भी उसे नदियों में ना बहायें मिट्टी की मूर्ति को मिट्टी ही  में मिलायें। धर्म  में क्या लिखा है ये तो  मै नहीं जानती अपनी इबारत ख़ुद लिखें जो सही लगे वो अपनाये। हम नहीं बदलेंगे सदियों पुरानी इबारते लकीर की फ़कीर पीटेंगे और पिटवायेंगे…… धर्म के नाम पर सिर काटेंगे कटवायेंगे ऐसे किसी भी धर्म को मै नहीं मानती! समय के साथ नदी बदलती लेती है रास्ते, नये टापू उगते हैं तो कई डूब जाते हैं आज जहाँ हिमालय है वहाँ कभी समुद्र था जब वो बदल गये तो हम क्यों ना बदल जायें।

ये फूल अनोखे से…..

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गुलमोहर के पेड़ अनोखे सुन्दर लाल सुनहरी फूलों से आग लगायें। घने पेड़ लगे हों जहाँ उस आग से, मन शीतल होजायें। पीले अमलतास के फूल वृक्षों पर लहराये शोभा हर वन उपवन की मनभाये इतरायें पलाश के जंगल ही जंगल लाल सुनहरे पीले से भी फूल बड़े कुछ छोटे से भी झुंडो मे मुस्कायें… Read more »

वो पीपल

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उनके वो हरे पत्ते जिसके छाॅंव पर हम बनते थे। मिटटी के गत्ते चैरहे पर अकेला ही तो था किसी अनाथ की तरह परोपकार में चढा मानव के हत्थे । दोपहरी में होते हम उसके परिवार दादा देते , हम सबको दुलार चुन्नू, मन्नू, रानू सखियों की होती पुकार और इनमें उनकी वो शीतल छाया… Read more »

आज का अखबार पढ़ लो

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आजका ख़बार पढ़ लो खून से लथपथ पड़ा है, शाम को समाचार सुन लो बयानबाज़ी से पटा है ज़रा ज़रा सी बात पर किसीने किसी को डसा है, हर वारदात के पीछे कोई  नकोई दल घुसा है। छुरा घोंपा गोलीमारी, रोज़ का किस्सा हुआ है गाय भैसों की रक्षा मे आदमी की जान लेलो ये… Read more »