कोई सीता मैया को फूल चढ़ायेगा?

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इन दिनों श्रीलंका में पर्यटक के रूप में भी भावुक न होना कठिन है। एक राहत की सांस अब भी सरसराती है, क्षितिज को चूमते समुद्र से लेकर व्यस्त नगरों और हरे भरे देहात तक। युद्ध खत्म हो चुका है और पूरी दुनिया मदद करने को आतुर है- सड़कें, पुल, अस्पताल, स्कूल उद्योग यहां तक… Read more »

देवी उपासना वैदिक काल से भी प्राचीन – हृदयनारायण दीक्षित

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माँ सृष्टि के अणु परमाणु की जननी है। माँ प्रत्येक जीव की आदि अनादि अनुभूति है। माँ की देह का विस्तार ही हम सबकी काया है। हम सबका अस्तित्व माँ के कारण ही है। माँ न होती तो हम न होते। माँ स्वाभाविक ही दिव्य हैं, देवी हैं, पूज्य हैं, वरेण्य हैं, नीराजन और आराधन… Read more »

पादरियों के सेक्स-कारनामों से थर्राया यूरोप, वेटिकन ने की क्षमायाचना

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समाचार पोर्टल सीएनएन व अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के हवाले से मिल रही खबरों से पता चला है कि वेटिकन कैथोलिक पादरियों के बारे में दुनियाभर और खासतौर से यूरोप के विभिन्न देशों से एक के बाद एक सेक्स-कारनामों के खुलासे से बुरी तरह हिल गया है। और तो और शुक्रवार को म्युनिख, जर्मनी… Read more »

विश्व बंधुत्व, करुणा, प्रेम और सुरक्षा ही मानव अधिकार की कुंजी : दलाई लामा

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विश्व बंधुत्व की भावना, करुणा, प्रेम और भ्रातृत्व ही मानव अधिकारों की सुरक्षा की कुंजी है। इन्हीं मानवीय गुणों से अधिक सभ्य मानव विकसित होगा और गरीबी, जाति, धर्म, ऊँच-नीच तथा अन्य आधारों पर होने वाले मानव अधिकार हनन प्रभावी रूप से रोका जा सकेगा। उक्त विचार तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने मध्यप्रदेश… Read more »

भारतीय नववर्ष क्यों मनाएं!

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भारतवर्ष वह पावन भूमि है जिसने सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को अपने ज्ञान से आलोकित किया है, इसने जो ज्ञान का निदर्शन प्रस्तुत किया है, वह केवल भारतवर्ष में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का पोषक है. यहाँ संस्कृति का प्रत्येक पहलू प्रकृति और विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है जो कहीं और नहीं मिलता…. Read more »

‘भक्ति’ की शक्ति से टूटा था सत्ता का अहं : डॉ कृष्णगोपाल

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कोई भी व्यवस्था अपने उद्गम स्थल पर कितनी ही अच्छी क्यों न हो, आगे चलकर विकृत होती है, टूटती है और बिखरती है। तब समाज का विचारवंत वर्ग खड़ा होता है और अव्यवस्था, अराजकता, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करता है। समाज की प्रकृति स्वभावतः परंपरा और जड़ता-प्रिय होती है। यही जड़त्व समाज को बदलने से… Read more »

इस्लाम का चिंतन

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भारत प्राचीन राष्ट्र है। सभी राष्ट्र उसके निवासियों के सह अस्तित्व से ही शक्‍ति पाते हैं। राष्ट्र से भिन्‍न सारी अस्मिताएं राष्ट्र को कमजोर करती है। भारत में जाति अलग अस्मिता है। मजहबी अस्मिता की समस्या से ही भारत का विभाजन हुआ था। गांधीजी हिन्‍दू-मुस्लिम की साझा आस्था बना रहे थे। आस्थाएं तर्कशील और वैज्ञानिक… Read more »

अदालत का सामना करें ‘भगोड़े’ हुसैन: विहिप

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विश्व हिन्दू परिषद ने कहा है कि हिंदू देवी-देवताओं के अश्लील चित्रकारी कर चर्चित हुए विवादित चित्रकार एम.एफ. हुसैन को अपने कुकृत्यों के कारण चल रहे मुकदमों का डटकर सामना करना चाहिए। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. सुरेन्द्र जैन ने शुक्रवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हुसैन को भगोड़े अपराधियों की तरह… Read more »

बेपर्दा सन्त-महात्मा कितना सच!

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भारत जैसे देश में जहाँ कृष्ण जैसे महान व्यक्तित्व ने सभी क्षेत्रों में सच्चाई को स्वीकार करके एक से एक नायाब उदाहरण प्रस्तुत किये हैं, वहाँ हम क्यों चाहते हैं कि सन्त या महापुरुष मुखौटे धारण करके अप्राकृतिक जीवन जियें? सेक्स या सम्भोग एक अति सामान्य और स्वाभाविक क्रिया होने के साथ-साथ प्रत्येक जीव के… Read more »

मुसलमानों की देशभक्ति पर शक क्यों

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देश में शिवसेना ने मराठा प्रेम के नाम पर जो लडाई छेडी हुयी है उसने इन दिनों देश प्रेम का रुख अख्तियार कर लिया है। कभी महाराष्ट्र में ‘बजाओ पुंगी हटाओ लुंगी’ का नारा देने वाले बालासाहेब ठाकरे आज जबरदस्त देशभक्ति का प्रदर्शन करते हुये सडक़ों पर उतर आये हैं और उन्हें शाहरुख खान के… Read more »