श्री रामचरितमानस पर मची है : महाभारत – एस.ए. अस्थाना

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देश से बाहर कौन कहे भारत भूमि पर ही आज सनातन धर्म, सनातन संस्कृति हर दिन, हर क्षण तेजी के साथ पतनोन्मुखी हो रही है और हम ‘किंकर्तव्य विमुढ़’ की स्थिति में खड़े-खड़े देख रहे हैं। इसका शर्मनाक तथ्य तो यह है कि सनातन धर्म-संस्कृति के पतन का जिम्मेदार कोई विदेशी संगठन, विदेशी संस्कृति या… Read more »

राम नाम भजने के बजाय उनके आदर्शों पर चल

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दानवों से ऋषि मुनियों और मानवों को मुक्ति दिलाकर जब रावण वध करके भगवान राम अयोध्या वापस आये थे तो अयोध्यावासियों ने घी के दिये जलाकर उनका स्वागत किया था जिसे हम आज भी दीपावली के रूप में मनाते हैं। अपने पिता राजा दशरथ द्वारा माता कैकयी को दिये गये वचन को निभाने के लिये… Read more »

जब रावण मर न पाया।।।

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विजयादशमी पर मोहल्ले के लोग रावण मारना चाहते थे। पगले कहीं के। रावण ससुरा कभी मरता नहीं, अमरता का वरदान पा चुका है लेकिन दिल है कि मानता नही। हर साल जाते हैं शान से- रावण मारने। जलाते हैं। पटाखे फोड़ते हैं। एक से एक आतिशबाजी करते हैं, और लौट आते हैं, लेकिन ढाक के… Read more »

कनिष्क कश्यप:आईए देखें पहले अंडा या पहले मुर्गी ?

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यहीं गांठ हैं, यहीं उलझन हैं जो आपको
सुलझानी हैं। देखो उस सवाल को……जिसने अपना होना कैसे बनाये रखा। एक ऐसा सवाल जो बार बार
आपको एक अद्रिश्य सता को मानने को विवश करता है। एक ऐसा सवाल जो बड़े बड़े विद्वानों ने,
मनुस्य की सोच और बुद्धि को सीमित करने का रूपक बनाया और आज भी बनाया जाता है।

पहले अंडा आया या पहले मुर्गी?
पहले पेड़ या पहले बीज़? जैसे हज़ारों सवाल आप बना सकतें हैं!

कविता-आज ईद है

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आज ईद है। मुबारक हो सबको। हर धर्म हमें प्यारा हो। हम ईद भी मनाये, दीवाली भी। बड़ा दिन भी। सब त्यौहार हमारे है। मैंने कभी रमजान पर लिखा था, दो शेर ही याद आ रहे है. देखे- रोजा इक फ़र्ज़ मुसलमान के लिए/ तकलीफ जो सहते है रमजान के लिए/ बाद मरने के ही… Read more »

सेक्स चर्चा (भाग -3)

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हम जीवन के मूल तत्व ‘ काम ‘ अर्थात ‘सेक्स’ के ऊपर विभिन्न विचारकों और अपने विचार को आपके समक्ष रखेंगे . काम का जीवन में क्या उपयोगिता है ? सेक्स जिसे हमने बेहद जटिल ,रहस्यमयी ,घृणात्मक बना रखा है उसकी बात करने से हमें घबराहट क्यों होती है ? क्यों हमारा मन सेक्स में चौबीस घंटे लिप्त रहने के बाद भी उससे बचने का दिखावा करता है

सनातन वांग्मय के वैज्ञानिक आधार

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वैसे तो सनातन व्यवस्था अति प्राचीन मानी जाती है। इतिहासवेत्ताओं के अनुसार भी विश्व में सबसे पुरानी सनातन सभ्यता ही रही है। जिसका आधार बीसवीं शताब्दी के तीसरे दशक में हुयी खुदायी मे प्राप्त सिंधु घाटी की सभ्यता जो लगभग 2500-1500 ईसा पूर्व जो पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान, जम्मू तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक… Read more »

पंथ निरपेक्षता बनाम धर्म निरपेक्षता को लेकर छिडी बहस के सही संदर्भ

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किसी एक शब्द की गलत व्याख्या या उसका गलत अनुवाद किस प्रकार पूरे परिदृश्य को धुमिल कर सकता है और चिंतन को प्रदूषित कर सकता है इसका सबसे बडा उदाहरण दो शब्दों को लेकर दिया जा सकता है। पहला शब्द धर्म है और दूसरा अंग्रेजी भाषा का शब्द सेकुलर है । इन दोनों शब्दों के… Read more »

कर्मों के कारण है पुनर्जन्म : श्रीमद भगवद् गीता

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पुनर्जन्म या REINCARNIATION एक ऐसा शब्द है जिससे लोग REBIRTH के नाम से जानते है हिन्दू धर्म के लोग पुनर्जन्म मतलब जनम,मृत्यु,और पुनः जनम के चक्र में विश्वास करते है अध्यात्मिक कानून के आधार पर पुनर्जन्म का तात्पर्य है” आत्माओ की पुर्नस्थापना” ,संस्कृत में पुनः शब्द का अर्थ होता है ‘अगला समय’ या ‘फिर से’ और जनम का अर्थ होता है

अध्यात्म का असल मतलब

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अध्यात्म रोचक शब्द है। सामान्यतया भक्ति या ईश्वर विषयक चर्चा को अध्यात्म कहा जाता है। पूजा पाठ करने वाले ‘आध्यात्मिक’ कहे जाते हैं। भारत के लोक जीवन में यह शब्द मुद्रा से भी ज्यादा तेज रफ्तार चलताऊ है लेकिन प्रगतिशील विद्वानों के बीच उबाऊ है और घिसा पटा है। घिसा इसलिए कि पुराना है, पिटा इसलिए कि इसका रूप आस्थावादी है।