ईसाई धर्म और नारी मुक्ति

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 प्रो. कुसुमलता केडिया क्रिश्चिएनिटी की जिन मान्यताओं के विरोध में यूरोपीय नारी मुक्ति आंदोलन वीरतापूर्वक खड़ा हुआ, वे मान्यताएं हिन्दू धर्म, बौध्द धर्म तथा विश्व के सभी धर्मों में कभी थी ही नहीं। यहां तक कि यहूदी धर्म और इस्लाम में भी ये मान्यताएं कभी भी नहीं थीं। भले ही स्त्रियों पर अनेक प्रतिबंध इस्लाम… Read more »

योगविद्या को हिंदू आस्था का अंग मानने पर झिझक क्यों?

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हरिकृष्ण निगम आज जब लगभग डेढ़ करोड़ लोग मात्र अमेरिका में ही योगाभ्यास, ध्यान और प्राणायाम से जुड़े हुए हैं इसकी अंतर्राष्ट्रीय लोकप्रियता एवं स्वास्थ जीवन के संदर्भ में प्रासंगिकता को समझा जा सकता है। यह भारतीय वैकल्पिक चिकित्सा पध्दति की बढ़ती हुई स्वीकृति का भी सूचक है जिसके बीच में आस्था, नस्ल, रंगभेद या… Read more »

और अब भारत में भी ‘तालिबानी फरमान

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तनवीर जाफ़री ऐसा लगता है कि आजकल इस्लाम को बदनाम करने का ठेका सिर्फ मुसलमानों ने ही ले रखा है। न सिर्फ दुनिया के तमाम मुल्कों से बल्कि भारत से भी अक्सर ऐसे समाचार प्राप्त होते रहते हैं, जिनसे इस्लाम बदनाम होता है और मुसलमानों का सिर नीचा होता है। कभी बेतुके फतवे इस्लामी तौहीन… Read more »

आखिर वसिष्ठ कौन थे?

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सूर्यकांत बाली किसी भी भारतवासी के सामने आप वसिष्ठ का नाम ले लें तो एकदम बोल उठेगा, वही जो, दशरथ के कुलगुरू, जिन्होंने उनके चार बेटों, राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न को शिक्षा-दीक्षा प्रदान की थी। वही तो, जिन्होंने तब दशरथ को समझाकर ढांढस बंधाया था कि अगर मुनि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को राक्षसों का… Read more »

साम्राज्यवादी रवैया त्यागे चर्च

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आर एल फ्रांसिस नये साल में पोप बेनेडिक्ट 16वें ने दुनियाभर के नेताओं से ईसाइयों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने की अपील की है। वेटिकन सिटी में नववर्ष के मौके पर एकत्रित हजारों श्रद्वालुओं को संबोधित करते हुए पोप बेनेडिक्ट ने अफ्रीका महाद्वीप में ईसाई धर्मावलंबियों पर बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता प्रगट… Read more »

स्वामी विवेकानंद का मानवतावाद

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डॉ. मनोज चतुर्वेदी स्वामी विवेकानंद भारतीय चेतना एवं चिंतन के आधार स्तंभ थे। उनका संपूर्ण जीवन मानव जाति के सेवार्थ में व्यतीत हुआ। लेकिन उन्होंने सेवा का यह संकल्प स्वामी रामकृष्ण के श्री चरणों में बैठकर प्राप्त किया था। स्वामी जी के मन में भारत का भूत, वर्तमान तथा भविष्य तो था ही, पर वे… Read more »

इस्लाम को ‘तालिबानी’ शिकंजे से मुक्त कराने की सख्‍त जरूरत

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तनवीर जाफ़री इस्लाम धर्म इस समय घोर संकट के दौरे से गुजर रहा है। जैसा कि इस्लाम धर्म का इतिहास हमें बताता आ रहा है कि अपने उदय के समय अर्थात् लगभग 1450 वर्ष पूर्व से ही इस्लाम को सबसे बड़ा खतरा किसी अन्य धर्म, संप्रदाय या विश्वास के लोगों से नहीं बल्कि दुर्भाग्यवश उन्हीं… Read more »

सोमयाग : महत्त्व एवं प्राचीनता

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सूर्यकांत बाली सतयुग के भारतीयों का, चाहे वे आम लोग रहे हों या फिर राज परिवारों के लोग रहे हों, सोमयाग एक बहुत ही प्रिय यज्ञ रहा है। यज्ञ के नाम से जिस संस्था से हमारा परिचय रहा है वह क्रमश: काफी जटिल और महंगी होती चली गई थी। मनु महाराज ने जब प्रकृति के… Read more »

मां नर्मदा सामाजिक कुंभ

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गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा क्षिप्रा, गोदावरी, कावेरी जैसी पवित्र नदियों के किनारे ही सम्पूर्ण विश्व को अपने ज्ञान से आलोकित करने वाली सनातन संस्कृति ने जन्म लिया। इन नदियों के तटों पर ही आयोजित होने वाले कुम्भों में देश के कोने-कोने से संत व प्रबुद्धजन एकत्र होकर काल, परिस्थिति का समग्र विश्लेषण करने के साथ… Read more »

वैज्ञानिकों में‌ भी फ़न्डामैन्टलिज़म

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विश्व मोहन तिवारी मैं डा. सुबोध मोहन्ति का साक्षात्कार ले रहा था। मुझे उनके उत्तरों में सुविचारित परिपक्वता प्रसन्न कर रही थी। अत: मैं अनेक प्रश्न योजनानुसार नहीं, वरन प्रेरणा के अनुसार कर रहा था। मैंने उनसे पूछा,” क्या विज्ञान संचारक को घटनाओं में विज्ञान संगति सिद्ध करते समय धर्म का उपहास करना चाहिये?” उऩ्होंने… Read more »