जानिए की क्यों नहीं करना चाहिए बिस्तर पर बैठ कर भोजन…???

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

  ऐसा करना दे सकता है शनिदेव  को आमंत्रण….. प्रिय पाठकों/मित्रों, कुछ कार्य ऐसे भी होते हैं जो बहुत साधारण लगते हैं लेकिन ज्योतिष के अनुसार वे शुभ नहीं होते. दूसरे शब्दों में कहें तो वे मनुष्य के जीवन से सुख और समृद्धि को नष्ट करते हैं. ऐसे कार्यों से सदैव दूर रहना चाहिए. जानिए… Read more »

जानिए वास्तु और आइना (शीशा/दर्पण/कांच) का सम्बन्ध, इसके प्रभाव और लाभ-हानि–

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

किसी भी दर्पण को सोने के कमरे में नहीं होना चाहिए। पति-पत्नी के सोने के कमरे में दर्पण से किसी तीसरे आदमी की मौजूदगी का अहसास होता है। रात के वक्त अंधेरे में अपना ही प्रतिबिंब हमें चौंका भी देता है। इसलिए अगर आईना या ड्रेसिंग-टेबल रखना भी हो , तो इस तरह से रखा जाना चाहिए कि सोने वाले का अक्स उसमें न दिखाई दे। और , क्योंकि टीवी की स्क्रीन भी शीशे का काम करती है इसलिए टीवी को भी बेड के सामने नहीं रखना चाहिए। अगर किसी वजह से ऐसा करना मुश्किल हो , तो सोने से पहले दर्पण को किसी कपड़े या पर्दे से ढक देना चाहिए

जानिए वर्ष 2017 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म, वर्त-त्यौहार

संवत् 2073 दिनांक 12 मार्च 2017 को भारत के विभिन्न स्थानों पर होलिका दहन का मुहूर्त नीचे दिए गए समय के अनुसार ही करे वह समय इस प्रकार से है ।। वर्ष 2017 में होलिका दहन 12 मार्च 2017, रविवार के दिन मनाई जाएगी. होलिका दहन मुहूर्त = 06:23 pm से 08:23 pm तक रहेगा…. Read more »

सब मनुष्यों के पालनीय सत्य धर्म का निश्चय और असत्य मतों का त्याग

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य संसार की सर्वोत्तम कृति है। मनुष्य से बढ़कर संसार की कोई रचना नहीं है। इस मान्यता व सिद्धान्त को प्रायः सभी लोग निर्विवाद रूप से स्वीकार करते हैं। इस संसार में विद्यमान अपौरुषेय रचनाओं पर विचार करने पर बुद्धि असमंजस में पड़ जाती है। इस संसार व जगत का आधार क्या… Read more »

अक्षय तृतीया (आखा तीज) 2017

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, पर्व - त्यौहार

अक्षय तृतीया पर्व को कई नामों से जाना जाता है| इसे अखतीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है| इस वर्ष यह पर्व 28 अप्रैल 2017 (शुक्रवार) के दिन मनाया जाएगा. इस पर्व को भारतवर्ष के खास त्यौहारों की श्रेणी में रखा जाता है| अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है | इस दिन स्नान, दान, जप, होम आदि अपने सामर्थ्य के अनुसार जितना भी किया जाएं, अक्षय रुप में प्राप्त होता है | वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “अक्षय तृतीया” या “आखा तृतीया” अथवा “आखातीज” भी कहते हैं।

संत दादू ने प्रेम की गंगा बहायी

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

ललित गर्ग भारतभूमि अनादिकाल से संतों एवं अध्यात्म के दिव्यपुरुषों की भूमि रहा है। यहां का कण-कण, अणु-अणु न जाने कितने संतों की साधना से आप्लावित रहा है। संतों की गहन तपस्या और साधना के परमाणुओं से अभिषिक्त यह माटी धन्य है और धन्य है यहां की हवाएं, जो तपस्वी एवं साधक शिखर-पुरुषों, ऋषियों और… Read more »

”शिवलिंग” का सही अर्थ क्या है ?

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

शिवलिंग …गुप्तांग नहीं है… शिव के लिंग को “गुप्तांग” समझने वाले अवश्य पढें… प्रिय पाठकों/मित्रों, शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है और कैसे इसका गलत अर्थ निकालकर हिन्दुओं को भ्रमित किया गया कुछ लोग शिवलिंग की पूजा की आलोचना करते है, छोटे छोटे बच्चो को बताते है कि हिन्दू लोग लिंग और योनी की पूजा… Read more »

जानिए गणगौर पूजन क्या हैं और क्या हैं गणगोर व्रत की विधि और मनेगा 2017 में गणगोर —

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, वर्त-त्यौहार

भारत भर में चैत्र शुक्ल तृतीया का दिन गणगौर पर्व के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू समाज में यह पर्व विशेष तौर पर केवल स्त्रियों के लिए ही होता है। होली के दूसरे दिन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा) से जो नवविवाहिताएँ प्रतिदिन गणगौर पूजती हैं, वे चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी, तालाब या… Read more »

भगवान शिव के अनेक अवतार

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

डा.राधेश्याम द्विवेदी हिंदू धर्म ग्रंथ पुराणों के अनुसार भगवान शिव ही समस्त सृष्टि के आदि कारण हैं। उन्हीं से ब्रह्मा, विष्णु सहित समस्त सृष्टि का उद्भव होता हैं। जिस प्रकार विष्णु के 24 अवतार हैं उसी प्रकार शिव के भी 28 अवतार हैं। वेदों में शिव का नाम ‘रुद्र’ रूप में आया है। रुद्र संहार… Read more »

होली के वासंती रंग में बाजार का कृतिम रंग न चढ़ाएं 

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, वर्त-त्यौहार

अखिलेश आर्येन्दु हम यदि होली के विभिन्न संदर्भों की बात करें तो पाते हैं कि न जाने कितने संदर्भ, घटनाएं, प्रसंग, परंपराएं और सांस्कृतिक-तत्त्व किसी न किसी रूप में इस प्रेम और सदभावना के महापर्व से जुडे़ हुए हैं। लेकिन सबसे बड़ा प्रतीक इस पर्व का प्रेम का वह छलकता अमृत-कलश है जिसमें हमारा अंतर-जगत्… Read more »