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Archive for the Category ‘व्यंग्य’


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व्यंग्य-जनता बदलाव चाहती है

व्यंग्य-जनता बदलाव चाहती है पंडित सुरेश नीरव अब अपने भारत के दिन फिर बहुरेंगे। पहले सुनहरे कल में बेचारा घुसते-घुसते रह गया था। फिर शाइनिंग इंडिया होते-होते भी बाल-बाल बच गया। मगर अबकी बार कोई चूक नहीं हो सकती है। क्योंकि मंहगाई और घोटालों के साथ-साथ मतदान का ग्राफ भी लप-लपाता हुआ आगे बढ़ा है। मतदाताओं के सर मुंडाते ...

February 13th, 2012 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 15 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: satire by pandit Suresh Neerav, जनता बदलाव चाहती है

हास्य-व्यंग्य – ऋतुओं का सुपर स्टारःवसंत

हास्य-व्यंग्य -  ऋतुओं का सुपर स्टारःवसंत पंडित सुरेश नीरव कलैंडर के हेलीकॉप्टर से उतरकर ऋतुओं का सुपर स्टार ऋतुराज वसंत धरती पर उतर आय़ा है। शोखियों की क्रीम और रोमांस के पाउडर से लिपी-पुतीं सजी-संवरीं कलियां वसंत को देख-देखकर- वाओ..हाऊ क्यूट-जैसे जुमलों को मादक सिसकियों में ढालकर बिंदास वसंत को रिझाने में लग गई हैं। एअरपोर्ट पर नेता के स्वागत में ...

February 10th, 2012 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 42 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य, साहित्‍य | Tags: basant, ऋतुओं का सुपर स्टार, वसंत

टीम अन्ना का संगठन शास्त्र

टीम अन्ना का संगठन शास्त्र विजय कुमार अन्ना इन दिनों बीमार हैं। यद्यपि उनका उत्साह कम नहीं हुआ; पर क्या करें, शरीर साथ नहीं दे रहा। उनके साथियों को भी समझ नहीं आ रहा कि इस सरदी के मौसम में अब आगे क्या रास्ता पकड़ें कि आंदोलन में फिर से गरमी आ सके। अन्ना अपने गांव रालेगढ़ ...

February 7th, 2012 | लेखक : विजय कुमार | 118 views | 8 Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Team Anna, अन्‍ना हजारे

व्यंग्य ; हे अतिथि, कब आओगे??

व्यंग्य ; हे अतिथि, कब आओगे?? अशोक गौतम हे परमादरणीय अतिथि! अब तो आ जाओ न! माना सर्दियों में घर से बाहर निकलना मुश्किल होता है, पर अब तो वसंत गया। विपक्ष ने चुनाव आयोग से कह जिन हाथियों को ढकवा दिया था वे भी वसंत के आने पर कामदेव के बाणों से आहत होकर चिंघाड़ने लग ...

February 1st, 2012 | लेखक : अशोक गौतम | 22 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य, साहित्‍य | Tags: guest, vyangya, कब आओगे, व्यंग्य, हे अतिथि

बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी?

बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी? एल. आर गाँधी भारत में प्रत्येक 'बकरे' को पांच साल बाद 'अपना कसाई ' बदलने का अधिकार है. पांच राज्यों के बकरे अपने 'कसाईयों ' की कारगुजारी को तौल रहे हैं ... कौन झटक देगा या हलाल करेगा ? सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के ' बकरों' को बहिन जी से गिला है ...

January 30th, 2012 | लेखक : एल. आर गान्धी | 90 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Common People, Mulayam Singh, Political parties, sp, voters, बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी

गणेश जी गाँधीवादी हैं ………………

गणेश जी गाँधीवादी हैं .................. चुनावी कम्प्यूटर में चुनाव आयोग का कड़ाई वायरस क्या आया सारा आपरेटिंग सिस्टम ही करप्ट हो गया कोई विंडो खुली नज़र नहीं आ रही की जिससे अन्दर बाहर  किया जा सके | बेचारी चुनावी   इंजीनियरिंग की वाट ! लगी पड़ी है | शराब,गांजा,भांग,रूपए,पैसे,का सॉफ्टवेयर,और लाठी-डंडे-बन्दूकी बाहुबल का हार्डवेयर ठीक ...

January 30th, 2012 | लेखक : अनुराग अनंत | 52 views | 2 Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Ganesh ji is gandhian, गणेश जी गाँधीवादी हैं

व्यंग्य ; क्रिकेट के नायक और खलनायक – राजकुमार साहू

व्यंग्य ; क्रिकेट के नायक और खलनायक - राजकुमार साहू इतना तो है, जब हम अच्छा करते हैं तो नायक होते हैं। नायक का पात्र ही लोगों को रिझाने वाला होता है। जब नायक के दिन फिरे रहते हैं तो उन पर ऊंगली नहीं उठती और जो लोग ऊंगली उठाते हैं, उनकी ऊंगली, उनके चाहने वाले तोड़ देते हैं। नायक की दास्तान अभी ...

January 30th, 2012 | लेखक : राजकुमार साहू | 28 views | No Comments »
Posted in Category: खेल जगत, व्यंग्य, साहित्‍य | Tags: Cricket, vyangya, क्रिकेट के नायक और खलनायक, व्यंग्य

व्यंग्य कविता ; काम वालियां – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

व्यंग्य कविता ; काम वालियां - प्रभुदयाल श्रीवास्तव काम वालियां नहीं कामपर बर्तन वाली दो दिन से आई इसी बात पर पति देव पर‌ पत्नि चिल्लाई काम वालियां कभी समय पर अब न आ पातीं न ही ना आने का कारण‌ खुलकर बतलातीं बिना बाइयों के घर तो कूड़ाघर हो जाता बड़ी देर से कठिनाई से सूर्य निकल पाता छोटी बच्ची गिरी फिसल कर‌ सभटल नहीं पाई बिना बाई के कौन पतीली चाय भरी ...

January 30th, 2012 | लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 53 views | No Comments »
Posted in Category: कविता, व्यंग्य, साहित्‍य | Tags: poem, vyangya, काम वालियां, व्यंग्य कविता

वादा तेरा वादा (चुनावी व्यंग-एक सच्ची घटना पर आधारित)

वादा तेरा वादा (चुनावी व्यंग-एक सच्ची घटना पर आधारित) संदीप ठाकुर चुनावी मुद्दों के बाद अब लोक-लुभावन वादों से, पूरे प्रदेश में सियासी हलचल मची हुई है. किस पार्टी के मेनीफेस्टो कौन सा चुनावी आफर निकल कर आ जाय किसी कुछ पता नही. कोई साईकिल बाँट रहा है तो कोई टेबलेट व लैपटॉप देने की बात कर रहा है. कहीं ...

January 30th, 2012 | लेखक : संदीप ठाकुर | 52 views | No Comments »
Posted in Category: चुनाव, व्यंग्य | Tags: election vyangya, चुनावी व्यंग, वादा तेरा वादा

व्यंग्य – घोषणा ही तो है…

व्यंग्य - घोषणा ही तो है... राजकुमार साहू मैं बचपन से ही ‘घोषणा’ के बारे में सुनते आ रहा हूं, परंतु यह पूरे होते हैं, पता नहीं। इतना समझ में आता है कि ‘घोषणा’ इसलिए किए जाते हैं कि उसे पूरे करने का झंझट ही नहीं रहता। चुनावी घोषणा की बिसात ही अलग है। चुनाव के समय ...

January 29th, 2012 | लेखक : राजकुमार साहू | 35 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य |

अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!!

अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!! कुछ दिन पहले तक मेरी हालत बहुत खराब थी। मुझे कहीं से कोई भी अटेंशन नहीं मिल रही थी। हर कोई मुझे बस टेंशन देकर चला जाता था, जैसे मैं रास्ते का भिखारी हूँ और मुझे कोई भी भीख में टेंशन दे देता था। मैं बहुत दुखी था। कोई रास्ता ...

January 28th, 2012 | लेखक : विजय कुमार सप्पाती | 40 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य, साहित्‍य | Tags: vyangya, अटेंशन, व्यंग्य कथा

रामभरोसे नगर की रामलीला ………एक व्यंग …………

रामभरोसे नगर की रामलीला .........एक व्यंग ............ रामभरोसे बड़े ही भरोसे के आदमी है इसलिए नहीं कि उनका नाम रामभरोसे है बल्कि इसलिए कि वो रामभरोसे नगर के निवासी है,राम भरोसे नगर की खास बात ये है कि वहां के सभी निवासियों का नाम रामभरोसे है और नेताओं का नाम राम है,रामभरोसे नगर के सभी निवासियों का ...

January 23rd, 2012 | लेखक : अनुराग अनंत | 41 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य |

यत्र तत्र हाथी सर्वत्र!

यत्र तत्र हाथी सर्वत्र! अशोक गौतम विपक्ष के आरोप पर चुनाव आयोग ने हर चौक पर विराजमान को ढकने के आदेश किए तो हाथियों के संगठन के प्रधान ने देश के तमाम हाथियों को संबोधित करते कहा,‘ हे मेरे देश के तमाम हाथियो! जरा चुनाव आयोग से पूछो कि हमारा चुनाव से क्या लेना देना! ...

January 13th, 2012 | लेखक : अशोक गौतम | 91 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Elephant, satire by Ashok Gautam, हाथी

चुनाव आयोग का हास्यास्पद फैसला

चुनाव आयोग का हास्यास्पद फैसला पवन कुमार अरविंद बसपा सुप्रीमो कुमारी मायावती और हाथी की मूर्तियों को ढंकवाने के बाद चुनाव आयोग समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल का क्या करेगा? साइकिल आमजन की सवारी है, जो हर नगर, ग्राम, डगर-डगर दिख जायेगी। तो क्या चुनाव सम्पन्न होने तक लोग साइकिल की सवारी करना छोड़ दें? ...

January 12th, 2012 | लेखक : पवन कुमार अरविन्द | 62 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Election Commission of India, mayawati and elephant, चुनाव आयोग का हास्यास्पद फैसला, मायावती और हाथी की मूर्तियों

लोकपाल या लोक पा(ग)ल

लोकपाल या लोक पा(ग)ल अविनाश वाचस्‍पति लोकपाल मतलब नेता। चौंकिए मत जो लोक को पाले वह नेता ही हो सकता है। अरे भाई इसमें इतनी हैरानी की क्‍या बात है, क्‍योंकि लोक हुआ आम आदमी और आम आदमी को पालता है नेता। चाहे यह नेताओं की गलतफहमी ही क्‍यों न हो, परंतु किसी हद तक ...

January 11th, 2012 | लेखक : अविनाश वाचस्‍पति | 52 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Lokpal Bill, reservation in lokpal bill, लोकपाल

आधार से निराधार तक

आधार से निराधार तक विजय कुमार हर व्यक्ति के जीवन में छात्र जीवन का बड़ा महत्व है। इस समय एक दौर ऐसा भी आता है, जब लोग प्रायः कविहृदय हो जाते हैं। डायरी में गुलाब का फूल रखने से लेकर रोमांटिक शेर लिखना तक उन दिनों आम बात होती है। कविता और शेरो शायरी का ...

January 10th, 2012 | लेखक : विजय कुमार | 49 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: aadhar card, आधार

सदाखुश बाबू

सदाखुश बाबू  विजय कुमार शर्मा जी में यों तो कई विशेषताएं हैं; पर सबसे बड़ी विशेषता है कि वे स्वयं भी खुश रहते हैं और बाकी लोगों को भी खुश रखते हैं। अतः लोग उन्हें सदाखुश बाबू भी कहते हैं। जिस दिन विश्व की जनसंख्या सात अरब हुई, उससे अगले दिन मिले, तो खुशी ...

January 10th, 2012 | लेखक : विजय कुमार | 27 views | No Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: sadakhush babu, story by vijay kumar, सदाखुश बाबू

बस, शांति पुरुष घोषित करवा दो यार !!

बस, शांति पुरुष घोषित करवा दो यार !! अशोक गौतम कल बाजार में वे मिले। एक कांधे पर उन्होंने कबूतर बिठाया हुआ था तो दूसरे कांधे पर तोता। माथे पर बड़ा सा तिलक! हाथ में माला, तो शरीर जहां जहां भगवे से बाहर था वहां पर भूभत ही भभूत! अचानक वे मेरे सामने अल्लाह हो! अल्लाह हो! करते रूके ...

January 9th, 2012 | लेखक : अशोक गौतम | 24 views | 1 Comment »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: Satire, अशोक गौतम, शांति पुरुष घोषित करवा दो

कुएं नेकी का डस्टबिन

कुएं नेकी का डस्टबिन पंडित सुरेश नीरव गर्मी चेहरे पर पसीने का स्प्रे कर रही थी। मैं लाल कुएं से चलकर धौला कुंआ तक भटकता-भटकाता पहुंच चुका था मगर मजाल है कि बीस किलोमीटर के इस कंकरीट कानन में कहीं भी एक अदद कुएं की झलक भी देखने को मिली हो। कई दिनों बाद मैंने एक नेकी की ...

January 6th, 2012 | लेखक : पंडित सुरेश नीरव | 39 views | 2 Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: satire by pandit Suresh Neerav, कुएं नेकी का डस्टबिन

क्या राजनीतिज्ञों का नार्को और डी.एन.ए. परिक्षण अनिवार्य होना चाहिए……!

क्या राजनीतिज्ञों का नार्को और डी.एन.ए. परिक्षण अनिवार्य होना चाहिए......! विनायक  शर्मा एक गंभीर राजनैतिक व्यंग डी.एन.ए. और नार्को -परिक्षण , गाहे-बगाहे कहीं न कहीं समाचारों में यह शब्द पढने-सुनने में आ ही जाते हैं. जीवित कोशिकाओं के गुणसूत्रों में पाए जाने वाले तंतुनुमा अणु को डी-ऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल या डीएनए कहते हैं. इसमें अनुवांशिक कूट या जेनेटिक कोड निबद्ध रहता है. ...

January 4th, 2012 | लेखक : विनायक शर्मा | 147 views | 3 Comments »
Posted in Category: व्यंग्य | Tags: dna tests of politicians, narco tests of politicians, डी.एन.ए., नार्को -परिक्षण, राजनीतिज्ञों का नार्को और डी.एन.ए. परिक्षण अनिवार्य

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