लंबे समय के बाद एक सरकार!

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-संजय द्विवेदी- हिंदुस्तानी मन की आकांक्षाएं बहुत अलग हैं। वह बहुत कम प्रतिक्रिया करके भी ज्यादा कहता है। 2014 के चुनाव इस बात की गवाही देते हैं कि जनता के मन में चल रही हलचलों का भान हमें कहां हो पाया। हम सब सेकुलरिज्म की ढोल बजाते रहे और ऐसे लोग सरकार में आ गए… Read more »