जूते व जूती की महिमा

जूते में बहुत गुण है,सदा राखिए पास।
शत्रु से ये बचाए,कोई न फ्टके पास।।

मैडम जूती राखिए,बिन जूती सब सून।
जूती नाये न उबरे राजनीति के ये चून।

पड़ जाए जूती प्रेमिका की,समझो अपने को निहाल।
जल्दी ही पड जाएगी,तुम्हारे गले में ये माल।।

औरत को न समझिए,पैर की जूती तुम यार।
अपने पर जब पड़ जाएगी,तुम्हे पड़े की मार।।

जूता जूती का पुरलिंग है,इसमें न दो राय।
जूती जब जूता बन जाए, पुरलिग करे हाय।।

जूते की बड़ी महिमा है,देखो संसद में इसका खेल।
जब कोई बिल न पास कराना न हो,करो इसकी पेलम पेल।।

जयपुर कानपुर और कोल्हापुर,इसके बड़े बाजार।
हर तरह की मिल जाएगी,सिर को पक्का रक्खों यार।।

बेलन चिमटा थे कभी पत्नी के हाथियार।
अब तो जूती बनी उसका बड़ा हथियार।

रस्तोगी भी लिख रहा,जूते जूती पर अपने विचार।
इसको भी डर लग रहा कहीं पड न जाए इनकी मार।।

आर के रस्तोगी

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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