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    Homeसाहित्‍यकविताईश्वर अल्लाह खुदा का पैगाम यही

    ईश्वर अल्लाह खुदा का पैगाम यही

    This is the message of God Allah God
    
    
    
    
    

    —विनय कुमार विनायक
    जहां से अच्छाई मिले
    उसे तुम ग्रहण कर लो
    दकियानूसी क्यों बनते हो?

    खुदा होता है कि नहीं
    इस पचड़े में क्यों पड़ते हो?

    अगर खुदा होते भी हों
    तो वे सबके लिए होते होंगे
    किसी खास धर्मवाले का
    कोई खुदा क्यों होने लगेंगे?

    जब पूरे कायनात को
    बनानेवाले एक खुदा होते
    फिर किसी मजहब हेतु
    खुदा पक्षपात क्यों करेंगे?

    खुदा के खिदमत में
    सबकी भलाई का काम करो
    क्यों भेदभाव करते हो
    गैरमजहबी को काफिर कहके
    गर काफिरों को उसने नहीं बनाया
    तो खुदा एक और नेक कैसे?

    इंसान-इंसान में नहीं फर्क करो
    कुदरत को समझो कुछ तर्क करो
    इस जीव जगत को ना नर्क करो
    जहालत को छोड़ो शिक्षा ग्रहण करो!

    हत्या व आतंक खुदा का फरमान नहीं
    मानव-मानव में मजहबी घृणा फैलाना
    किसी खुदा बाप का दिली अरमान नहीं!

    सृष्टि जबतक चलती रहेगी
    तबतक कोई आखिरी कदम नहीं
    सृष्टि जबतक जीवंत रहेगी
    तबतक कोई आखिरी कथन नहीं!

    सृष्टि जबतक आगे बढ़ती रहेगी
    तबतक मसीहा आगमन रुकेगा नहीं
    अस्तु हर जीव जंतुओं से प्यार करो
    ईश्वर अल्लाह खुदा का पैगाम यही!
    —-विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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