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    Homeशख्सियतलौहपुरुष सरदार पटेल जी के जन्मदिवस पर

    लौहपुरुष सरदार पटेल जी के जन्मदिवस पर

    आज का दिन भारतीय इतिहास का स्वर्णिम दिन है l आज भारतीयता का शंख फूंकने बाले, जन जागरण अभियान से जन जन को जगाने बाले, यशस्वी महापुरुष का जन्म दिवस है l

    बात हो रही है लौहपुरुष, भारत रत्न, सरदार वल्लभभाई पटेल की l लौहपुरुष का जन्म गुजरात प्रांत के खेड़ा जिले के नाडियाड में 31 अक्टूबर सन 1875 को एक किसान परिवार में हुआ था l

    वल्लभभाई पटेल के पिता का नाम श्री झावर भाई पटेल और माता का नाम श्रीमती लाडवा पटेल था  l

    वल्लभभाई अपने माता पिता की चौथी संतान थे l इनका विवाह सन 1893 में श्रीमती झावेरबा पटेल से हुआ था l इनकी दो संतान हुई, पुत्री का नाम मणिवेन पटेल और पुत्र का नाम दाहया पटेल था l

    सरदार पटेल बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे l पटेल जी 1910 में इंग्लैंड गए, ला की डिग्री आधे समय में ही पूरी करली, वो भी पूरी यूनिवर्सिटी में पहला स्थान हासिल किया, इन्हें 50 पौंड का नगद पुरस्कार और सम्मान पत्र प्राप्त हुआ l ला की डिग्री प्राप्त कर आप भारत आ गए और वकालत प्रारंभ की l

    एक बार पटेल जी न्यायालय जा रहे थे, कोर्ट पहुंचते ही इन्हें एक तार मिला, तार पढ़कर इन्होने उसे जेब में रख लिया, एक स्वतंत्रता सेनानी के केस की आखिरी बहस थी, आपने छह घंटे तक अनवरत जिरह की, इनके तथ्यों तर्कों की बदौलत वह सेनानी निर्दोष बरी हो गया  l जब अंग्रेज पत्रकारों को पता चला की तार में उनके पत्नी के निधन का समाचार था, पत्रकारों ने पूछा आपने ऐसा क्यों किया, वल्लभभाई पटेल ने जबाब दिया था की मृत्यु पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन अपने मुवक्किल को बचाना मेरे नियंत्रण में है l धन्य है भारत माता का यह दृढ़ निश्चयी लाल, इनका कोटि कोटि वंदन अभिनंदन है  l

    सन 1928 में बारडोली में इन्होने किसानों के विशाल सत्याग्रह का नेतृत्व किया, लाखो लाख किसानों ने इन्हें “सरदार” की उपाधि से विभूषित किया, तभी से आपको सरदार वल्लभ भाई पटेल कहा जाने लगा l आप निडर दृढ़ निश्चयी थे, इसी लिए आपको लौहपुरुष कहा जाने लगा  l स्वतंत्रता के बाद ये देश के पहले उप प्रधान मंत्री और पहले गृह मंत्री बनाए गए  l आपके द्वारा 565 देशी रियासतों का भारत में विलय कराया गया  l यदि आपकी बातों से तत्कालीन प्रधानमंत्री सहमत होते तो सायद कश्मीर समस्या ही न होती  l

    15 दिसम्बर 1950 को यह भारत माँ की आँखों का तारा अलविदा हो गया, लेकिन ऐसा काम कर गया की हम सदा इनके ऋणी रहेंगे l सन 1991 में इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया, गुजरात में सन 2018 में इनकी 182 मीटर (597 फिट) ऊँची प्रतिमा का अनावरण किया गया है  l आज लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिवस के अवसर पर हम सभी भारतीय उन्हे कोटि कोटि नमन  करते हैं,।

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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