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    Homeसाहित्‍यकविताआज कोई याद मुझको !

    आज कोई याद मुझको !

    आज कोई याद मुझको, स्वप्न में आया किया;
    प्रीति में हर्षा रुला कर, प्राण को परशा किया !

    प्रणव की हल्की फुहारें, छोड़ वह गाया किया;
    प्रवाहों की प्रगढ़ता में, प्रवाहित मुझको किया !
    दूर से आयाम आ, आरोह का स्वर दे गया;
    रूह हर हरकत विचरता, रोशनी मुझको दिया !

    जागरण की चौखटों पर, खटखटाता वह गया;
    आँख मूँदे शिशु वत, सहला सुला चाहा किया !
    उझकता पलकों की सिहरन, स्मरण की झाँकियाँ;
    थपथपा लख मुस्कराहट, ‘मधु’ का प्रभु रह गया !

    रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

    गोपाल बघेल 'मधु'
    गोपाल बघेल 'मधु'
    गोपाल बघेल ‘मधु’ अध्यक्ष अखिल विश्व हिन्दी समिति आध्यात्मिक प्रबंध पीठ मधु प्रकाशन टोरोंटो, ओन्टारियो, कनाडा www.GopalBaghelMadhu.com

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